हिंदुत्व अमृत है और जातिवाद एक जहर      Publish Date : 09/12/2025

                   हिंदुत्व अमृत है और जातिवाद एक जहर

                                                                                                                                                                              प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

अपने देश में कहीं जातिवाद की चर्चा हो या न हो लेकिन प्रत्येक घटना को जाति के चश्मे से देखने और दिखाने का प्रयास सदैव ही चलता रहता है। यह बात सही है कि सभी जातियों के लोगों का विकास होना चाहिए। इसलिए जो जातियां किसी भी रूप में किन्हीं कारणों से पिछड़ गई हैं उन्हें अधिक अवसर की वकालत की जानी चाहिए। लेकिन यही जातियों के बीच एक प्रकार से दूरी का कारण भी बनता है।

प्रत्येक जाति का अपना एक इतिहास है, उस इतिहास में अनेक बातें गर्व करने की हैं। अपनी जाति पर गर्व करते-करते कब दूसरी जाति का अपमान प्रारंभ हो जाता है, इसका तो  पता ही नहीं चल पाता है। विभिन्न जातियों के नाम से चलने वाले संगठनों के मंचों से होने वाले भाषण इसका स्पष्ट प्रमाण हैं।

                                                         

जातीय संगठन चलाने वाले लोग शायद मन से बुरे नहीं होते, लेकिन जाति का अभिमान उन्हें जातिवाद के आगोश में धकेल देता है। धीरे-धीरे ऐसी मानसिकता बन जाती है कि बहुत सामान्य घटनाओं में भी उसे अपनी जाति के लिए पक्ष या विपक्ष दिखाई देने लगता है। ध्यान में रखने की बात यह है कि यदि जातियों के बीच परस्पर दूरियां रहेगी तो विकास के बाद भी संघर्ष के कारण किसी को सुख नहीं मिल सकेगा।

अतः सभी जातियों के बीच एक एकात्म भाव विकसित करना आवश्यक होगा और उस एकात्मता का नाम ही हिंदू है। राजनेता चाहे किसी भी दल का हो उसे अपनी जाति के लोग अपने वोट बैंक के रूप में दिखाई देते हैं। हालांकि पिछले दशक में जनता ने नेताओं का यह भ्रम काफी हद तक समाप्त किया है। जातियों को समाप्त करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जातियों की चर्चा अपने जीवन में न्यूनतम करने की आवश्यकता है। हमारी एक पहचान हमारी जाति भी है अतः इसे समाप्त करना असंभव है। लेकिन इसके अतिरिक्त हमारी एक और पहचान है कि हम हिंदू है, ऋषियों के वंशज है।

अतः जैसे जैसे हिंदू नाम की पहचान बढ़ती जाएगी जाति की पहचान स्वतः ही गौण होती चली जाएगी। ऐसे में यह स्पष्ट है कि जातिवाद के इस जहर को हिंदू ब्रांड का अमृत ही नियंत्रित कर सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।