
आधुनिक तकनीक एवं गन्ने की खेती Publish Date : 04/07/2026
आधुनिक तकनीक एवं गन्ने की खेती
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य
- गन्ने की स्मार्ट खेती यानी अधिक उत्पादन एवं अधिक मुनाफा।
- गन्ने की खेती में आधुनिक तकीक अपनाकर गन्ने की पैदावार बढ़ाएं, जल की खपत कम कर लागत को भी कम करें।
गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकें अपनाने का चरणबद्व तरीका
सैटेलाइट मॉनिटरिंगः सैटेलाईट के द्वारा खेत की मॉनिटरिंग करने से खेत की निगरानी, फसल की स्थिति, नमी और पोषक तत्वों की सही जानकारी के साथ ही सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है।
ड्रोन तकनीकः ड्रोन, फसलों में दवाओं का छिड़काव हवा से करता है, इससे फसलों की सटीक एवं एकसमान कवरेज सुनिश्चित होती है और इसके साथ ही समय, श्रम और लागत में भी बचत होती है।
मोबाइल ऐप एवं डिजिटल सेवाएं: डिजिटल माध्यम से किसान को मौसम, बाजार भाव, कीट एवं रोग के प्रति सलाह, सिंचाई एवं खाद प्रबन्धन आदि के सम्बन्ध में पूरी जानकारी घर बैठे ही उसके मोबाइल पर प्राप्त हो जाती है।
आईओटी सेंसर (स्मार्ट खेत): इससे मिट्ठी में नमी का स्तर, तापमान, ईसी, पीएच और पोषक तत्वों की रियल टाइम जानकारी प्राप्त होती है, जिससे सही मात्रा में खाद एवं पानी का प्रयोग करना सुनिश्चत होता है।
सोलर पंप अर्थात सोलर एनर्जी का उपयोगः सौर ऊर्जा से सिंचाई करने से बिजली की बचत तो होती ही है साथ यह पर्यावरण के अनुकूल होता है तथा इससे आव/यकता के समय सस्ती सिंचाई की राह प्रशस्त होती है।
1. उत्तम बीज का चयनः गन्ने की बुवाई हेतु प्रमाणित बीज की स्वस्थ प्रजातियों का ही प्रयोग करना चाहिए।
2. भूमि की तैयारीः सबसे पहले मृदा का परीक्षण कराएं। इसके बाद मिट्टी सुधार के तरीके अपनाएं एवं गहरी जुताई करें।
3. ड्रिप सिंचाई सिस्टम की स्थापनाः लाईन एवं लेंटरल की स्थापना फर्टीगेशन टैंक के साथ करनी चाहिए।
4. फर्टीगेशन प्रबन्धनः समय समय पर घुलनशील खादों का उपयोग करने को प्राथमिकता प्रदान करें।
5. ड्रोन के द्वारा छिड़कावः कीट एवं रोगों पर नियंत्रण पाने के लिए तेज, सटीक और सुरक्षित दवाओं का छिड़काव ड्रोन के द्वारा करें।
6. फसल की निगरानी एवं रिकार्डः ऐप एवं सेंसर के माध्यम से खेत की निगरानी एवं रिकार्ड को मेंटेन रखें।
7. सही समय पर कटाईः गन्ने की पूर्ण परिपक्वता पर ही कटाई करें, इससे शुगर की रिकवरी भी अधिक होती है।
गन्ने का स्मार्ट खेत

- अधिकतम उत्पादन
- कम लागत
- जल की बचत
- किसान को अधिक लाभ
आधुनिक तकीनकों के अपनाने से गन्ने की खेती में प्राप्त लाभः
- आधुनिक तकनीक अपनाने से 40 से 60 प्रतिशत तक जल की बचत होती है।
- कुल लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है।
- तकनीक के माध्यम से फसल के उत्पादन मकें भी 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्वि होती है।
- समय की बचत होती है।
- पर्यावरण का संरक्षण होता है और किसान को अधिक लाभ प्राप्त होता है।
ड्रिप सिंचाई से प्राप्त लाभ
- ड्रिप सिंचाई सिस्टम को अपनाने से 40 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है।
- पानी एवं पोषक तत्व सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचते हैं।
- खरपतवार के पनपने में कमी आती है।
