खुश रहना जीवन जीने की महान कला है      Publish Date : 08/01/2026

               खुश रहना जीवन जीने की महान कला है

                                                                                                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

हर बात में शिकायत ढूंढना, आलोचना करना और छोटी-सी बात में भी बुराई खोज लेना, आत्मा का धीरे-धीरे क्षय करने वाली सबसे घातक आदत है। यदि यह आदत जीवन की शुरुआत में ही पड़ जाए, तो व्यक्ति अनजाने में इसका कैदी बन जाता है। उसका आत्मबल क्षीण हो जाता है, उसका मन नकारात्मकता की धुंध से घिर जाता है, और फिर उसका पूरा जीवन निराशा और निंदकता की दलदल में फंस जाता है। जीवन में किसी भी क्षेत्र में क़ामयाबी हासिल करने का सबसे पहला नियम है-हर परिस्थिति में उजियारा देखने की आदत डालना। चाहे विपरीत हवा कितनी भी प्रचंड क्यों न हो, अपने मन को यह वचन दीजिए कि मैं हर दिन को एक नई भोर की तरह देखूंगा।

सफलता केवल मेहनत या कौशल का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह आपके दृष्टिकोण का प्रतिबिम्ब भी होती है। चाहे जीवन में कितनी भी चुनौतियां आएं, यदि आप यह संकल्प ले लें कि हर दिन का भरपूर आनंद लेंगे और हर अनुभव में कुछ न कुछ सीखने योग्य ढूंढेंगे, तो आपके भीतर अद्भुत शक्ति जागृत होने लगती है। सकारात्मकता कोई साधारण आदत नहीं, बल्कि आत्मा को ऊंचा उठाने वाला अमृत है। कठिन से कठिन माहौल में भी यदि आप ध्यान से देखें, तो आपको कोई न कोई ऐसा पहलू अवश्य दिखेगा, जो मन को संतोष दे और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाए।

                                                        

युवाओं के लिए यह क्षमता कि वे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मुस्कान बनाए रखें, किसी भी धन-दौलत से अधिक कीमती है। यह वही शक्ति है, जो साधारण मनुष्य को असाधारण बनाने का सामर्थ्य रखती है। इसलिए संकल्प लें कि जीवन में आशावाद आपका स्थायी साथी होगा, निराशा कोआपके भीतर घर करने की अनुमति कभी नहीं मिलेगी, और जहां भी जाएंगे, अपनेसाथ प्रकाश, ऊर्जा और प्रसन्नता लेकर जाएंगे।

खुशी का प्रभाव किसी चमत्कारिक औषधि की तरह होता है। यह केवल मन को ही नहीं, शरीर को भी स्वस्थ बनाती है। एक खुशमिजाज व्यक्ति की उपस्थिति से पूरा माहौल बदल जाता है, वहां मौजूद लोगों के मन में उत्साह और वातावरण मैं नई ऊर्जा का संचार हो जाता है। जैसे एक संगीतकार बनने के लिए केवल इच्छा नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास आवश्यक है, वैसे ही खुश रहना भी एक कला है, एक अनुशासन है। मन में यह विश्वास जगाएं कि हमारे भीतर बाधाओं को पार करने की अपार क्षमता है।

दृष्टिकोण बदलने भर से जीवन का हर दृश्य बदल जाता है। हर बुरी से बुरी घटना में भी कोई न कोई संदेश होता है, कोई सीख छिपी होती है, जो आगे बढ़ना सिखाती है। सच्चाई यही है कि प्रसन्म मनुष्य सबसे अधिक ताकतवर होता है। मैसिलन के शब्दों में 'स्वास्थ्य व अच्छा मूड इन्सान के लिए वही हैं, जो पेड़-पौधों के लिए धूप। खुश रहना कमजोरी नहीं, बल्कि जीवन जीने की सबसे महान कला है।

हमेशा सकारात्मक रहें

जीवन में सफलता का आधार केवल मेहनत नहीं, बल्कि सकारात्मक दृष्टिकोण भी है। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में उजाला देखने की आदत विकसित कर लेता है, वही जीवन की कठिनाइयों को अवसरों में बदल पाता है। शिकायत और आलोचना हमें भीतर से कमजोर करती हैं, जबकि आशावाद आत्मा को शक्ति देता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।