
वंदे मातरम के पूरे हुए 150 वर्ष Publish Date : 12/12/2025
वंदे मातरम के पूरे हुए 150 वर्ष
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
वंदे मातरम के 150 वर्ष होने पर संसद से लेकर मीडिया की दुनिया में इसकी बहुत चर्चा की जा रही है-
कांग्रेस की एक नेता ने कहा है कि वन्देमातरम तो सभी भारतीयों के दिलों में है, लेकिन असलियत में इसकी वास्तविकता क्या है? क्या स्वयं उनके या उनके जैसे लोगों के दिलों में भी वन्देमातरम मातृभूमि के लिए हिलोरें मारता हुआ दिखाई दे रहा है? अपने देश में अनेक शहरों में नगर निगम/नगर पालिकाओं में वंदे मातरम को गाने का विरोध होना बहुत ही सामान्य घटना है। वन्दे मातरम का नारा लगाने और सुनने में न जाने कितने राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को आज भी बहुत परेशान करता है, यहां तक कि वह उसे बंद भी करवा देते हैं। तुष्टिकरण का प्रयास आज से नहीं बल्कि आजादी की लड़ाई के समय जब कांग्रेस के अधिवेशन में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया, जिसका कांग्रेस ने केवल इसलिए इसका विरोध नहीं किया, तांकि मुसलमान नाराज न हो जाएं।

यहीं से वन्देमातरम के प्रति दो धाराएं बननी शुरू हो गईं एक जिन्हें वंदे मातरम भारतमाता के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने की प्रेरणा देने वाला बना और दूसरा जिन्हें उनकी की सांप्रदायिक भावना को चोट पहुंचाने वाला बना। यह दोनों धाराएं आज तक चली आ रही हैं और यह आगे कब तक चलेंगी इसका भी कोई पता नहीं है?

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
