आपका आचरण ही सबसे बड़ी प्रेरणा है      Publish Date : 10/01/2026

                आपका आचरण ही सबसे बड़ी प्रेरणा है

                                                                                                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

अच्छे लीडर बुरे वक्त में भी अपना उत्साह, समर्पण व सकारात्मक नजरिया बनाए रखते हैं, ताकि टीम का मनोबल न टूटेअक्सर कठिन या बुरा समय आने पर अधिकतर लोग हताश होने लगते हैं, लेकिन एक लीडर के तौर पर आपकी असली परीक्षा इसी वक्त होती है। ऐसी स्थिति में हालात प्रतिकूल होते हैं, फिर भी आपको अपनी टीम को वर्तमान. परिस्थितियों में केंद्रित, आने वाली चुनौतियों के प्रति सतर्क और लगातार ऊर्जावान बनाए रखना होता है। हालांकि, ऐसा तभी संभव है, जब आप स्वयं प्रेरित, मजबूत व केंद्रित बने रहें।

बतौर लीडर आपका आचरण ही टीम के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा होती है। इसलिए, विपरीत हालातों में भी आपको अपना उत्साह, समर्पण व सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना बेहद जरूरी है। ऐसा करने के कुछ तरीके यहां बताए जा रहे हैं।

सबसे अच्छे दिनों को याद करें

कठिन दौर में टीम के सदस्य आपको उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं। ऐसे में, आपको अपने सबसे अच्छे दिनों को याद करके उसी समय के माफिक ऊर्जा तथा हौसले के साथ सबको प्रोत्साहित करना चाहिए। प्रभावी नेतृत्व करने का सबसे अच्छा तरीका है कि पहले आप समझ लें कि आपके नियंत्रण में क्या है, फिर उस पर ध्यान केंद्रित करके उसे बेहतर बनाने का प्रयास करें।

प्रेरणादायी उदाहरण बनें

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जब आप खुद संतुलित और सशक्त रहेंगे, तभी अपनी टीम को प्रेरित व संगठित रख पाएंगे। नेतृत्वकर्ता के रूप में आपके पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। इसके अलावा, सभी लोग आपके नक्शेकदम पर चलते हैं। इसलिए, वही जोश, एकाग्रता तथा समर्पण दिखाना आवश्यक है, जिसकी आप अपनी टीम से अपेक्षा करते हैं। हर दिन स्वयं से यह प्रश्न अवश्य करें कि क्या आपने आज अपनी टीम के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

बगैर लाग-लपेट के बोलें

ऐसे समय में टीम या खुद से झूठ न बोलें। आपके निर्णय और योजनाएं हमेशा वास्तविक तथ्यों और सटीक डाटा पर आधारित होनी चाहिए। टीम के साथ ईमानदार रहें और कोई भी बात बगैर लाग-लपेट के बोलें। साथ ही, सहयोगियों की राय व अनुभव का सम्मान करें। निर्णय लेते समय उस पर विचार जरूर करें। केवल अपनी सोच को सर्वोपरि मानना तथा तथ्यों को अनदेखा करना न सिर्फ आपकी विश्वसनीयता, बल्कि संस्था की साख को भी आघात पहुंचा सकता है।

सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ें

उन परिस्थितियों के बारे में शिकायत करने से बचें, जिन पर आपका नियंत्रण नहीं है, क्योंकि ऐसा करने से केवल अनावश्यक तनाव ही बढ़ेगा। वर्तमान स्थिति को समझते हुए इस बात पर केंद्रित रहे कि आप भविष्य में सकारात्मक बदलाव कैसे ला सकते हैं। इसके लिए रोजाना कुछ समय ध्यान करना फायदेमंद होता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।