
इन्द्रधनुष में क्यों नही दिखाई देते काले, भूरें और धूसर रंग Publish Date : 07/11/2025
इन्द्रधनुष में क्यों नही दिखाई देते काले, भूरें और धूसर रंग
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
इन्द्रधनुष, अक्सर बारिश के बाद दिखाई देते है। हम सभी जानते हैं कि इन्द्रधनुष में 7 रंग होते हैं, परन्तु शायद किसी ने भी यह नहीं सोचा होगा कि इन्द्रधनुष में काले, भूरे और धूसर रंग क्यो नहीं दिखाई देते हैं और क्या है इसका विज्ञान?
बारिश होने के बाद जब भी आसमान में इन्द्रधनुष उभरता है तो लगता है कि मानों प्रकृति स्वयं मुस्कुरा रही हो। लाल से बैंगनी रेगों की यह अर्धवृत्ताकार लड़ी हमारे मन को बरबस ही मोह लेती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुदरत के इस रंगीन नजारे में काल, भूरा या धूसर (ग्रे) रेग क्यों नहीं होता है।?
सूर्य के प्रकाश के कारण हमें सफेद रंग दिखाई देता है जबकि इन्द्रधनुष लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी रंग आदि के समेत सात रेंगों का मिश्रण होता है। इन रंगों की तरंगों की लम्बाई अलग-अलग होती है जैसे लाल रंग की तरंग सबसे अधिक लम्बी तो बैंगनी रंग की तरंग की लम्बाई सबसे कम होती है। पानी की बूंदों से जब यह किरणें टकराती हैं तो प्रत्येक रंग अलग कोण पर झुकता है। इस प्रकार की लाखों बूंदों मिलकर बनाती हैं यह मनमोहक सतरंगी इन्द्रधनुष, जो कुछ पलों के लिए ही सही, आसमान को जादुई रूप प्रदान करती है।

अब महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि जब प्रकाश के अन्दर इतने रंग मौजूद हैं तो फिर इसमें मौजूद काला, भूरा और धूसर रंग कहां गायब हो जाते हैं? असल में प्रकाश में काला रंग अनुपस्थित होता है, क्योंकि जहां रोशनी नहीं होती है काला रंग वहीं होता है, लंकिन इन्द्रधनुष तो तब ही बनता है सूर्य की रोशनी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है, यही कारण है कि वहां कालेपन के लिए काई स्थान नहीं होता है। यह बात तो हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि काला रंग उसी जगह पर दिखाई देता है जहां प्रकाश नहीं पहुँच पाता है और इन्द्रधनुष तो वास्तव में पूरी तरह से ही प्रकाश का उत्सव होता है।
वहीं भूरा रंग लाल और हरे रंग के मिश्रण से बनता है, परन्तु इन्द्रधनुष में लाल और हरे रंग के बीच पीला और नारंगी रंग उपलब्ध होते हैं, जिसके चलते इन दोनों रंगो का प्रत्यक्ष मिश्रण सम्भव नहीं हो पाता है, इसके कारए इन्द्रधनुष में भूरा रंग भी दिखाइ्र नहीं देता है। विशेष बात यह है कि हमारे आस-पास भूरा रंग काफी दिखाई देता है जैसे मिट्टी, लकड़ी, बाल या जानवरों आदि में, परन्तु यह कई रंगों का जटिल मिश्रण होता है, जो कि इन्द्रधनुष जैसी पारदर्शी और सटीक प्रकाश व्यवस्था में बनना सम्भव ही नहीं है।

धूसर (ग्रे) रंग सफेद और काले रंग के मिश्रण से बनता है, लेकिन इन्द्रधनुष में न तो सफेद रंग की बचता है (क्योंकि यह सूर्य के प्रकाश के सातों रंग में विभाजित हो चुका होता है), और काला रंग तो इन्द्रधनुष में मौजूद ही नहीं होता है। इस कारण इन्द्रधनुष में धूसर रंग की भी कोई सम्भावना नही रहती है। ग्रे रंग अक्सर तब दिखाई देता है जब रोशनी कम होती है या वस्तुएं छाया में होती हैं, जबकि इन्द्रधुनष की दुनिया में तो प्रत्येक बूंद रोशनी से दमक रही होती है।
एक दिलचस्प बात यह भी है कि इन्द्रधुनष के रंग स्पष्ट सीमाओं में बंधे नहीं होते हैं। नीले और हरे रंग के बीच अक्सर फिरोजी झलक दिखाई देती है जो रंगों के आपसी मिलन का सुन्दर उदाहरण है। कुछ वैज्ञानिक बताते हैं कि हमारी आंखें भी सभी रंगों को समान रूप् से नहीं दख पाती है। इसलिए जो सात रंग हमें दिखाई देते हैं वह एक निरंतर श्रृंखला है, जिसकी सीमाएं हमारी दृष्टि और प्रकाश के कोण पर निर्भर करती हैं।
अगली बार जब भी आप इन्द्रधनुष को देखें तो उसके रंग गिनने का प्रयास कीजिएगा। आपको महसूस होगा कि यह केवल सात रंगी ही नहीं हैं, बल्कि यह तो अनगिनत रंगों की एक सतत धारा है, जिसमें केवल काला, भूरा और धूसर (ग्रे) रंग ही नहीं है। इन्द्रधनुष प्रकृति का एक जादू है, जो बताता है कि कभी-कभी सुन्दरता ‘उपस्थिति’ में नहीं, अपितु ‘अनुपस्थिति’ में भी निहीत होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
