अपना लाभांश बढ़ाने के लिए करें मूंगफली के बाद गेहूं की खेती      Publish Date : 08/10/2026

अपना लाभांश बढ़ाने के लिए करें मूंगफली के बाद गेहूं की खेती

                                                                                            प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

यदि आप मूंगफली की खेती करते हैं और फसल की खुदाई के बाद अगली फसल के रूप में गेहूं बोने की योजना बना रहे हैं, तो यह फसल चक्र आपके लिए काफी उपयोगी सिद्व हो सकता है। मूंगफली के बाद गेहूं की खेती को खास तौर पर ऐसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां मूंगफली की फसल अक्टूबर के आसपास खेत को खाली कर देती है और इसके बाद रबी सीजन में गेहूं की बुवाई की जाती है।

मूंगफली दलहनी कुल की एक प्रमुख फसल है और इसकी जड़ों में बनने वाली गांठों के कारण मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया होती है, जिसका कुछ लाभ अगली फसल को मिल सकता है। हालांकि गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की जांच, उचित खाद एवं उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी होता है।

मूंगफली के बाद गेहूं की खेती क्यों है किसानों के लिए उपयोगी?

मूंगफली की फसल खेत में केवल दाने ही नहीं देती, बल्कि इसके बाद खेत में अगली फसल के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी बन सकती हैं। मूंगफली की जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया की मदद से नाइट्रोजन स्थिरीकरण होता है। इस वजह से मूंगफली के बाद बोई जाने वाली गैर-दलहनी फसल को उपलब्ध पोषक तत्वों का लाभ मिल सकता है। इसी के चलते मूंगफली के बाद गेहूं की खेती को एक उपयोगी फसल चक्र माना जाता है। गेहूं एक गैर-दलहनी फसल है और यदि खेत की उर्वरता अच्छी है तो मूंगफली के बाद गेहूं की फसल को उचित पोषण प्रबंधन के साथ अच्छी तरह उगाया जा सकता है।

मूंगफली की खुदाई के बाद करें गेहूं की तैयारी

मूंगफली की फसल सामान्य तौर पर लगभग 100 से 120 दिन में परिपक्व होकर तैयार हो जाती है। शिवपुरी और आसपास के क्षेत्रों में कई खेत अक्टूबर के अंत तक मूंगफली की खुदाई के बाद खाली हो जाते हैं। ऐसे में किसानों के पास रबी फसल की तैयारी के लिए समय कम होता है। मूंगफली के बाद गेहूं की खेती के लिए मूंगफली की खुदाई पूरी होने के बाद खेत की स्थिति देखकर जल्द तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। खेत में पर्याप्त नमी होने पर गेहूं की बुवाई समय पर की जा सकती है। यदि मिट्टी में नमी कम है, तो उपलब्ध सिंचाई के अनुसार खेत को तैयार करना बेहतर रहेगा।

मूंगफली के बाद खेत में नाइट्रोजन का मिलने वाला लाभ

मूंगफली की जड़ों में राइजोबियम बैक्टीरिया उपलब्ध होने के कारण वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण की प्रक्रिया होती है। इससे फसल के बाद मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन की स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसका लाभ अगली गैर-दलहनी फसल को मिल सकता है। हालांकि किसानों को यह नहीं मानना चाहिए कि मूंगफली के बाद गेहूं की फसल में नाइट्रोजन वाले उर्वरक की जरूरत नहीं होगी। मूंगफली के बाद गेहूं की खेती में उर्वरक की सही मात्रा मिट्टी की जांच और फसल की आवश्यकता के अनुसार तय करना अधिक उचित है।

शिवपुरी और चंबल क्षेत्र में गेहूं की खेती की स्थिति

शिवपुरी और चंबल क्षेत्र में मूंगफली के बाद रबी फसल के रूप में गेहूं किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है। यहां मूंगफली की खुदाई के बाद खेत खाली होने पर किसान उपलब्ध सिंचाई के अनुसार गेहूं की बुवाई कर सकते हैं। स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, शिवपुरी क्षेत्र में अच्छी परिस्थितियों में गेहूं का उत्पादन लगभग 45 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। हालांकि वास्तविक उत्पादन मिट्टी, मौसम, सिंचाई, गेहूं की किस्म और फसल प्रबंधन पर निर्भर करता है।