- इससे अधिक उत्पादन और फसलीय उत्पादों की गुणवत्ता में वृद्वि होती है।
गन्ने की खेती में बुवाई से लेकर कटाई तक की सम्पूर्ण जानकारी
खेत की तैयारी कैसे करें-
- दो से तीन बार खेत की गहरी जुताई आवश्यक रूप से करनी चाहिए।
- इसके बाद खेत को समतल एवं मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए।
- गोबर की खाद 20 से 25 टन तक प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करनी चाहिए।
- गन्ने के खेत में जल निकसी की उचित व्यवस्था का होना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।
फसल की बुवाई (रोपाई) करनाः
फसल की बुवाई अथवा रोपाई सबसे अच्छा समय बसंतकाल अर्थात फरवरी-मार्च का महीना माना जाता है और शरदकालीन गन्ने की बुवाई अक्टूबर से नवम्बर के महीने तक की जाती है।
गन्ने का बीजः
- दो से तीन आँखों वाले सेट (गन्ने के टुकडे) का उपयोग बुवाई करने के लिए करना उत्तम रहता है।
- गन्ने की बुवाई के लिए सदैव स्वस्थ एवं रोगमुक्त बीज का ही चयन करना चाहिए।
उचित दूरीः
- गन्ने की बुवाई के दौरान लाईन से लाईन की दूरी 75 से 90 सेमी तथा पौधे सं पौधें के बीच की दूरी 20 से 25 सेमी रखनी चाहिए।
गन्ने की फसल में सिंचाई
- गन्ने में पहली सिंचाई गन्ने की बुवाई करने के तुरंत बाद ही करनी चाहिए।
- इसके बाद गर्मियों में 7 से 10 दिन के अन्तराल अथवा आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करते रहना चाहिए।
- ध्यान रखें कि गन्ने की फसल मे जल भराव न होने दें।
खाद तथा उर्वरकों का प्रयोगः
गन्ने की फसल में 150 किग्रा से 200 किग्रा नाइट्रोजन, 60 से 80 किग्रा फॉस्फोरस और 60 से 80 किग्रा, प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।
इसके साथ ही नाइट्रोजन को तीन भाग में प्रदान करे जिसमें से पहला भाग बुवाई करने के 30 दिन बाद, दूसरा बुवाई करने के 60 दिन बाद तथा तीसरा भाग बुवाई करने के 90 दिन बाद देना अच्छा माना जाता है।
निराई-गुड़ाई
- गन्ने के खेत की निराई 2 से 3 बार करनी चाहिए। ऐसा करने से फसल में खरपतवारों की समस्या कम होती है।
- खरपतवारों के चलते गन्ने की फसल कजोर रह जाती है।
- इसके साथ ही गन्ने में मिट्टी चढ़ाने का कार्य 60 से 90 दिन के बाद करना चाहिए।
गन्ने में कीट एवं रोग नियंत्रण कैसे करें-
टॉप बोरर और अर्ली शूट बोरर गन्ने के प्रमुख कीट हैं, जिनका नियंत्रण सही समय पर सही दवा के छिड़काव, खेत की स्वच्छता को बनाए रखने और रोग से प्रभावित गन्ने के पौधों को खेत बाहर निकालकर नष्ट कर देने के जैसी क्रियाएं करने के माध्यम से किया जा सकता है।
फसल की देखभाल करने के तरीकेः
- गन्ने की फसल को गिरने से बचाने के लिए समय समय पर फसल की बंधाई करते रहना चाहिए।
- समय समय पर खेत की निगरानी भी करते रहना जरूरी होता है।
गन्ने की फसल की कटाई
- गन्ने की फसल 10 से 12 महीने में पककर कटने के लिए तैयार हो जाती है।
- पकने के बाद फसल की पत्तियाँ सूखने लगती हैं।
- इसके साथ ही गन्ना सख्त और मीठा हो जाता है।
- फसल की कटाई जमीन की सतह से ही की जानी चाहिए।
उत्पादन
गन्ने की फसल की अच्छी तरह से देखभाल करने से 600 से 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन प्राप्त हो सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।