आचरण में उतारा जाने वाला ज्ञान ही महान      Publish Date : 26/09/2026

आचरण में उतारा जाने वाला ज्ञान ही महान

                                                                                                                     प्रो0 आर. एस. सेंगर

ज्ञान ही हमारी आत्मा का भोजन होता है। जिस प्रकार से हमारा शरीर स्वस्थ और शक्तिशाली बने रहने के लिए शुद्ध, पौष्टिक और संतुलित भोजन चाहता है, उसी प्रकार हमारी आत्मा, मन और बुद्धि भी उत्तम विचारों और सच्चे ज्ञान से ही पोषित होती है। जैसे यदि शरीर को खराब भोजन दिया जाए, तो वह बीमार पड़ जाता है, ठीक वैसे ही अगर मन को भ्रम, झूठ, लालच और अज्ञानता से भर दिया जाए, तो मनुष्य के चरित्र, सोच और उसके जीवन का पतन होने लगता है। इसलिए, ज्ञान महज प्राप्त करने की वस्तु नहीं है, बल्कि उसे अच्छी तरह से पहचानने व समझने की भी उतनी ही जरूरत होती है।

संसार में ज्ञान के अनेक स्रोत उपलब्ध हैं। हर दिन अनेक लोग हमें कुछ नया सिखाने का दावा करते हैं, लेकिन हर सूचना सत्य नहीं होती और हर विचार हमारे जीवन के लिए उपयोगी भी नहीं हो सकता। जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लेता है, वह अनजाने में अपने मन को ऐसे विचारों से भर लेता है, जो उसके निर्णयों और जीवन-दृष्टि को भ्रमित कर सकते हैं। इसलिए, वास्तविक बुद्धिमत्ता अधिक जानकारी जुटाने में नहीं, बल्कि यह पहचानने में है कि कौन-सा ज्ञान हमारे जीवन को समृद्ध करेगा और कौन-सा हमें भटका सकता है।

ज्ञान का प्रभाव केवल हमारी स्मृति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह सीधे हमारे व्यक्तित्व और आत्मा को भी अंदर तक प्रभावित करता है। भोजन को ग्रहण करने से पहले उसकी गुणवत्ता परखी जा सकती है, लेकिन किसी विचार को स्वीकार करते ही वह हमारे सोचने का तरीका बदलना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे वही विचार हमारे निर्णयों, व्यवहार और भविष्य की दिशा निर्धारित करने लगते हैं। यही कारण है कि हमें अपने विवेक का उपयोग करते हुए ऐसे विचारों और ज्ञान का चयन करना चाहिए, जो हमें सही मार्ग दिखाएं। इस चयन में अच्छी पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

श्रेष्ठ पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं होतीं, बल्कि उनमें पीढ़ियों का अनुभव, संघर्ष, सत्य और मानवता का सार निहित होता है। अच्छी पुस्तकें पढ़ने से हमारा दृष्टिकोण व्यापक बनता है, सोच अधिक परिपक्व होती है और आत्मविश्वास मजबूत होता है और वह पुस्तकें ही हैं जो कि हमें एक अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा भी देती हैं।

जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल जानकारी पर्याप्त नहीं होती। आवश्यक यह है कि हम सही ज्ञान को अपनाएं और उसे अपने व्यवहार में उतारें यह अधिक अवाश्यक एवं मूल्यवान होता है। इस प्रकार जो ज्ञान हमें विनम्र बनाए, सत्य के निकट ले जाए, दूसरों के प्रति सम्मान सिखाए और कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की शक्ति दे, वही वास्तविक ज्ञान है। ऐसा ज्ञान मनुष्य के व्यक्तित्व को प्रकाशित करता है और उसके जीवन को अर्थ प्रदान करता है। इसलिए हर दिन अपने मन को उत्तम विचारों से पोषित करें।

ऐसी पुस्तकें पढ़ें, जो आपके भीतर आशा जगाएं, आपके चरित्र को मजबूत बनाएं और आपको सत्य, करुणा तथा विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।