मध्यप्रदेश के किसानों को विदेशों में आधुनिक खेती का प्रशिक्षण      Publish Date : 07/01/2026

मध्यप्रदेश के किसानों को विदेशों में आधुनिक खेती का प्रशिक्षण

  • आधुनिकतम तकनीक के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर सरकार का फोकस-

मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को “कृषि वर्ष” के रूप में मनाने जा रही है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें प्रदेश के कृषि विकास से जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में विविध जलवायु क्षेत्र, पर्याप्त सिंचाई सुविधाएं और मजबूत सड़क नेटवर्क उपलब्ध है। इन सभी संसाधनों का बेहतर उपयोग कर किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए लक्ष्य आधारित गतिविधियां संचालित की जाएंगी, ताकि “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को साकार किया जा सके।

तीन साल के लक्ष्य को ध्यान में रखकर शुरू की जाएंगी योजनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष 2026 के तहत शुरू की जाने वाली सभी योजनाएं और गतिविधियां तीन वर्षों के लक्ष्य को ध्यान में रखकर संचालित की जाएंगी। किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, किसानों के क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, उद्यानिकी विस्तार और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।

किसानों को कराई जाएगी अन्य राज्यों और देशों की यात्रा

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि किसानों को कृषि क्षेत्र में अन्य राज्यों में हो रहे सफल नवाचारों की जानकारी दी जाए। इसके साथ ही किसानों को कृषि में अग्रणी राज्यों के साथ-साथ इजराइल और ब्राजील जैसे देशों की यात्रा कराई जाएगी, जहां आधुनिक तकनीक, जल प्रबंधन और उन्नत खेती के सफल मॉडल अपनाए जा रहे हैं। इन भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें अपनी खेती में नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसान कल्याण, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय 2ऊर्जा, मत्स्य विकास और सिंचाई विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

फूलों की खेती को मिलेगा बढ़ावा

                                                

बैठक में फूलों की खेती को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में आयोजित होने वाले गुलाब महोत्सव को अब पुष्प महोत्सव के रूप में विकसित किया जाए, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पादित होने वाले अन्य फूलों को भी शामिल किया जाए। सभी जिलों में फूलों की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही बताया गया कि वर्ष 2028 में प्रस्तावित “इंटरनेशनल रोज कॉम्पिटीशन” भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

इसके अलावा सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले के 100 एकड़ क्षेत्र में विशेष रूप से फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पराली निष्पादन, एफपीओ को दुग्ध उत्पादन से जोड़ने और सहकारिता आधारित कृषि स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की भी आवश्यकता बताई।

जनवरी से नवंबर 2026 तक होंगे कई बड़े कृषि कार्यक्रम

कृषि वर्ष 2026 के तहत पूरे साल राज्य भर में विभिन्न कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साल 2026 में किस महीने में कौन से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, उसका विवरण इस प्रकार से है:

जनवरी 2026 में नर्मदापुरम में कृषि आधारित कौशल विकास और कस्टम हायरिंग केंद्रों का राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन, मंदसौर में सोयाबीन भावांतर भुगतान समापन कार्यक्रम और भोपाल में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा।

फरवरी 2026 में डिंडौरी, उमरिया और मंडला में मिलेट मेला, निमाड़-मालवा क्षेत्र में एग्रीस्टेक एवं डिजिटल कृषि प्रदर्शनी, उज्जैन में गुलाब महोत्सव और भोपाल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग समागम का आयोजन किया जाएगा। मार्च 2026 में भोपाल में प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, ग्वालियर में दुग्ध उत्पादक सम्मेलन और इंदौर में पशुपालन कार्यक्रम होंगे।

अप्रैल से नवंबर 2026 तक जबलपुर, सिवनी, इंदौर, उज्जैन, सागर, ग्वालियर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में आम महोत्सव, सोया महोत्सव, गन्ना महोत्सव, सब्जी महोत्सव, एफपीओ सम्मेलन, कृषि मेला और सहकारिता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। उन्नत पशुपालन के लिए पशुपालकों और शासकीय प्रतिनिधियों का ब्राजील भ्रमण भी प्रस्तावित है।

राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ेगी प्रदेश की भागीदारी

बैठक में यह भी बताया गया कि मंडियों के आधुनिकीकरण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा। वर्ष 2025-26 में 2026-27 में 19 और 2027-28 में 42 मंडियों को ई-नाम (E-NAM) मंडियों के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। ई-नाम (E-NAm) के जरिए साफ, ग्रेडेड और पैक्ड उपज को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर बाजार मिलेगा, जिससे किसानों को प्रतिस्पर्धी मूल्य प्राप्त होंगे और उनकी आय में बढ़ोतरी सुनिश्चित की जा सकेगी। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सरकार का कृषि वर्ष 2026 किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, बेहतर बाजार और अंतरराष्ट्रीय अनुभव से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।