आत्ममंथन, अध्ययन और आत्मोन्नति का विशेष दिन (ज्ञान पंचमी)      Publish Date : 25/10/2025

आत्ममंथन, अध्ययन और आत्मोन्नति का विशेष दिन (ज्ञान पंचमी)

                                                                                                                                                                       प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं मुकेश शर्मा

दीपवली के पांचवें दिन अर्थात पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला ज्ञान पंचमी पर्व ज्ञान, विद्या और बौद्विक विकास के लिए समर्पित किया गया गया है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि जीवन में ज्ञान ही सबसे बड़ा प्रकाश है, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है। इस दिन को सौभाग्य पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। जैन धर्म की परम्परा में यह दिन विशेष महत्व रखता है और इस दिन धर्मग्रन्थों, पुस्तकों, लेखन सामग्री और शिक्षण से सम्बन्धित उपकरणों की पूजा की जाती है।

                                                              

माना जाता है कि ज्ञान पंचमी के दिन की गई साधना, अध्ययन और पूजा से व्यक्ति व्यक्ति की बौद्विक क्षमता बढ़ती है तथा जीवन में सफलता प्राप्त करने के नए मार्ग खुलते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्ञान और कर्म एक दूसरे के साथ गहराई से जुड़े हुए होते हैं। ज्ञान के माध्यम से ही व्यक्ति अपने कर्मों का विवेकपूर्ण चयन करने में सफल हो पाता है और अपने कर्मों को शुद्व भी कर सकता है। बिना ज्ञान के किए गए कर्म को अधूरा ही माना जाता है।

सच्चा ज्ञान वही है जो व्यक्ति के अच्छे कर्मों में दिखाई देता है, इसलिए यह दिन आत्ममंथन, अध्ययन और आत्मोन्नति का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर लोग पुस्तक पूजन, स्वध्याय और दान जैसे कार्य करते हैं और यह संकल्प लेते हैं कि वह ज्ञान के प्रकाश से स्वयं एवं समाज दोनों का कल्याण करेंगे। इस प्रकार से ज्ञान पंचमी आत्मज्ञान, सत्य और सद्कर्म की दिशा में प्रेरणा प्रदान करने वाला पर्व है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।