
समय का अंत हो जाएगा पर आप अनंत रहेंगे Publish Date : 23/12/2025
समय का अंत हो जाएगा पर आप अनंत रहेंगे
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
किसी विषय या विचार को पूरी तरह समझने की इच्छा के साथ गहराई से मनन करना ही ध्यान है। जिस वस्तु पर आप ध्यान लगाएंगे, उसे आप न केवल समझेंगे, बल्कि धीरे-धीरे उसके साथ तादात्म्य स्थापित करते हुए अंततः उसी के अनुरूप बनते चले जाएंगे। इसलिए, यदि आपका चिंतन तुच्छ या अपवित्र विषयों पर अटका रहेगा, तो एक समय बाद आप खुद उस तुच्छता या पाप के स्वरूप में ढल जाएंगे। परंतु यदि आपका मन निरंतर किसी महान और पवित्र विषय का ध्यान करेगा, तो औप भी निस्संदेह महान और पुण्यात्मा बन उठेंगे। मनुष्य वही बनता है, जिसके बारे में वह सबसे ज्यादा सोचता है। अतः अपने विचारों को सदैव ऊंचे आदशों से जोड़कर रखिए, ताकि आपका हर चिंतन आपको उत्थान की दिशा में ले जाए।
चिंतन का विषय जितना पवित्र होगा, आपका हृदय भी उतना ही पवित्र होता जाएगी और आप स्वतः सत्य के अत्यंत निकट खिंचते चले जाएंगे। ईश्वर-उपासना का सार भी यही है-अपने मन को पवित्र सत्य पर केंद्रित करना। ध्यान शांति का वह मार्ग है, जो आत्मा को नित्य सत्य की ओर ले जाता है। वह प्रार्थना, जिसमें ध्यान का तत्व न हो और केवल याचना भरी हो, वह आत्मा-विहीन शरीर की तरह होती है। यदि आपकी प्रार्थनाएं पूरी नहीं हो रहीं, तो इसका अर्थ है कि. आपकी प्रार्थना एक दिशा में हैं और आपके विचार व कर्म दूसरी दिशा में। इसलिए, ईश्वर से वह न मांगिए, जिसके आप अधिकारी नहीं हैं और उन बातों से मन हटाइए, जो आपको सत्यं से दूर करती हों।

सत्य के मार्ग पर सोचना और चलना शुरू कीजिए। जब आप ऐसा करेंगे, तो सत्य आपके जीवन में दिन-प्रतिदिन उतरता जाएगा और अंततः एक दिन आप उसी सत्य के स्वरूप में एकरूप हो जाएंगे। शुरू में ही चिंतन और चिंता का अंतर समझ लें। चिंता व्यर्थ है, पर चिंतन ज्ञान का मार्ग है। चिंतन में वह जिज्ञासा है, जो सरल और शुद्ध सत्य को प्राप्त कराती है। जब आप अपने स्वार्थ को भूलकर सत्य की खोज में आगे बढ़ते हैं, तो तो आपकी पुरानी भूलें एक-एक करके छूटने लगती हैं, और आप संतोषपूर्वक सत्य की प्राप्ति की प्रतीक्षा करते हैं। अपने हृदय को उदार बनाइएं, उसमें प्रेम का प्रवेश होने दीजिए। जैसे भीर की किरणों को ग्रहण करने के लिए फूल अपनी पंखुड़ियां खोलते हैं, वैसे ही अपनी आत्मा को सत्य के प्रकाश के लिए खुला रखिए। विश्वास रखिए कि निष्कलंक और पवित्र जीवन भी संभव है।
विश्वास रखिए कि सर्वोच्च सत्य की अनुभूत्ति संभव है। जिसका विश्वास दृढ़ है, वह जिंदगी में सर्वोच्च शिखर पर चढ़ता है और अविश्वासी इन्सान कुहरे से आच्छादित घाटियों में भटका करता है। दृढ़ विश्वास होने पर समय का अंत भले ही हो जाएगा, पर आप अनंत रहेंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
