
बाजार में जामुनी रंग की फ्रेंच बीन अब ‘‘पंजाब रंगत’’ के नाम से बिकेगी Publish Date : 08/08/2025
बाजार में जामुनी रंग की फ्रेंच बीन अब ‘‘पंजाब रंगत’’ के नाम से बिकेगी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग, पुणे की 12 वर्षों की रिसर्च के बाद जामुनी रंग की फ्रेंच बीन तैयार की है, जिसका नाम ‘‘पंजाब रंगत’’ रखा गया है। बाजार में अब तक केवल हरी फ्रेंच बीन सब्जी की मिलती थी, लेकिन जल्दी ही बाजार में आपको जमीनी रंग की फ्रेंच बीन भी खाने को मिल सकेगी। यह बीन सिर्फ पोषक तत्वों से भरपूर ही नहीं है, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने और ग्राहकों को आकर्षित करने में भी मदद करेगी। क्योंकि इसमें एंथोसाइएनिन नामक तत्व अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिसके कारण इसका रंग जामुनी हो जाता है।
पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के डॉक्टर तरसेम सिंह ढिल्लों और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ0 रूपा देवी ने इस किस्म को विकसित करने में सफलता पाई है। पंजाब में कई जगह ट्रायल सफल रहने के बाद किसानों के लिए इस किस्म की सिफारिश कर दी गई है। जामुनी रंग की इस फ्रेंच बीन पोषण से भरपूर माना गया है।
पाली हाउस या नेट हाउस में भी उगाई जा सकेगी

वैसे तो फ्रेंच बीन की खेती खुले खेतों में ही की जाती है, लेकिन इस किस्म की खेती किसान भाई पाली हाउस या नेट हाउस में भी कर सकते है, जिससे इनमें बीमारियां कम लगती हैं और वर्ष में दो बार इसकी बुवाई की जा सकती है। पहले सितंबर और फिर जनवरी के आखिरी सप्ताह में इसको बोया जा सकता है। फसल लगभग 65 दिन में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है और 5 से 6 बार इसकी तुड़ाई की जा सकती है। इस बीन फली की लंबाई लगभग 21 सेंटीमीटर तक होती है।
सितंबर माह की बुवाई में प्रति एकड़ लगभग 127 कुंतल और जनवरी की बुवाई में लगभग 132 कुंतल प्रति एकड़ तक उपज प्राप्त की जा सकती है। इस बीन के बीज पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में उपलब्ध है। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में तैयार जामुनी फ्रेंच बीन की कई राज्यों में आपूर्ति शुरू भी कर दी गई है। पंजाब के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र आदि राज्यों में इसकी काफी डिमांड है। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने जामुनी रंग के साथ हरे रंग की फ्रेंच बीन की भी एक अन्य नई किस्म भी तैयार की है, जिसका नाम पंजाब आनंद रखा गया है। इसकी सिफारिश भी नेट हाउस एवं पाली हाउस में खेती के लिए की गई है और इसकी डिमांड भी काफी अधिक है।
‘‘पंजाब रंगत’’ में शरीर को विभिन्न रोगों से बचाने वाला एंथोसाइएनिन नामक तत्व होता है मौजूद
किसानों को नया विकल्प देने के लिए इस जामुनी रंग की फ्रेंच बीन पर 12 वर्ष पहले वैज्ञानिाकें ने काम करना शुरू किया था और अब शोध पूरा हो चुका है। जामुनी रंग की वजह से इस किस्म में एंथोसाइएनिन तत्व भी अधिक होते हैं। इसी तत्व के कारण फ्रेंच बीन हरे के स्थान पर जामुनी रंग की हो जाती है। यह तत्व एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर को विभिान्न पगकार की बीमारियों से बचाता है। इस बीन के प्रति 100 ग्राम फली में 88 मिलीग्राम एंथोसाइएनिन पाया जाता है, जिसमें 2.53 प्रतिशत प्रोटीन भी विद्यमान होता है।
यूनिवर्सिटी ने पहली बार फ्रेंच दिन की बेल वाली किस्म तैयार की है, जिसकी ऊंचाई 8 से 10 फीट तक होती है। बेल अवस्था में होने के कारण इसमें उत्पादन भी अच्छा प्राप्त किया जा सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
