
अपने मन के पहरेदार खुद बनें Publish Date : 12/01/2026
अपने मन के पहरेदार खुद बनें
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
दूसरों के विचार या शब्द आपके जीवन के केंद्र में नहीं होने चाहिए। किसी और की राय को अपनी सच्चाई बना लेना सबसे घातक भूल है, जो आपको कभी अपनी वास्तविक ऊंचाइयों तक नहीं पहुंचने देगी। जब तक आप स्वयं को दूसरों की अपेक्षाओं की जंजीरों में जकड़े रखेंगे, आपके सपने कभी उड़ान नहीं भर पाएंगे।
दुनिया तो हमेशा कुछ न कुछ कहती ही रहेगी, लोग हर कदम पर आपको अपेक्षाओं के तराजू में तौलेंगे भी, लेकिन अपने भीतर का अनमोल प्रकाश केवल आप ही पहचान सकते हैं। इसलिए खुद को अपनी आंखों से देखें, न कि दूसरों के शब्दों के विकृत दर्पण में। आपकी कीमत कभी किसी की निंदा, आलोचना या टकराहट से कम नहीं होती। अक्सर लोग अपनी सीमित दृष्टि से आपकी क्षमताओं का आकलन करते हैं और वे उतना ही देख पाते हैं, जितनी उनकी समझ होती है। लेकिन आपके सपनों का आकाश उनकी कल्पना से कहीं अधिक विस्तृत है।

यदि आप किसी नकारात्मक टिप्पणी को अपने दिल में जगह देंगे, तो वह आपके कदमों को बेड़ियों में बांधने का ही काम करेगी। इसलिए, अपने मन के द्वार का पहरेदार भी खुद ही बनें और केवल उन्हीं विचारों को अपने भीतर जगह दें, जो आपको ऊंचा उठाएं, न कि गिराएं। अपनी ऊर्जा, अपने सपनों, उद्देश्यों और उन्नति की दिशा में लगाएं। जब आप भीतर से अडिग हो जाएंगे, तो बाहरी शोर अपने-आप खामोश हो जाएगा।
हर व्यक्ति अपनी अनूठी यात्रा पर आगे बढ़ता है। जो आपकी आलोचना करते हैं, वे प्रायः अपनी असुरक्षा, डर और अपूर्णता को आप पर थोपते हैं। उन उत्तेजनाओं का प्रतिकार करने के बजाय शांति से उनका सामना करें, क्योंकि आपका मूल्य उनके वाक्यों से परिभाषित नहीं होता। खुद को इतना सशक्त बनाएं कि कोई अप्रिय राय आपके मन को डिगा न सके। यह सीखें कि किसी की बात को अनसुना करना कब जरूरी है और कब अपने मन की पुकार को सुनना, क्योंकि आपकी अंतरात्मा ही आपका सच्चा गुरु है।
स्वयं पर विश्वास होने पर बाहरी मान्यताओं या उपलब्धियों की भूख मिट जाती है। खुद से प्रेम करें, खुद को स्वीकार करें, अपनी शक्तियों पर भरोसा रखें। ये तीन स्तंभ आपको हर नकारात्मक आंधी से सुरक्षित रखेंगे।
हर दिन खुद से कहिए कि आप पर्याप्त हैं, योग्य और अद्वितीय हैं। संसार में आपका कोई सानी नहीं, और यही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। अपना पथ दूसरों की निंदा से भटकने न दें, बल्कि अपने उद्देश्य की ज्योति से उसे प्रकाशित करें। आपका समय सीमित है, इसे दूसरों की अपेक्षाओं में न गंवाएं। वही बनें, जो बनना चाहते हैं, वही करें, जो आपके आंतरिक प्रकाश को और प्रज्वलित करे। जब आप स्वयं को स्वीकारेंगे, सम्मान देंगे और अपनी यात्रा को निष्ठा से निभाएंगे, तो दुनिया की राय मात्र एक क्षीण ध्वनि बनकर रह जाएगी। याद रखें, आप स्वतंत्र हैं, उज्ज्वल हैं, और आपकी उड़ान असीमित है।
सत्य पर अडिग रहें
नकारात्मक शब्द आपके कदम रोकते हैं, इसलिए सकारात्मक विचारों के साथ वही सोच अपनाइए, जो आपको ऊंचा उठाए। अपनी राह को दूसरों की आलोचना से नहीं, बल्कि अपने उद्देश्य की रोशनी से प्रकाशित कीजिए। जब आप सत्य पर अडिग रहते हैं, तो आलोचनाओं काशोर धुंधला पड़ जाता है।'

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
