संबंधों की प्रगाढ़ता में आनंद      Publish Date : 07/11/2025

                                         संबंधों की प्रगाढ़ता में आनंद

                                                                                                                                                                                      प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

मानव जीवन के सभी आयामों में संबंधों को बचाने का प्रयास करने वाले दीपावली के पंच महापर्व इस वर्ष संपन्न हुए और हर बार की तरह मनुष्य को मनुष्य बनाने के मार्ग पर चलने को प्रेरित कर गए। अपने परिवार, समाज और प्रकृति के साथ कृतज्ञता पूर्वक व्यवहार इन पर्वों का आधार है। अपने से जुड़े सभी प्रकार के लोगों को संपर्क कर उन्हें शुभेक्षा प्रेषित करना केवल सामान्य व्यवहार नहीं है बल्कि उन सबके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना होता है कि आपके कारण मेरा जीवन सुख और समृद्धि से युक्त है।

राम राज्य आने का शुभ संकेत यही है कि जब मनुष्य यह स्वीकार करने लगे कि मेरे पास जो कुछ भी है वह सब राम का ही है। यह केवल विचार ही नहीं बल्कि दीपावली में हर मनुष्य इस प्रकार का व्यवहार भी करता दिखाई देता है जब वह अपने संबंधियों से मिलने जाते समय उनकी पसंद की भेंट ले जाना चाहता है और यह व्यवहार संपूर्ण समाज की आर्थिक समृद्धि का आधार बनती है।

क्या धनी क्या निर्धन सबके घरों में लक्ष्मी की उपस्थिति की अनुभूति हो रही होती है, लोगों का आना जाना और मिलना व्यक्तियों की संपन्नता का पैमाना बनता दिखाई देता है क्योंकि अधिक लोगों से मिलने में व्यक्ति को आनंद की अनुभूति हो रही होती है। सैकड़ों व्हाट्सएप संदेश और फोन कॉल की व्यस्तता भी मनुष्य को परेशान नहीं करती है।

                                                                       

इसी समाज में एक ऐसा वर्ग भी बन रहा है जो इन सभी से दूर हो गया है क्योंकि उसने पारिवारिक और सामाजिक दोनों ही संबंधों को कमजोर कर लिए हैं परिणाम यह है कि सकारात्मकता के महापर्वों में भी वह नकारात्मकता और उदासी से घिरा रहता है। जिसे वह धन समझता है वह उसके पास पर्याप्त से भी अधिक है लेकिन जो वास्तविक धन है वह उसके पास बिल्कुल नहीं है, यह दीपोत्सव हमे यह स्मरण करवाता है कि हमारे जीवन में परिवार और समाज कितना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

अतः आज परिवारों को संभालने और स्वयं को सामाजिक बनाने का प्रयास करना होगा इसके लिए संबंधों को कमजोर नहीं बल्कि प्रगाढ़ करना होगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।