
नशे के विरूद्व जन आन्दोलन Publish Date : 09/08/2026
नशे के विरूद्व जन आन्दोलन
प्रो0 आर. एस. सेंगर
-
हम सभी को नशे के खिलाफ लड़ाई के लिए एक व्यापक जन आंदोलन चलाना होगा, -डॉ आर एस सेंगर-
भारत में निरंतर बढ़ती नशे की लत की समस्या, अब केवल कानून व्यवस्था का ही नहीं बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय विकास के लिए भी गंभीर प्रश्न बन चुकी है। इसी चुनौती को देखते हुए माननीय प्रधानमंत्री ने 2 अगस्त 2026 को नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान का शुभारंभ किया था। इस अवसर पर 1,00,00,000 युवाओं ने नशा मुक्ति की शपथ ली थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति के शरीर को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियां और उसके बच्चों का भविष्य छीन लेता है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आज के युवा वर्ग को नशे से दूर रहना अनिवार्य ही नहीं बल्कि समय की मांग भी है।
नशा विरोधी इस अभियान की गूंज देश के अन्य राज्यों में भी दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश में अब नशे से जंग हेतु मैराथन का आयोजन कर हजारों लोगों की भागीदारी से सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया जाएगा। हालांकि, जन जागरूकता तभी प्रभावी होगी जब उसकी रोकथाम, उपचार और पुनर्वास की व्यापक रणनीति के साथ भी इसे जोड़ा जाएगा। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े कई लाख मामले अभी भी लंबित पड़े हुए हैं। अतः इनके शीघ्र निस्तारण के लिए 65 विशेष अदालतें कार्यरत हैं जिनमें से पंजाब में 60 हजार, केरल में 50 हजार और उड़ीसा में 17 हजार के अलावा तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक मामले लंबित हैं। नशे का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव परिवारों पर पड़ रहा है।
हाल ही में एक 16 वर्षीय किशोर को उसकी माँ, नशे और मोबाइल गेमिंग की लत के कारण काउंसलिंग के लिए लाई पिता पहले ही नशे की आदत के चलते परिवार से अलग हो चुके थे और अब बेटा भी उसी राह पर चल पड़ा है। यह कोई एक अकेली घटना नहीं है बल्कि यह हजारों भारतीय परिवारों की एक कड़वी सच्चाई है।
अब कई प्रदेशों ने पिछले कुछ वर्षों से हजारों युवाओं का नशा मुक्ति केंद्र में इलाज प्रारंभ किया हुआ है। ऐसे में यदि हरियाणा की बात करें तो वर्ष 2024-25 में लगभग में लगभग 52,000 से अधिक युवा उपचार के लिए इन केन्द्रो पर पहुंचे हैं।
इसी प्रकार कई जिलों में देखा गया है कि रोगियों की संख्या में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं पंजाब में भी ढेर सारे लोग किसी न किसी प्रकार के नशे की चपेट में आ रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या शराब की है। उत्तर प्रदेश का भी यही हाल है और यहां भी नशे की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या लगतार बढ़ती जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा उपचार, पुनर्वास और व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से समस्या की वास्तविक तस्वीर समझने का प्रयास कर रही है। इस संकट से निपटने के लिए 5 प्राथमिकताओं पर आधारित रणनीति आवश्यक है। सीमा सुरक्षा और तस्करी पर नियंत्रण विद्यालयों व समुदायों में वैज्ञानिक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य एवं नशा मुक्त सेवाओं का एकीकरण, प्रभावी पुनर्वास तथा परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी। यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो नशे के खिलाफ लड़ाई, पुलिस और कानून तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि परिवार, विद्यालय, स्वास्थ्य व्यवस्था, क्षमता और न्याय प्रणाली के संयुक्त प्रयास से ही इस सामाजिक चुनौती का स्थायी समाधान किया जा सकता है।
नशे की लत से युवाओं को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एक मुहिम छिड़ी गई है कि वहां पर छात्रों की काउंसलिंग करके नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तेजी लाई जाए। इस क्षेत्र में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक अपने भागीदारी कर छात्रों को समझा रहे हैं। उनके हॉस्टलों में जा रहे हैं उनकी अलग से काउंसलिंग की जा रही है कक्षा में भी। बाद में दस मिनट तक नशे के दुष्प्रभावों और उनके वैज्ञानिक कारणों को भी बताया जा रहा है कि आप इस कुरीति से यदि दूर रहेंगे तो आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और आप जीवन में एक सफल नागरिक बनकर देश अच्छी सेवाएं दे सकेंगे।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।