
जल्द ही चीनी की एमएसपी बढ़ाने और उन्य राहत उपयों पर विचार मंथन Publish Date : 22/12/2025
जल्द ही चीनी की एमएसपी बढ़ाने और उन्य राहत उपयों पर विचार मंथन
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“खाद्य सचिव ने बताया कि केन्द्र सरकार चीनी के दामों में संशोधन करने जा रही है।“
सरकार की इस रणनीति के सम्बन्ध में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि केन्द्र सरकार जल्द ही चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ ही अन्य राहत उपायों का प्रावधान करने के लिए सक्रिय रूप से विचार कर रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि चीनी उद्योग ने जनवरी के मध्य से गन्ने के बकाया में तेजी के साथ वृद्वि की चेतावनी दी है।
भारतीय चीनी एवं जैव-ईंधन निर्माता संघ (इस्मा) ने कहा कि गन्ने की बकाया धनराशि निरंतर बढ़ती जा रही है जो 30 नवम्बर तक महाराष्ट्र में 2,000 करोड़ रूपये था। चीनी मिलें अतिरिक्त स्टॉक, चीनी उत्पादन की उच्च लागत, इथेनॉल के लिए कम आवंटन, चीनी की घरेलू कीमतों में लगातार गिरावट और वैशिवक स्तर पर अधिक उत्पादन समेत अन्य समस्याओं के कारण नकदी संकट का सामना कर रही हैं।
इस्मा की वार्षिक आम बैठक से अलग बीतचीत में चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने (इस्मा) ने हमें बताया है कि गन्ने के बकाया से सम्बन्धित समस्या जनवरी के मध्य से आरम्भ होगी और हम इस समय सीमा से अच्छी तरह से अवगत हैं एवं इस पर लगातार कार्य भी कर रहे हैं। अगले महीने में, हम कुछ ऐसे निर्णय लेंगे, जो कि उद्योग की मदद करेंगे और किसानों के लिए समय से भुगतान होने की दशा को भी सुनिश्चित करेंगे।

सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें एमएसपी में संशोधन, मौजूदा 15 लाख टन से अधिक निर्यात की अनुमति प्रदान करना और इथेनॉल के लिए अधिक आवंटन आदि के जैसे उपायों को शामिल किया गया है। फरवरी, 2019 से चीनी का एमएसपी 31 रूपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर ही अपरिवर्तित है।
इस्मा के द्वारा इस मूल्य को बढ़ाकर 41.66 रूपय प्रति किलोग्राम करने की माँग की गई है। खाद्य सचिव चोपड़ा ने स्वीकार किया कि इस वर्ष अतिरक्ति चीनी एक चुनौति है। उन्होंने कहा कि हम इसभी स्थितियों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं और उम्मीद है कि हम कुछ ऐसे समाधान लेकर आएंगे, जो कि चीनी उद्योग के सभी अंशधारकों को उनका हक प्रदान कर सकेंगे।
इथेनॉल आवंटन में कमी
वर्ष 2025-26 यत्र (अक्टूबर-सितम्बर) में देश का चीनी उत्पादन 4.43 करोड़ टन होने का अनुमान है, जो कि गन्ने के अधिक उत्पादन होने के कारण होगा। चूँकि अभी तक गन्ने या चीनी आधारित शीरे से इथेनॉल का आवंटन मात्र 28 प्रतिशत ही रहा है, इसलिए करीब 34 लाख टन चीनी को इथेनॉल के लिए हस्तांतरित किया जाएगा। इस पर चोपड़ा ने कहा कि उस समय हमने सोचा था कि यह अधिक होगा, लेकिन अब हमारे सामने ऐसी परिस्थितियाँ हैं, जहाँ यह 34 लाख टन ही है। सरकार ने उद्योग की सहायता के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात करने की अनुमति दे दी है।
