
गन्ने की नई किस्म बढायेगी किसानो के खेतों में पैदावार Publish Date : 12/01/2026
गन्ने की नई किस्म बढायेगी किसानो के खेतों में पैदावार
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
देश के गन्ना किसानों के लिए अब लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान ने गन्ने की एक नई प्रजाति कोलक 16202 विकसित की है। गन्ने की यह किस्म लाल सडन रोग के खतरनाक रूप सीफ 08 और सीफ 13 के लिए पूरी तरह प्रतिरोधी पाई गई है। पैदावार के मामले में भी नई किस्म गन्ने की प्रचलित किस्म 0238 से बेहतर है।

यह शीघ्र पकने वाली किस्म है और 8 से 10 महीने में तैयार हो जाती है। इसे एलजी 95053 और कोलख 94184 के क्रॉस से तैयार किया गया है। गन्ने की इस किस्म को इक्षु 16 के नाम से भी जाना जाता है। गन्ने की कोलक 16202 किस्म में शर्करा की मात्रा 18% से अधिक है। गन्ने की इस किस्म का औसत उत्पादन 95.22 टन प्रति हेक्टेयर है।
इस किस्म की पेड़ी फसल और कुल वजन अधिक होने से प्रति एकड़ चीनी उत्पादन भी 11.14 टन तक पहुंचता है। इसके साथ ही यह किस्म कीट और रोग प्रतिरोधी होने के कारण इसकी खेती की लागत कम आती है और मुनाफा अधिक प्राप्त होता है। अब किसान इस प्रजाति की बुवाई करके 238 प्रजाति अभी तक जो किसानों के बीच पॉपुलर थी उसकी जगह इस प्रजाति की बुवाई करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं, क्योंकि विगत तीन-चार वर्षो से किसान गन्ने में लाल सडन रोग के प्रकोप से परेशान थे और उनकी पूरी की पूरी खेत की फसल बर्बाद हो जा रही थी।

इसके कारण कई किसान गन्ने की खेती छोड़कर कृषि विविधीकरण की तरफ जाना चाह रहे थे, अब किसानों को चाहिए कि वह इस नई प्रजाति के साथ सहफसली खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। सहफसली खेती में किसान गन्ने के साथ-साथ मटर, मेथी, आलू, धनिया, चुकंदर, सरसों और मूली आदि की खेती भी कर सकते है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
