पोषण युक्त फसल रागी की उन्नत खेती      Publish Date : 29/09/2026

पोषण युक्त फसल रागी की उन्नत खेती

                                                                                         प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

  • रागी की खेती, पोषण से भरपूर और कम पानी में अच्छी पैदावार वाली फसल

रागी, जिसे फ्रैंच मिलेट, मंडुआ और अफ़्रीकी रागी के नाम से भी जाना जाता है, आज से किसानों एवं उपभोक्ताओं दोनों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पहले इसे मुख्य रूप से पहाड़ी और शुष्क क्षेत्रों की फसल माना जाता था, लेकिन अब इसकी खाद्यान्न पोषण मांग और बेहतर बाजार मूल्य के कारण कई किसान इसकी व्यावसायिक खेती भी करने लगे हैं।

रागी में कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और प्रोटीन की मात्रा सामान्य अनाजों की तुलना में अधिक पाई जाती है। यही कारण है कि इसका उपयोग अब हेल्थ फूड, बेबी फूड, मल्टीग्रेन आटा और कई पोषण आहार में बढ़ गया है। कम पानी में अच्छी उपज देने की क्षमता है, यह सूखे प्रभावित क्षेत्र के लिए भी उपयोगी है।

रागी की खेती के लिए उपयुक्त और कृषि योग्य मिट्टी

रागी गर्म और मध्यम आर्द्र जलवायु में अच्छी वृद्धि करता है। यह 20°C से 34°C के बीच तापमान का बेहतर विकास करता है और कम वर्षा वाले क्षेत्र में भी ठंडक बढ़ सकती है। इसकी खास बात यह है कि यह उपभोक्ता की स्थिति काफी हद तक सहन कर चुकी है।

मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल वाली मिट्टी, हल्की काली और पहाड़ी मिट्टी इसके लिए उपयुक्त मानी जाती है। खेत में जल जमाव नहीं होना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा में जीवाश्मों का विकास प्रभावित हो सकता है। मिट्टी का pH लगभग 4.5 से 8 के बीच उपयुक्त माना जाता है।

खेत की तैयारी कैसे करें

रागी की अच्छी खेती के लिए खेत की तैयारी सही तरीके से करना जरूरी है। सबसे पहले खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाना चाहिए ताकि नमी संरक्षित रहे और पौधों की जड़ों का विकास बेहतर हो सके।

अंतिम जुताई के समय खेत में अच्छी तरह से साडी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बहुत अधिक है। कई किसान किल्लों और जड़ों विकास को मजबूत करने के लिए बायोलॉजिकल और 4 किलोग्राम माइकोपेप जीआर माइकोराइजा आधारित मॉडरेटर का भी उपयोग करते हैं।

उपयोग करने का सही समय और तरीका

अधिकांश क्षेत्रों में रागी की वैल्युएबल्स सीज़न में जून से जुलाई के बीच की जाती है। कुछ किसान डिज़ाइन तैयार करके बुवाई करने की विधि भी अपनाते हैं जो कल्लों की संख्या की स्थिर रहती है और बेहतर उत्पादन करती है।

प्रत्यक्ष वर्गीकरण के लिए माना जाता है कि लाइन से लाइन की दूरी लगभग 25 से.मी. और पौधे से पौधे के बीच की दूरी 10 से 15 से.मी. रखना उपयुक्त है। 3 से 4 मेट्रिक्स डेस्टिनेशन पर काम करना चाहिए।

बीज उपचार क्यों जरूरी है

रागी की फसल में बिल्डर और मिट्टी जनित संक्रमण से बचाव के लिए बीज उपचार अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसलिए रागी की बुवाई करने से पहले ट्राइकोडर्मा से पहले कीटनाशक का उपचार किया जा सकता है।

