
आध्यात्म क्या है और क्यों है जरूरी Publish Date : 18/11/2025
आध्यात्म क्या है और क्यों है जरूरी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
सामान्यतः अध्यात्म को पूजा-पाठ, मंदिर और प्रसाद इत्यादि से जोड़कर दिखाने का प्रयास किया जाता है। यह सब वह बातें हैं जो आध्यात्मिकता में सहायक तो हो सकती हैं, लेकिन यही अध्यात्म है यह कहना उचित नहीं होगा। वास्तव में मैं कौन हूं? मेरे आस-पास जो घटित हो रहा है वह क्यों घटित हो रहा है, इस संसार में मेरे आने का क्या औचित्य है और सांसारिक जीवन में मेरी क्या भूमिका है के जैसी अनेक बातों का चिंतन या कहें इन प्रश्नों का उत्तर ढूंढना ही वास्तव में आध्यात्मिकता कहलाती है।
वास्तव में देखा जाए तो अध्यात्म एक प्रकार का विज्ञान ही है, क्योंकि विज्ञान भी तो कुछ जान लेने की जिज्ञासा से उत्पन्न होता है। भौतिक जीवन की बातें जानने की जिज्ञासा ही विज्ञान कहलाती है। ऐसे ही वही जो हमको सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देती उसे जान लेने की जिज्ञासा ही अध्यात्म है। संसार में वह कौन सा मनुष्य है जो इस आध्यात्म से स्वयं को मुक्त कर सकता हो या इसे नकार सकता हो?

हर आने वाले सेकंड में क्या घटित होने वाला है या जो घटित हो रहा है वह क्यों हो रहा है यह अपने आप में एक गूढ़ प्रश्न है। इन्हीं प्रश्नों का उत्तर ढूंढने के प्रयास को आध्यात्मिकता का नाम दे दिया जाता है। कोई इन प्रश्नों का उत्तर ना ढूंढे या इन बातों पर विश्वास ना करें तो क्या इससे यह प्रश्न समाप्त हो जाते हैं। ऐसा बिलकुल भी नहीं, यह प्रश्न तो ऐसे ही बने रहेंगे।
यह मनुष्य पर निर्भर करता है क्यों अपने जीवन में केवल इसी शरीर को ही पूरा जीवन मानकर इसी के भोग के साधन जुटाता रहेगा या फिर इसी शरीर जैसा महत्वपूर्ण कोई तत्व जो इस शरीर को जीवंत बनाता है उसके के बारे में भी विचार करेगा। यदि यह शरीर ही जन्म का कारण और जन्म का उद्देश्य होता तो मृत्यु के पश्चात भी शरीर के साथ दुराव नहीं होता बल्कि आत्मीयता ही झलकती रहती। लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है क्योंकि मृत्यु के तुरंत पश्चात सामान्य रूप से चर्चा चलने लगती है कि फला व्यक्ति इस संसार से चला गया। शरीर तो वैसा ही है जो कि अभी भी यहीं रखा है, तो फिर इस शरीर के अंदर जो व्यक्ति था वह कहां चला गया और वह कहां से आया था?

ऐसे सभी प्रश्नों का उत्तर जान लेना ही अध्यात्म कहलाता है। ऐसा भी नहीं है बल्कि इन प्रश्नों का चिंतन मन में चलते रहने से यह शरीर जीवन भर ऐसा व्यवहार करता है जो किसी को कष्ट नहीं देता, या हम कहें लोक कल्याण में लगा रहता है। आध्यात्म की कितनी बड़ी शक्ति है की केवल प्रश्नों का विचार करते रहने से जीवन की दिशा सही बनी रहती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
