मनरोगा के स्थान पर जय राम जी योजना      Publish Date : 26/12/2025

                 मनरोगा के स्थान पर जय राम जी योजना

                                                                                                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

ग्रामीण भारत में रोजगार सम्मान और सुरक्षा को एक साथ जोड़ने की मंशा से ले गए विकसित भारत की राम जी अधिनियम में महिलाओं का विशेष ख्याल रखा गया है। इस कानून के तहत कुल लाभार्थियों में महिलाओं की कम से कम एक तिहाई जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। यह प्रावधान सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं होगा बल्कि पंजीकरण से लेकर काम आवंटन पहचान भुगतान निगरानी और शिकायत निवारण तक पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से तय किया गया है।

यदि इस योजना का ईमानदारी से पालन हुआ तो जी राम जी ग्रामीण महिलाओं के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार का मजबूत मॉडल बन सकता है। अधिनियम के अनुसार ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए जब किसी परिवार का पंजीकरण होगा तो उसके सभी वयस्क सदस्यों के नाम दर्ज किए जाएंगे। पत्नी बेटी या परिवार की मुखिया सब का नाम दर्ज करना होगा। इससे उन्हें अलग से आवेदन देने या दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

                                                              

पंजीकरण की जिम्मेदारी भी ग्राम पंचायत की होगी, जिससे अनावश्यक भाग दौड़ नहीं करनी पड़ेगी। अकेली रहने वाली महिलाओं के लिए अधिनियम में विशेष व्यवस्था है। विधवा परित्यकता और अविवाहित महिलाओं को अलग से विशेष ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी के जाएंगे। इन कार्डों के आधार पर उन्हें काम देने में प्राथमिकता मिलेगी। मकसद यह है कि उन्हें स्थाई आर्थिक सहारा मिल सके। इन विशेष कार्डों की वैधता 3 वर्ष रखी गई है।

कार्यस्थल में गरिमा व सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा

कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। पीने के पानी, शौचालय, विश्राम स्थल और बच्चों की देखभाल की व्यवस्था को भी अनिवार्य किया गया है। इससे महिलाओं के लिए काम करना सुरक्षित और सुविधाजनक होगा और वह परिवार रोजगार के बीच बेहतर संतुलन बना सकेंगे।

मजदूरी भुगतान की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी रखा गया है। मजदूरी सीधे महिला के बैंक या डाकघर खाते में भेजी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और महिलाओं को अपनी मेहनत की पूरी कमाई समय पर मिलेगी। शिकायत निवारण व्यवस्था में महिलाओं की शिकायतों का समय बाद समाधान सुनिश्चित होगा।

महिला प्रधान परिवारों को भी प्राथमिकता

ग्राम पंचायत को यह भी जिम्मेदारी सौंप गई है कि वह अपने क्षेत्र में रहने वाली ऐसी महिलाओं की पहचान करें जो अकेली हैं या जिनके पास आय का कोई स्थाई समाधान नहीं है। उन्हें विशेष रोजगार गारंटी कार्ड उपलब्ध कारण महिला प्रधान परिवारों को भी प्राथमिकता दी गई है। ऐसे परिवारों को उन कार्यों में आगे रखा जाएगा जिनके भविष्य में आए के स्थाई साधन बन सके। खेत, तालाब, सिंचाई संरचनाओं, भूमि सुधार, आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम न केवल तत्काल मजदूरी देंगे बल्कि लंबे समय तक लाभ पहुंचाने वाली संपत्तियों भी तैयार करेंगे। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।