अपना अंतः अन्वेषण अवश्य करें      Publish Date : 22/09/2026

          अपना अंतः अन्वेषण अवश्य करें

                                                                                                                      प्रो0 आर. एस. सेंगर

यदि यह एक अहम प्रश्न अपने आप से किया जाए कि ‘मैं कौन हूं?’, तो संभवतः इसका उत्तर खोजना कठिन होगा। कारण यह है कि इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर अन्वेषण का परिणाम होते हैं, किंतु यह प्रश्न स्वयं के समक्ष रखने से पूर्व हमने मंथन नहीं किया। सत्य तो यह है कि इस लघु, किंतु नितांत जटिल प्रश्न के लिए एक गहन एवं दीर्घ अन्वेषण की आवश्यकता होती है। यह अन्वेषण है- ‘अंतःअन्वेषण’अर्थात अपने भीतर के ज्ञान, सत्य एवं चेतना की खोज।

यह कठिन है, किंतु जिसने स्वयं को समझ लिया तो समझिए उसने संसार को समझ लिया। उसके लिए कोई भी स्थिति मायने नहीं रखती। अंतर्मन से संवाद हमें मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास तथा आत्मिक संतोष प्रदान करता है। अंतः अन्वेषण कोई क्षणिक प्रक्रिया नहीं, अपितु जीवन भर चलने वाली एक महत्वपूर्ण साधना है। यह हमें बाहरी उपलब्धियों के मोह से ऊपर उठाकर आंतरिक परिपक्वता की ओर ले जाती है। ऐसे में जो व्यक्ति स्वयं के भीतर छिपे प्रकाश को पहचान लेता है, वह अंधकार भरी राह पर भी सहजता से आगे बढ़ता है। वह चुनौतियों को भी अवसर में रूपांतरित करने की क्षमता से समृद्ध हो जाता है।

अंतः अन्वेषण का अर्थ संसार से पलायन करना या सांसारिक उत्तरदायित्वों से विमुख होना कदापि नहीं होता है। इसका वास्तविक आशय अपने भीतर उतरकर अपनी चेतना, विचारों, भावनाओं, गुणों, कमजोरियों, आकांक्षाओं और जीवन के उद्देश्य को समझना होता है। प्रत्येक मनुष्य के भीतर अपार संभावनाएं विद्यमान होती हैं, किंतु उनका विकास तभी संभव है, जब वह स्वयं के व्यक्तित्व का निष्पक्ष मूल्यांकन करे। जो व्यक्ति स्वयं को पहचान लेता है, वह परिस्थितियों का दास नहीं बनता, बल्कि उनका निर्माता बनने का साहस अर्जित करता है।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि अंतः अन्वेषण हमें स्वयं पर विजय प्राप्त करना सिखाता है। ऐसे व्यक्ति के लिए जीवन का प्रत्येक क्षण ज्ञान, संतुलन, करुणा और आत्मोन्नति का माध्यम बन जाता है। यही अंतः अन्वेषण की वास्तविक सार्थकता होती है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।