गेहूं की बुवाई से पहले खेत को तैयार करें

मूंगफली की खुदाई के बाद खेत की स्थिति के अनुसार जुताई करनी चाहिए। खेत में मौजूद फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करना जरूरी है। इसके बाद मिट्टी को भुरभुरा और बुवाई के लिए उपयुक्त बनाया जा सकता है। मूंगफली के बाद गेहूं की खेती में अच्छी तरह तैयार खेत से बीज का मिट्टी के साथ बेहतर संपर्क बनता है और अंकुरण में मदद मिलती है। खेत की तैयारी करते समय मिट्टी में उपलब्ध नमी का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि गेहूं की शुरुआती बढ़वार के लिए पर्याप्त नमी जरूरी होती है।

मूंगफली के बाद गेहूं की खेती में सिंचाई का रखें ध्यान

गेहूं की फसल में सिंचाई का सही प्रबंधन उत्पादन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। खेत की नमी, मिट्टी के प्रकार और मौसम के अनुसार सिंचाई का समय तय करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने से भी फसल को नुकसान हो सकता है। जहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता है, वहां गेहूं की खेती आसानी से की जा सकती है। वहीं कम पानी वाले क्षेत्रों में किसान को अपनी परिस्थितियों के अनुसार रबी फसल का चुनाव करना चाहिए। इसलिए मूंगफली के बाद गेहूं की खेती शुरू करने से पहले सिंचाई की उपलब्धता का आकलन करना जरूरी है।

मूंगफली के बाद गेहूं लेने से लागत हो सकती है कम

मूंगफली के बाद गेहूं लेने से खेत में पहले से मौजूद पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे किसान को पोषक तत्व प्रबंधन में मदद मिल सकती है। लेकिन खाद और उर्वरक की मात्रा केवल पिछली फसल को देखकर कम करना उचित नहीं है। मिट्टी की जांच कराने के बाद जरूरत के अनुसार उर्वरक देने से अनावश्यक खर्च को नियंत्रित किया जा सकता है। मूंगफली के बाद गेहूं की खेती में संतुलित पोषण प्रबंधन से फसल की बढ़वार और उत्पादन को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

मूंगफली के बाद जौ भी हो सकता है एक अन्य विकल्प

जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां किसान गेहूं के अलावा जौ जैसी रबी फसल पर भी विचार कर सकते हैं। फसल का चुनाव मिट्टी, पानी, मौसम और स्थानीय बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। जहां पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध है और मिट्टी गेहूं के अनुकूल है, वहां मूंगफली के बाद गेहूं की खेती, किसान के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है। इससे किसान खरीफ और रबी दोनों मौसमों में खेत का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।

फसल चक्र अपनाने से मिट्टी को मिल सकता है लाभ

लगातार एक ही फसल उगाने के बजाय अलग-अलग फसलों को उचित क्रम में उगाना मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। मूंगफली के बाद गेहूं लेना इसी तरह के फसल चक्र का हिस्सा हो सकता है। मूंगफली के बाद गेहूं की फसल लेने के साथ किसान खेत में जैविक पदार्थ बनाए रखने, मिट्टी की जांच कराने और संतुलित खाद एवं उर्वरक का इस्तेमाल करने पर ध्यान दें। इससे लंबे समय में मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

मूंगफली के बाद गेहूं की खेती में इन बातों का रखें ध्यान

मूंगफली के बाद गेहूं की खेती करते समय किसान को सबसे पहले खेत की नमी और सिंचाई की उपलब्धता देखनी चाहिए। मूंगफली की खुदाई के बाद खेत को लंबे समय तक खाली रखने से बचना चाहिए और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार गेहूं की बुवाई की तैयारी करनी चाहिए। गेहूं की अच्छी फसल के लिए प्रमाणित बीज, उपयुक्त किस्म, समय पर बुवाई और संतुलित पोषण प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। मिट्टी की जांच के आधार पर खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करने से फसल को जरूरत के अनुसार पोषण दिया जा सकता है।

मूंगफली के बाद गेहूं की खेती से किसानों को क्या लाभ मिल सकता है?

मूंगफली के बाद गेहूं की खेती करने से किसान एक ही खेत में खरीफ और रबी दोनों मौसमों की फसल ले सकते हैं। मूंगफली के बाद मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों का लाभ अगली फसल को मिल सकता है और उचित प्रबंधन के साथ गेहूं से अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है। शिवपुरी और चंबल क्षेत्र के किसान अपनी मिट्टी, सिंचाई और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मूंगफली के बाद गेहूं की खेती करने की योजना बना सकते हैं। सही समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और उचित सिंचाई के साथ यह फसल चक्र खेती की उत्पादकता और आय को बेहतर करने में मदद कर सकता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।