
मानव की सच्ची सफलता Publish Date : 29/09/2026
मानव की सच्ची सफलता
प्रो0 आर. एस. सेंगर
मनुष्य की सफलता में धन, बाहुबल, बुद्धिबल और अन्य साधनों की अपनी भूमिका होती है, किंतु मनोबल ही वह शक्ति है जो कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को अपने लक्ष्य से विचित्र नहीं होने देती है।
तब वहीं संकल्प बन जाता है। इससे निरंतर अभ्यास और छोटे छोटे संकल्पों को पूरी करके विकसित किया जा सकता है। किसी छोटे कार्य को हाथ में लेकर उसे पूरी निष्ठा से पूर्ण करना और उसके बाद अगले कार्य की ओर बढ़ना आत्मविश्वास को मजबूत करता है। यह बात डाक्टर आर. एस. सेंगर अधिष्ठाता जैवप्रौद्योगिकी महाविद्यालय ने कही उन्होंने बताया कि प्रत्येक पूर्णकार्य मन में यह विश्वास पैदा करता है कि कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है।
धीरे-धीरे यही विश्वास मनोबल में परिवर्तित हो जाता है। इसके विपरीत, अनिश्चित मनुष्य की शक्ति को पूर्ण करता है, कभी एक काम शुरू करना, फिर उसे अधूरा छोड़कर दूसरे काम में लग जाना और फिर तीसरे की ओर बढ़ जाना। यह मन की अस्थिरता का संकेत है। ऐसी स्थिति में ऊर्जा तो बहुत खर्च होती है लेकिन उपलब्धि नग्न रहती है। इसलिए किसी कार को आरंभ करने से पहले उसके उद्देश्य लाभ हानि, आवश्यक संसाधनों और संभावित कठिनाइयों पर विचार करना आवश्यक है।
मनोबल का एक अर्थ उत्साह और रुचि है, जिस कार्य को व्यक्ति पूरे मन से करता है, उससे सृजनात्मकता और उत्कृष्टता स्वतः आने लगती है। इसके विपरीत, अनिच्छा से किया गया कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है।अंततः मनोबल वह आंतरिक दीपक है जो साधनों के अभाव में भी रास्ता दिखाता है और साधनों की अधिकता में भी दिशा बनाए रखता है। दृढ़ संकल्प स्पष्ट लक्ष्य निरंतर अभ्यास और पूरे मन से किया गया कर्म। इन्हीं से मनोवल विकसित होता है। डॉक्टर आर एस सेंगर अधिष्ठाता बायोटेक्नोलॉजी, सरदार वल्लभभाई पटेल, एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मेरठ ने बताया कि जिस व्यक्ति ने अपने मन को साथ लिया, उसने सफलता की सबसे बड़ी पूंजी प्राप्त कर ली।
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।