कृषि विश्वविद्यालय में मशरूम बीज एवं मशरुम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ      Publish Date : 15/11/2025

कृषि विश्वविद्यालय में मशरूम बीज एवं मशरुम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आज मशरूम बीज एवं मशरुम उत्पादन प्रशिक्षण विषय पर साथ दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉक्टर रामजी सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव प्रोफेसर रामजी सिंह ने बताया की मशरूम की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। साथ ही पोषण की दृष्टि से अच्छा होने के कारण अब इसका उत्पादन उत्पादकता और मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यदि किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ करते हैं तो उनकी आय में अपेक्षित बढ़ोतरी हो सकती है।

                                                              

इस अवसर पर निदेशक ट्रेंनिंग प्लेसमेंट प्रोफेसर आर. एस. सेंगर ने संबोधित करते हुए कहा कृषि से अधिक आय प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि कृषि विविधीकरण की तकनीक को अपनाया जाए और इसमें यदि मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया जाएगा तो कम लागत और कम जमीन पर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। प्रोफेसर सत्य प्रकाश ने संबोधित करते हुए कहा कि मशरूम शरीर की इम्यूनिटी को  बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान देती है और इसकी मार्केटिंग करके एक अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।

मशरूम उत्पादन, प्रशिक्षण के संयोजक एवं ङीन  स्नातकोत्तर शिक्षा प्रोफेसर गोपाल सिंह ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय समन्वित मशरूम परियोजना जो कि मशरूम शोध निदेशालय सोलन के सहयोग से कृषि विश्वविद्यालय में चलाई जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

                                                        

प्रशिक्षण कार्यक्रम में रोजाना लेक्चर के अलावा प्रयोगात्मक कार्य भी किए जाएंगे जिससे प्रशिक्षण में भाग देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मशरूम उत्पादन एवं मशरुम बीज उत्पादन के कार्य को करने में निपुण हो सके। इस सात दिवसीय प्रशिक्षण में 32 लोग हिस्सा ले रहे हैं जो की विभिन्न जनपदों से आए हुए हैं।

                                                              

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हॉर्टिकल्चर महाविद्यालय के डॉक्टर सुनील कुमार, प्रोफेसर सत्य प्रकाश और कार्यक्रम के समन्वयक एवं प्राध्यापक गोपाल सिंह तथा उनके विभाग की टीम के द्वारा विशेष सहयोग दिया गया।