
घर की छत और बालकनियों में फल-सब्जियों का उत्पादन Publish Date : 30/08/2025
घर की छत और बालकनियों में फल-सब्जियों का उत्पादन
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
आजकल घरों की छत और बालकनियों में लोग स्वयं उगा रहे फल-सब्जियां दिल्ली-एनसीआर के हजारों निवासी, जिनमें छात्र, पेशेवर, गृहिणी और बुजुर्ग आदि सभी वर्गों के लोग शामिल हैं, अब बड़ी संख्या में लोग शहरी बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में, कोई इसे सोशल मीडिया पर साझा कर रहा है तो कोई इससे व्यवसाय के रूप में स्थापित भी कर रहा है।
आजकल दिल्ली के घरों की बालकनियों और छतों पर एक हरित क्रांति आकार ले रही है। पहले जहां लोग केवल तुलसी का पौधा या कुछ सजावटी पौधें ही घरों में लगाते थे, वहीं अब लोग अपने घरों में टमाटर, बैंगन, धनिया, मिर्च, फूल और यहां तक कि अंगूर और स्ट्रॉबेरी आदि को भी उगा रहे हैं। दिल्ली की लाजपत नगर निवासी 66 वर्षीय पूनम आहूजा ने वर्ष 2020 में कोविड काल के दौरान एक तुलसी के पौधे से इसकी शुरुआत की थी। अब उनकी 150 वर्गफुट की बालकनी और छत पर पालक, सूरजमुखी, बैंगन, कद्दू और यहां तक कि नींबू के पेड़ भी बहुत अच्छे से लहलहा रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर के हजारों निवासी जिनमें छात्र, पेशेवर, गृहिणी और बुजुर्ग आदि सभी वर्गों के लोग शामिल हैं, अब शहरी बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अब कोई तो इसे सोशल मीडिया पर साझा कर रहा है तो कोई इसे एक व्यवसाय के रूप में भी खड़ा कर रहा है। यह लोग अब 'Mission Green Delhi' और 'Delhi Greens' जैसे समुदायों का हिस्सा बन चुके हैं, जो पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा दे रहे हैं।
48 वर्षीय प्रवीण मिश्रा ने 2016 में जैविक खेती में प्रशिक्षण लेने के बाद ”Mission Green Delhi” के माध्यम से हजारों परिवारों को कंपोस्टिंग, बायो-एंजाइम और बिना रसायन के खेती की ट्रेनिंग दी है। उनका मानना है, “हमें खेती के लिए एक एकड़ जमीन की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि केवल थोड़ी सी जानकारी और जागरूकता ही होनी चाहिए। ऐसे में घरों की बालकनी, खिड़की या दीवार से भी इसकी शुरुआत आसानी से की जा सकती है।”
शौक से व्यवसाय तक का सफर

प्रीत विहार की किशी अरोड़ा, जो शेफ, बेकरी संचालक और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर हैं, अब 150 से अधिक पौधों की देखरेख स्वयं ही कर रही हैं। उनके घर की छत पर फूल, सब्जियां, फल, औषधीय पौधें और सजावटी पौधों की भरमार है। स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, अंगूर और पुदीना जैसे अनेक पौधे उनके किाचन गार्डन की पहचान बन गए हैं।
उनके द्वारा बनाए हुए ऑर्गेनिक जैम, 1500 रुपये में दो जार के पैक में ऑनलाइन माध्यम से बिकते हैं। उनका ब्रांड 'Foodaholics' अब शौक से आगे बढ़कर एक ख्याति प्राप्त ब्रांड बन चुका है। इसी तरह द्वारका निवासी नर्केश यादव और उनके बेटे कविंदर यादव ने ”NK Greens” नाम से एक गार्डनिंग सर्विस और जैविक खाद ब्रांड “ShaktiGro Plant Elixir” की शुरुआत की है।
सरकारी योजनाएं बनी अधूरी कहानियां

वर्ष 2022 में दिल्ली सरकार ने ‘मुख्यमंत्री शहरी बागवानी योजना’ की घोषणा की थी, लेकिन यह योजना मंजूरी और चुनावी कारणों से कभी धरातल पर नहीं उतर पाई। जबकि केरल, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों ने शहरी बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सफल योजनाएं चलाई हैं।
बाधाएं और उम्मीदें
दिल्ली में जगह और पानी की कमी एक बहुत बड़ी चुनौती है। कई अपार्टमेंट में साझा छतों का उपयोग नहीं हो पाता। गर्मियों में पानी की किल्लत भी रहती है। लेकिन इसके बावजूद लोग हार नहीं मान रहे। जैसा कि इसके सम्बन्ध में किशी अरोड़ा कहती हैं, “पौधे कोई समस्या लेकर नहीं, समाधान के साथ आते हैं। जरूरत है धैर्य और प्यार की।”

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
