
कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का समापन Publish Date : 22/03/2026
कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का समापन
उचित फसल चक्र के माध्यम से फसल स्वास्थ्य और एग्रोकेमिकल उद्योग के उभरते व्यावसायिक अवसरों विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न
कृषि क्षेत्र में है रोजगार की अपार संभावनाएं -डॉक्टर त्रिवेणी दत्त (कुलपति)

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में धानुका एग्रो केमिकल्स लिमिटेड गुड़गांव के सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन पशु चिकित्सा महाविद्यालय कॉलेज के नैदानिक सभागार में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 त्रिवेणी दत्त एवं धानुका ग्रुप के रिसर्च एंड डेवलपमेंट वाइस प्रेसीडेंट डॉ0 विनीत सिंह एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट हेड डॉ0 सुशील कुमार ने दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ0 त्रिवेणी दत्त ने संबोधित करते हुए कहा से कृषि क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं, क्योंकि कृषि क्षेत्र ऐसा है जिसमें सभी की जरूरत की पूर्ति हो सकती है और अधिकतर उद्योगों को कच्चा माल कृषि के माध्यम से ही मिल पाता है। इस अवसर पर उन्होंने कहा हम सबके लिए यह गर्व की बात है कि हमारा अनाज उत्पादन जो स्वतंत्रता के समय मात्र 55 मिलियन टन था वह आज 330 मिलियन टन के पार पहुंच चुका है। इसी तरह बागवानी में उत्पादन 355 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि स्वतंत्रता के समय यह केवल 25 मिलियन टन ही था। इसके अलावा डेयरी, मत्स्य पालन, कुकुक्ट पालन और मधुमक्खी पालन जैसे अन्य क्षेत्रों में भी काफी प्रगति की है। हमें गर्व है कि हम कृषि उत्पादों के मामले में चीन के बाद दूसरे सबसे बड़े उत्पादक हैं। हालांकि प्रति हेक्टेयर कृषि जीडीपी की बात करें तो हम अब भी विकसित देशों से काफी पीछे हैं।
ऐसे में अगर हम अपनी कृषि जीडीपी की तुलना चीन से करें तो यह दिखाता है कि ग्लोबल फूड हब बनने की दिशा में हमारे देश में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि हमें किसानों के पास अधिकतर नवीन तकनीकों को जल्द से जल्द पहुंचना होगा, जिससे वह उस तकनीक को अपना कर अपना प्रति एकड़ उत्पादन और अधिक बढ़ा सके।

धनुका एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड गुड़गांव के वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ0 विनीत सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि हमें नई-नई तकनीक का किसानों के प्रक्षेत्र पर उपयोग करना चाहिए, जिससे वह कम लागत से अधिक उत्पादन ले सके। खेती करने में इस्तेमाल की जाने वाली अच्छी गुणवत्ता वाली चीजों फॉर्म इनपुट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है, जिससे की पैदावार में समानता बनी रहे। डॉ0 विनीत कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि धानुका कंपनी ने कई ऐसे प्रोडक्ट बनाए हैं जिससे किसानो की फसलों को काफी लाभ हुआ है।

निदेशक ट्रेंनिंग प्लेसमेंट डॉ0 आर. एस. सेंगर ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करने से विश्वविद्यालय में छात्रों को कंपनियां के कार्यों और उनके उत्पादों की जानकारी अच्छी तरह से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि अक्सर फसल स्वास्थ्य के बारे में केवल यही हम लोग सोचते हैं कि मिट्टी में क्या डाल रहे हैं, लेकिन वास्तविक स्वास्थ्य मिट्टी के प्रबंधन के तरीके से शुरू होता है। फसल चक्र एक उन्नत जैविक रणनीति है। फसलों को अदल बदल कर लगाने से हम स्वाभाविक रूप से कीटों के चक्र को तोड़ते हैं और मिट्टी की संरचना में सुधार करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें संरक्षण के नैतिक मूल को बनाए रखना चाहिए। हम इस धरती के स्वामी नहीं है बल्कि हम आने वाली पीढियां के लिए इसके संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय के छात्र किस तरह के प्रोग्राम में शामिल होकर कंपनी के उत्पादों उनके कार्यों के बारे में अच्छी तरह से सीख और समझ पाते हैं, यह अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ0 सत्य प्रकाश संयुक्त निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट ने किया। इस अवसर पर एसोसिएट डायरेक्टर डॉ0 शालिनी गुप्ता, डॉ0 संजीव गुप्ता, डॉ0 निमिषा टेहरी, डॉ0 सावन रावत, डॉ0 पीयूष तोमर, ङॉ0 शैलजा कटोच, डॉ0 पंकज चौहान, डॉ0 गोविंद विश्वकर्मा, डॉ0 उत्कर्ष पुंडीर और मनोज सेगर आदि लोगों का सहयोग रहा।

इस अवसर पर धनिक ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट शोध और विकास डॉ0 विनीत सिंह ने बताया की कीट विज्ञान के क्षेत्र में पौधों को सुरक्षित रखने वाले और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचने वाले रासायनिक फॉर्मूलेशन बनाने का कार्य कंपनी ने किया है। साथ ही इनके इस्तेमाल की तकनीकी और उनकी सेल्फ लाइफ को सुधारने की दिशा में भी काफी अच्छा काम किया गया है। ऐसे नए कीटनाशक और जैविक उर्वरक लाए जा रहे हैं, जो बेहद कारगर, एक्टिव अग्रेडिएंट्स होंगे और यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होंगे। कृषि को सतत बनाने के प्रति कंपनी प्रतिबद्धता को दिखाती है। जापानी तकनीकी कंपनियों की विशेषज्ञ की मदद से हमारा सुरक्षा उपायों और कृषि में नए आयाम स्थापित करने का सफर जारी है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में हमें उम्मीद है की नई-नई तकनीक जैसे की दवा का छिड़काव करने वाले ड्रोन, ऑटिर्फिशल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीके जैसे रिमोट सेंसर और वाव कृषि में बड़ा बदलाव लाएंगे। इन उन्नत तकनीक की बदौलत कृषि में क्रांति आ पाएगी। इन तकनीकों के जरिए किसान फसलों की रियल टाइम नेटवर्किंग करके जानकारी पा सकेंगे, जिससे पैदावार बढ़ेगी और उन्हें इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि किसान उत्पादक संगठन, सरकारी समितियां जैसे संगठनों के साथ लेकर निजी कंपनियां की सक्रिय भूमिका से किसानों के लिए एक प्रदेश बाजार और बेहतर अवसर पैदा होंगे, जिससे कृषि क्षेत्र ज्यादा तरक्की कर सकेगा।
डॉ0 विनीत सिंह ने बताया कि कंपनी जैसे-जैसे पौधों की सुरक्षा से जुड़े रसायन और कृषि तकनीक में सुधार की ओर बढ़ रही है। कृषि उत्पाद के डीलरों और किसानों को जागरूक बनाना बेहद जरूरी हो गया है, उन्हें सही जानकारी से लैस करके और नई तकनीक का सही इस्तेमाल करने के बारे में उन्हें बढ़कर हम उन्हें सशक्त बना सकते हैं। इससे हमारे किसान अधिकतम पैदावार हासिल करके अधिकतम मुनाफा कमा पाएंगे। कृषि के इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए छात्रों का मार्गदर्शन भी किया जा रहा है।
धनिक ग्रुप के मनोज कुमार उपाध्याय, अमीश चंद्र, मनु बहादुर, अंशुल वाजपेई और कपिल कुमार आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस कार्यक्रम में लगभग 300 छात्र छात्राओं ने भी भाग लिया।
