
शत्रु बोध आवश्यक Publish Date : 19/11/2025
शत्रु बोध आवश्यक
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
पूरे देश को जिस प्रकार से बम विस्फोटों से दहलाने की साजिश रची गई थी, उसका पर्दाफाश तो हो गया लेकिन फिर भी दिल्ली में अपने समाज को एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। जो लोग इस षडयंत्र में संलिप्त पाए गए हैं उन सभी के जीवन की शिक्षाएं एक ही है। आधुनिक शिक्षा से युक्त, इन घटनाओं से पहले हमारे बीच में ही घूमा करते थे।
कौन कितना आधुनिक है इसका अंदाजा इस बात से नहीं लगाया जा सकता कि वह कितना शिक्षित है बल्कि इसके लिए यह देखना होगा कि उसने अपने जीवन का लक्ष्य क्या बनाया है।
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है परंतु सत्य है की अपने देश में एक विशेष वर्ग को उसके जीवन का लक्ष्य तय करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्या हमें ऐसे सभी लोगों को संदेह की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए? संदेह सतर्कता की पहली सीढ़ी है क्योंकि जिस पर हम संदेह करते हैं उसी से सावधान भी रहते हैं और उसी के आक्रमणों के उत्तर के लिए हम स्वयं को तैयार भी करते हैं।
हमारे आसपास ऐसे कौन हो सकते हैं उनको जानना उनको समझना यही एक प्रकार से शत्रु बोध है। जो लोग इस घटना में पकड़े गए हैं वह वास्तव में केवल हिंदू के शत्रु नहीं है वह भारत के शत्रु नहीं है यह संपूर्ण मानव जगत के शत्रु है। अतः ऐसे लोगों के साथ शत्रुता का भाव रखना और शत्रुवत व्यवहार करना यह एक मनुष्य का ही काम है।
जो कुछ लोग पकड़े गए वह केवल उतने नहीं है उनकी संख्या तो लाखों करोड़ों में हो सकती है। कुछ ने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया होगा कुछ बना रहे होंगे और कुछ बनाएंगे, अतः ऐसे लोगों को चिन्हित करना और उन पर नजर रखना और यथासंभव उन्हें कमजोर करना यह हमारे लिए एक विकल्प नहीं है बल्कि यह हमारी नितांत आवश्यकता है।

जिन लोगों ने मेडिकल कॉलेज में इन्हें पढ़ाकर डॉक्टर बनाया होगा उन्होंने शायद यह सोचा होगा कि उनका यह विद्यार्थी बड़े होकर डॉक्टर बनकर मनुष्य के कष्ट दूर करेंगे, लेकिन जब यह ऐसा कर रहे थे तब शायद उन्होंने यह ध्यान नहीं दिया होगा कि उनका जो विद्यार्थी है उसकी तो ट्रेनिंग कहीं और से भी चल रही है। अभी समय है कि हम अपने शत्रुओं को पहचाने, ऐसे लोग जहां रहते हैं। सामान्य समाज उस क्षेत्र में जाना पसंद भी नहीं करता, लेकिन यह तो उनके लिए और सुविधा उत्पन्न करना होता है।
वह जैसा चाहे अपने बच्चों को सिखाते हैं, और हम केवल उनका घर चलाने में उनकी आर्थिक सहायता ही नहीं कर रहे हैं बल्कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में भी हम सहायक हो रहे हैं, क्योंकि हम अपनी थोड़ी सुविधा चाहते हैं। सीमा पार से होने वाले आक्रमण को तो हमारी सेना देख लेगी, लेकिन जो शत्रु अंदर घूम रहा है उसका क्या? आइए अपने शत्रुओं को चिन्हित करें और जहां-जहां हो सकता है उन्हें दंडित करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
