
विजेता वही जो हर परीक्षा के लिए तैयार रहे Publish Date : 17/01/2026
विजेता वही जो हर परीक्षा के लिए तैयार रहे
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
यह दुनिया सफलता को तभी स्वीकार करती है, जब वह किसी सार्थक उद्देश्य को पूरा करे, यानी जब वह समाज को बेहतर बनाए, लोगों के जीवन में समृद्धि लाए और जनहित में अपना योगदान दे। चाहे हमारे कर्मक्षेत्र का दायरा छोटा ही क्यों न हो, यदि हम अपनी कमजोरियों पर विजय पाएं, सही राह पर चलते हुए दूसरों के जीवन में रोशनी भरें, और अपने रोजमर्रा के कार्यों को आवश्यकता से बेहतर करने का प्रयास करें, तो निस्संदेह हमारा जीवन सफल माना जाएगा। और यदि जीवन के अंत में हम कृतज्ञता से भरकर यह महसूस कर सकें कि हमने अपने समय, अवसरों और जीवन का सर्वोत्तम इस्तेमाल किया, तो यही सच्ची सफलता है।
लेकिन कुछ लोग सफलता को केवल धन और शोहरत तक सीमित कर देते हैं। ऐसे लोग भले ही बाहरी रूप से सफल दिखते हों, लेकिन वे अंततः एक असफल इन्सान ही साबित होते हैं, क्योंकि ऐसे लोग धन तो कमा लेते हैं, पर एक समय के बाद उन्हें एहसास होता है कि पैसे से कभी भी असली शांति या संतुष्टि नहीं खरीदी जा सकती। उनकी कामयाबी बाहर से तो सुनहरी दिखती है, लेकिन भीतर से खोखली और महंगी होती हैं,जिसके बदले वे जीवन का असली रस खो देते हैं। एक महान विद्वान ने कहा था कि यदि मनुष्य संपूर्ण संसार भी जीत ले, पर अपनी आत्मा खो दे, तो उसे क्या लाभ? यदि वह धन की लालसा में अपने सुख, अपने स्वास्थ्य, अपनी संवेदनशीलता, परिवार की मधुरता, प्रकृति की सुंदरता और जीवन का आनंद खो दे, तो उसकी जीत भी पराजय बन जाती है।

जो व्यक्ति जीवन में बिना दिशा के भटकता रहता है, और बेहत्तर बनने का प्रयास ही नहीं करता, वह नागरिक कहलाने के योग्य नहीं है। यदि इन्सान को इस उपाधि के योग्य बनना है, तो उसे निरंतर प्रयास करते हुए उन्नति पाने को अपनां सिद्धांत बनाना होगा। दरअसल, सफलता व असफलता का मूल इन्सान के चरित्र में छिपा होता है। केवल वही व्यक्तिं जीवन की कठोर चुनौतियों का सामना कर सकता है, जिसकी आत्मा पवित्र हो, संकल्प मजबूत हो और चरित्र - अडिग हो। ऐसे व्यक्ति को जीवन के हर मोड़ पर कठिनाइयों की परीक्षा देनी पड़ती है। यह जरूरी भी है, क्योंकि कठिनाइयां कमजोर इच्छाशक्ति वाले लोगों को अंलग कर देती हैं, और वही लोग आगे बढ़ते हैं, जिनमें विश्वास, साहस, धैर्य, दृढ़ता, प्रसन्नता और चरित्र बल का प्रकाश प्रबल होता है।
याद रखें, जीवन की यात्रा में विजेता वही है, जो हर परीक्षा के लिए तैयार रहे. और सफलता की चमक में भी अपनी मानवता को जीवित रखे, क्योंकि यदि मनुष्य स्वयं पर इतना केंद्रित हो जाए कि उसका हृदय कठोर और निर्दयी बन जाए, तो यह असफलता से ज्यादा भयानक पतन है। सच्ची सफलता वही है, जो आत्मा के साथ संसार को भी समृद्ध करे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
