गन्ने की अगेती खेती के लिए नई किस्म सीओ-20016      Publish Date : 02/10/2026

गन्ने की अगेती खेती के लिए नई किस्म सीओ-20016

                                                                                                     प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य

गन्ने की नई अगेती सीओ-20016 किस्म तैयार, फरवरी तक बीज उपलब्ध होगा, प्रति हेक्टेयर 97.27 टन उत्पादन का दावा किया जा रहा है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र करनाल के वैज्ञानिकों ने उत्तर-पश्चिमी भारत के गन्ना किसानों के लिए नई अगेती किस्म सीओ-20016 (करण 20) तैयार की है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह किस्म फरवरी तक रिलीज की जा सकती है। रिलीज के बाद ही किसानों इस किस्म की खेती के लिए इसका बीज उपलब्ध कराया जा सकेगा।

वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए परीक्षणों में इस किस्म की औसत उपज क्षमता 97.27 टन प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई है। इसके अलावा गन्ने की इस किस्म में वाणिज्यिक शर्करा की मात्रा 18.74 प्रतिशत तक पाई गई है। गन्ने की नई किस्म सीओ-20016 को हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

यह किस्म वर्तमान में प्रचलित अगेती किस्म सीओ 0238 की तुलना में पैदावार और चीनी उत्पादन में भी अधिक बेहतर है। इस किस्म की एक खासियत इसके रोग-कीट प्रतिरोध और सूखा सहन करने की क्षमता में भी है। परीक्षणों में इसे इंटरनोड बोरर, शूट बोरर, टॉप बोरर और स्टॉक बोरर के प्रति सबसे कम संवेदनशील पाया गया। वहीं रूट बोरर के प्रति इसे एलएस से एचआर श्रेणी में रखा गया है। यह किस्म लाल सड़न रोग के लिए भी प्रतिरोधी है। लवणीय भूमि में भी इस किस्म को काफी उपयोगी बताया गया है। मिलें ट्रायल के लिए कर सकते हैं संपर्क-

गन्ने की नई विकसित किस्म

गन्ना प्रजनन संस्थान करनाल के क्षेत्रीय केंद्र प्रभारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि चीनी मिलें मटीरियल ट्रांसफर एग्रीमेंट के माध्यम से नई किस्म के लाइसेंसी ट्रायल के लिए संस्थान से संपर्क कर सकती हैं।

10 महीने में तैयार, जनवरी में पकती है

गन्ने की इस नई किस्म सीओ 20016 को पकने में करीब 10 महीने लगते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस किस्म की परिपक्वता जनवरी के महीने में आ जाती है। इस वजह से इसे अगेती गन्ने की किस्म के रूप में विकसित किया गया है। इसका परीक्षण उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है।

सूखे में बेहतर पैदावार देने की क्षमता है

परीक्षणों में गन्ने की लंबाई, मोटाई, वजन और उपज के साथ प्रकाश-संश्लेषण, क्लोरोफिल सामग्री और जड़ की मात्रा जैसे शारीरिक मानकों में भी सीओ 0238 की तुलना में काफी बेहतर है। यह किस्म सूखे की स्थिति में भी अधिक गन्ना उपज और बेहतर शारीरिक प्रक्रियाएं बनाए रखने में सक्षम पाई गई है। साथ ही लवणीय भूमि के लिए भी इस किस्म को उपयोगी बताया जा रहा है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।