ज्ञान मुद्रा के माध्यम से बढ़ाएं अपनी एकाग्रता      Publish Date : 28/09/2026

ज्ञान मुद्रा के माध्यम से बढ़ाएं अपनी एकाग्रता

                                                                                                                    प्रो0 आर. एस. सेंगर

हर व्यक्ति चाहता है कि वह जीवन में बुद्धिमान बने और इसके लिए ज्ञान मुद्रा अत्यंत ही लाभकारी सिद्व होती है। ज्ञान मुद्रा के अभयस से व्यक्ति की बुद्धिमत्ता, स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि होती है। इस मुद्रा का नियमित अभ्यास करने से मस्तिष्क को अधिक सक्रिय और केंद्रित बनाया जा सकता है। हमारे ऋषि मुनि कहते आएं हैं कि हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है- आकाश, वायु, पृथ्वी, अग्नि और जल। इन्हीं तत्वों का प्रतीक हमारे हाथ की पांच उंगलियों भी होता हैं। अंगूठा अग्नि तत्व, तर्जनी वायु तत्व, मध्यमा आकाश तत्व, अनामिका पृथ्वी तत्व और कनिष्ठा जल तत्व का प्रतीक है।

सुजोक चिकित्सा के अनुसार हमारा अंगूठा हमारे मस्तिष्क का प्रतीक होता है। जैसे हमारा मस्तिष्क पूरे शरीर को नियंत्रित करता है, ठीक उसी प्रकार से ही अंगूठा सभी उंगलियों को नियंत्रित करता है।

जब हम तर्जनी (वायु तत्व) और अंगूठे (अग्नि तत्व) के अग्रभाग को मिलाते हैं, तो यह एक ऊर्जा का सर्किट बनाता है। जैसे बिजली की धारा दिखाई नहीं देती पर वह निरंतर प्रवाहित होती रहती है, उसी प्रकार इस मुद्रा से ऊर्जा प्रवाह शुरू होता है और मस्तिष्क सक्रिय तथा मन शांत होता है। ज्ञान मुद्रा लगाने के लिए आप सबसे पलिक आराम से पद्मासन, सुखासन या किसी भी ध्यान मुद्रा में बैठें।

इसके बाद अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रखें। तर्जनी के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से स्पर्श कराएं। बाकी तीन उंगलियों को सीधा रखें। आंखें बंद करें। पीठ सीधी रखें और शरीर को ढीला छोड़ दें और धीरे-धीरे अपने श्वास-प्रश्वास पर ध्यान केंद्रित करें। जब आप इस मुद्रा में ध्यान करते हैं, तो आपका मन शांत होता है और इसके साथ ही आपकी एकाग्रता भी बढ़ती है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।