खाद एवं पोषण प्रबंधन

रागी की फसल कम लागत में भी अच्छी बन सकती है, लेकिन लागत पोषण से लेकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही बेहतर हैं। खेत में पहले गोबर की खाद के साथ 4 किलो/एकड़ माइकोपेप (माइकोराइजा जीआर) मिलाया जाता है। इसके अलावा स्टेरॉयड, सैलून और पोटाश का मानक अनुप्रयोग की वृद्धि और बालियों के विकास में मदद मिलती है।

सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पर प्रमाणित की वृद्धिवार प्रभावित हो सकता है, इसलिए समय-समय पर खेत का निरीक्षण करना जरूरी है।

संतुलन का सही उपाय

फार्मास्युटिकल की प्रारंभिक अवस्था में तरल पदार्थ तेजी से बढ़ रहे हैं और प्रमाणित से पोषक तत्त्व व प्रशिक्षण लेना लेते हैं। इसलिए 30 से 40 दिन की शुरुआत में नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। समय पर निराई गुड़ाई करने से नारियल की लिफ्ट सबसे अच्छी होती है। कुछ किसानों के लिए जरूरी है कीटनाशकों का भी प्रयोग ताकि खेत को लंबे समय तक साफ रखा जा सके।

फसल प्रबंधन

रागी सामान्यतः वर्षा आधारित फसली मानी जाती है, इसलिए इसे बहुत अधिक सींचने की आवश्यकता नहीं होती। हालाँकि अगर लंबे समय तक बारिश न हो तो फूल आना और दाना बनना बंद हो जाता है। खेत में जल भंडारण बनाए रखना भी जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी की कमी न हो।

प्रमुख कीट एवं रोग उनका. नियंत्रण

    कीट / रोग

         नुकसान

                    ऋण

सैनिक सुंडी

प्रारंभिक अवस्था में ओक्लाइक को ब्लास्ट डैमेज किया जाता है

फिफ्टी-ओ-5 (क्लोरपायरीफॉस 50% + साइपरमेथ्रिन 5% ईसी) 250 मि.ली./एकड़।

चेपा

अनइंस्टॉल का रस चूसकर फसल का नुकसान करता है।

PEPMIDA 30 (इमिडाक्लोप्रिड 30.5% SC) 25-30 मि.ली./एकड़।

तना छेदक

टैन और रूटीन को नुकसान पहुंचाता है

पेपोरा (क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी) 60 मि.ली./एकड़।

पत्ता लपेट सुंडी

अनइंस्टॉल कोकर को अंदर से नुकसान पहुंचाता है

क्लोरपाइरीफोस 20% ईसी) 500 मि.ली./एकड़।

येलो मोज़ेक वायरस

अंतिम पर पाइलेट नामांकित बने हुए हैं

PEPMIDA-17 (इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL) 40-50 मिली/एकड़। औषधियों पर नियंत्रण रखें

 कटाई और उत्पाद

रागी की फसल सामान्यतः 100 से 120 दिन में काटने के लिए तैयार हो जाती है। जब बालियां पूरी तरह से पक जाएं और दाने दानेदार कठोर हो जाएं, तब कटिंग करनी चाहिए।

कटिंग के बाद बालियों को अच्छी तरह से धूप में सुखाना जरूरी होता है ताकि स्टोरेज के समय की समस्या न हो। सही प्रबंधन उपकरण वाले किसान अच्छी गुणवत्ता के साथ बेहतर उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं।

उपज

रागी की खेती कम लागत, कम पानी और बेहतर पोषण मूल्य के कारण किसानों के लिए तेजी से विकल्प तलाश रही है। सूखे मौसम और पानी की कमी वाली घाटी में यह सफल स्थिर उत्पादन की क्षमता है।

यदि किसान उन्नत उपकरणों का चयन, संतुलित पोषण, समय पर स्केल और नियंत्रण फ़सल सुरक्षा अपनाता है, तो रागी की खेती से लंबे समय तक अच्छा आर्थिक लाभ वाली फ़सल की प्राप्ति हो सकती है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।