कृषि विवि मेरठ में “एग्रीविजन मेरठ-2026” का भव्य उद्घाटन      Publish Date : 25/04/2026

कृषि विवि मेरठ में “एग्रीविजन मेरठ-2026” का भव्य उद्घाटन

आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मेरठ महानगर, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि की गरिमामयी उपस्थिति में “एग्रीविजन मेरठ-2026” का भव्य उद्घाटन किया गया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एग्री विज़न आयाम द्वारा आयोजित दो दिवसीय “एग्रीविजन मेरठ-2026 राज्य स्तरीय सम्मेलन” का भव्य उद्घाटन आज दिनांक 25 अप्रैल 2026 को वीसीसी ऑडिटोरियम, कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज़, एसवीपीयूएएंडटी, मेरठ में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 25 एवं 26 अप्रैल 2026 तक विभिन्न विषयगत सत्रों के साथ आयोजित किया जाएगा।

मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि

                      

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में श्री कपिल देव अग्रवाल जी (राज्य मंत्री, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास, उत्तर प्रदेश) तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री अरुण गोविल जी (माननीय सांसद, मेरठ लोकसभा) उपस्थित रहे।

इसके साथ ही विशिष्ट उपस्थिति में डॉ. त्रिवेणी दत्त जी (माननीय कुलपति, एसवीपीयूएंडटी), डॉ. प्रभात कुमार जी (उद्यान आयुक्त, भारत सरकार), डॉ. सुधाकर पांडेय जी (एडीजी, आईसीएआर, नई दिल्ली), डॉ. परमेंद्र सिंह जी (डीडीजी, उपकार), श्री गौरव गौर जी (प्रदेश सचिव, एबीवीपी), श्री अमन सिंह जी (राष्ट्रीय सह-संयोजक, एग्रीविजन), डॉ. बिजेंद्र सिंह जी (आयोजन सचिव) एवं डॉ. चित्रा सिंह जी (संयुक्त आयोजन सचिव) आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में एबीवीपी के प्रांत संगठन मंत्री श्री तरुण सिंह जी, प्रांत संगठन मंत्री श्री अनुज श्रीवास्तव जी एवं एग्री विज़न के राष्ट्रीय प्रमुख श्री विक्रम जी की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

उद्घाटन सत्र की मुख्य झलकियाँ

                          

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। उद्घाटन सत्र में विभिन्न वक्ताओं ने कृषि के बदलते परिदृश्य, नवाचार, तकनीकी विकास एवं युवाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

विशेष अतिथियों ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि भारत की कृषि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ही सशक्त बन सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी उन्नयन और शोध आधारित दृष्टिकोण अपनाकर ही “विकसित उत्तर प्रदेश 2047” के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

सम्मेलन का विषय एवं उसकी प्रासंगिकता

इस सम्मेलन का मुख्य विषय “विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लिए परंपरागत एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों का समन्वय”है। वर्तमान समय में यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन, भूमि की उर्वरता में कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियों का समाधान केवल आधुनिक तकनीकों से नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान के समुचित उपयोग से ही संभव है।

परंपरागत कृषि पद्धतियाँ—जैसे जैविक खेती, मिश्रित फसल प्रणाली, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण—आज भी टिकाऊ कृषि का आधार हैं। वहीं आधुनिक तकनीक—जैसे ड्रोन, सटीक कृषि (Precision Farming), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डिजिटल कृषि—उत्पादन बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहायक हैं। इन दोनों का समन्वय ही भविष्य की कृषि का मार्ग प्रशस्त करता है।

सम्मेलन का कृषि विद्यार्थियों के लिए महत्व

यह सम्मेलन कृषि के विद्यार्थियों के लिए एक सशक्त ज्ञान मंच के रूप में उभर रहा है। इसमें—

  • विद्यार्थियों को पारंपरिक एवं आधुनिक कृषि के समन्वित मॉडल की समझ विकसित हो रही है।
  • नई तकनीकों, अनुसंधान एवं नवाचार से परिचित होने का अवसर मिल रहा है।
  • कृषि आधारित स्टार्टअप, उद्यमिता एवं स्वरोजगार के नए आयामों की जानकारी प्राप्त हो रही है।
  • विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

इस प्रकार यह सम्मेलन विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक एवं भविष्य उन्मुख दृष्टिकोण भी प्रदान कर रहा है, जिससे वे “विकसित उत्तर प्रदेश 2047” के लक्ष्य में सक्रिय योगदान दे सकें।

सम्मेलन के आगामी सत्र

सम्मेलन के आगामी सत्रों में विभिन्न विषयों पर तकनीकी व्याख्यान, पैनल चर्चा एवं कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें कृषि के विविध पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे।

उद्घाटन सत्र में 500 से अधिक विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम का वातावरण उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायक रहा।