
प्रो-ट्रे में कम बीजों से उगाएं स्वस्थ पौध Publish Date : 20/09/2026
प्रो-ट्रे में कम बीजों से उगाएं स्वस्थ पौध
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
प्रो-ट्रे नर्सरी में कम बीजों से स्वस्थ, मजबूत और एक समान पौध तैयार की जा सकती है। टमाटर, मिर्च, बैंगन, गोभी और बेल वाली फसलों के लिए तो यह बहुत उपयोगी सिद्व होती है। यह पानी, स्थान और श्रम की बचत के साथ बेहतर रोपाई और पौधों की शुरुआती वृद्धि में मदद करती है।
प्रो-ट्रे नर्सरी में की खेती में स्वस्थ और मजबूत पौध तैयार करना अच्छी पैदावार की पहली सीढ़ी होती है। पारंपरिक क्यारी के स्थान पर किसान अब प्रो-ट्रे, पॉली-ट्रे और प्लग नर्सरी तकनीक अपनाकर अपनी फसलों से अच्छा लाभ अर्जित कर सकते हैं। इसमें प्रत्येक पौधे को अलग सेल में उगाया जाता है, जिससे जड़ों, नमी, पोषण और विकास को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रोकली जैसी सब्जियों वाली फसलों के लिए यह तकनीक बहुत उपयोगी सिद्व होती है। कुछ भिंडी, करेला और घिया आदि के जैसी लताओं वाली सब्जियों के लिए भी यह उपयोगी रहती है। प्रो-ट्रे नर्सरी तकनीक के सम्बन्ध में हमारे कृषि वैज्ञानिक एवं सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रो0 आर. एस. सेंगर बताते हैं कि प्रो-ट्रे नर्सरी का प्रमुख लाभ बीज की बचत है, क्योंकि प्रो-ट्रे नर्सरी की प्रत्येक सेल में सीमित बीज लगाने की आवश्यकता होती है। अतः इस तकनीक का उपयोग करने से बीज की खपत और अतिरिक्त बीज की खरीद की लागत भी कम हो सकती है। वहीं हाईब्रिड बीजों की बुवाई के लिए यह तकनीक विशेष रूप से लाभकारी सिद्व होती है।
खराब मौसम में रहती है नर्सरी सुरक्षित
प्रो-ट्रे नर्सरी को पॉलीहाउस, शेडनेट या सुरक्षित स्थान में रखने के चलते यह तेज बारिश, अधिक गर्मी और अधिक ठंड आदि मौसमी प्रभावों से पौधों की सुरक्षा होती है। खेत तैयार होने तक इन पौधे को नियंत्रित वातावरण में विकसित किया जा सकता है। खेत की तैयारी पूरी हो जाने के बाद पौध को आसानी से निकालकर उसकी रोपाई मुख्य खेत में कर दी जाती है। उन्नत जड़ प्रणाली के कारण पौध खेत में जल्दी स्थापित हो जाती है और फसल शुरुआती वृद्धि भी पारंपरिक विधि से लगाए गए पौधों की तुलना में काफी बेहतर रहती है।
एक जैसा अंकुरण और जड़ें होती है मजबूत
प्रो-ट्रे नर्सरी में बीज की अच्छी बढ़त होती है। साथ ही, बेहतर और एक समान अंकुरण होता है तथा मजबूत जड़ प्रणाली को पूर्ण रूप से विकसित करने में भी मदद मिलती है। अच्छा अंकुरण होने तथा जड़ के पूर्ण विकास के कारण जड़ को कम नुकसान होता है। और पौधे खेत में जल्दी स्थापित हो जाते हैं। इसके साथ ही खेत में लगाए गए स्वस्थ पौध की मृत्यु दर भी कम हो सकती है। इसके अलावा, प्रो-ट्रे में पानी और पोषक तत्वों का प्रबन्धन काफी बेहतर तरीके से होता है तथा कम स्थान में अधिक संख्या में पौध तैयार की जा सकती है।
प्रो-ट्रे से तैयार करें मजबूत पौध
प्रो-ट्रे छोटे सेल वाली प्लास्टिक ट्रे हैं, जिनमें ग्रोइंग मीडिया (सामग्री) भरकर प्रत्येक सेल में एक-दो बीज डाले जाते हैं। अंकुरण के बाद पौधा उसी सेल में विकसित होता है, जिससे उनकी जड़ें आपस में कम उलझती हैं और पौध की रोपाई करना काफी आसान होता है। नर्सरी के लिए मजबूत ट्रे चुनें, जिसमें पर्याप्त संख्या में जल निकासी के छेद बने हों। हर फसल चक्र के बाद ट्रे की सफाई अच्छे तरीके से करनी चाहिए। इससे डैम्पिंग-ऑफ जैसी कवकजनित रोगों का खतरा कम हो जाता है।
फसल के अनुसार चुनें सही प्रो-ट्रे
सभी सब्जियों के लिए एक जैसी प्रो-ट्रे उपयुक्त नहीं होती। ट्रे का चुनाव बीज के आकार व पौध की वृद्धि के अनुसार किया जाना उचित रहता है। 200-288 सेल वाली ट्रे प्याज और लेट्यूस जैसी छोटे बीज वाली फसलों के लिए उपयोगी हैं। 98-128 सेल वाली ट्रे टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी और 50-72 सेल वाली ट्रे खीरा, कद्दू, तरबूज-खरबूजे जैसी फसल के बीजों को तेजी से बढ़ने वाले पौधों को तैयार करने के लिए बेहतर मानी जाती है।
ग्रोइंग मीडिया का रखें विशेष ध्यान
प्रो-ट्रे में स्वस्थ पौध तैयार करने के लिए ग्रोइंग मीडिया हल्का, भुरभुरा, जल-निकास वाला और रोगमुक्त होना चाहिए। इसमें मुख्यतः कोकोपीट, परलाइट और वर्मी कुलाईट का उपयोग किया जाता है। कोकोपीट नमी बनाए रखता है, परलाइट जल-निकास और वायु संचार बढ़ाता है, जबकि वर्मी कुलाईट नमी व पोषक तत्वों को रोकता है। इन सभी को 3:1:1 अनुपात में पौध तैयार करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।