मिलेट की खेती से पोषण, लाभ तथा खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य की पूर्ति      Publish Date : 11/06/2026

मिलेट की खेती से पोषण, लाभ तथा खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य की पूर्ति

                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

  • बंजर भूमि पर हो सकेगी मोटे अनाज की खेती

बंजर जमीन में अच्छी तरह से पनपती है, बाजरे की यह किस्म है, मिलेट्स की खेती सूखाग्रस्त इलाकों के लिए भी वरदान है।

मिलेट कौन सी फसल है?

मिलेट एक प्रकार की अनाज वाली फसल है जो आमतौर पर सूखे क्षेत्रों में उगाई जाती है। मिलेट के कई प्रकार होते हैं, जिनमें बाजरा, रागी, ज्वार, कोदो, कुटकी, सांवा और कंगनी शामिल हैं।

  • बंजर भूमि पर मोटे अनाज की खेती का समय, बुवाई, सिंचाई, देखभाल और पैदावार।
  • भारत में लगभग 60 लाख हेक्टेयर भूमि बंजर है। इस भूमि का उपयोग कृषि के लिए नहीं किया जा रहा है, जबकि इस भूमि पर मोटे अनाज की खेती करके इसे उपजाऊ बनाया जा सकता है।
  • मोटे अनाज, जैसे कि ज्वार, बाजरा, रागी, मडुआ, आदि, कम पानी में भी आसानी से उगाई जा सकती हैं। इसके अलावा मोटे अनाज पौष्टिक भी होते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, और अन्य पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा उपलब्ध होती है।
  • सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए वरदान है मिलेट की खेती।
  • सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण खेती करना मुश्किल होता है। ऐसे क्षेत्रों में गेहूं और चावल जैसी फसलों को उगाना लगभग असंभव होता है। लेकिन मिलेट की खेती ऐसे क्षेत्रों के लिए वरदान है।
  • मिलेट एक प्रकार का अनाज है जो कम पानी में भी अच्छी तरह से उगाया जा सकता है। यह अन्य अनाज की तुलना में अधिक पौष्टिक भी होता है। मिलेट में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • मिलेट की खेती करने के लिए किसी प्रकार की विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है। मोटे अनाज काफी कम लागत में उगाए जा सकते है। मिलेट की फसल जल्दी पक जाती है, जिससे किसानों को जल्दी पैसा मिल जाता है।
  • भारत में मिलेट की खेती मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में की जाती है। इन राज्यों में सूखाग्रस्त क्षेत्रों में मिलेट की खेती किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत है।
  • मिलेट की खेती का बढ़ावा देने से सूखाग्रस्त इलाकों में लोगों की आजीविका में सुधार हो सकता है। यह जल संरक्षण में भी मदद कर सकता है।

मोटे अनाज (मिलेट) की खेती करने के लाभ-

  • मोटे अनाज की फसलें कम पानी व कम लागत में भी आसानी से उगाई जा सकती है।
  • मोटे अनाज अन्य अनाज की फसलों की तुलना में अधिक पौष्टिक होती है।
  • मोटे अनाज की खेती करने से खेत में नाइट्रोजन फिक्सेशन (Nitrogen Fixating) होती है जिससे अगली पैदावार अच्छी होती है।
  • मोटे अनाज की एक साल में तीन फसले निकली जा सकती है।
  • यह फसलें 45-80 दिन के अंदर कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
  • मोटे अनाज की खेती से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है।
  • खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य की पूर्ति में सुधार होता है।
  • इससे किसानों की आय में भी पर्याप्त वृद्धि होती है।
  • मोटे अनाज की खेती से पर्यावरण को भी संरक्षित किया जा सकता है।
  • मिलेट्स एक पौष्टिक अनाज है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
  • मिलेट्स सूखा-सहिष्णु होता है, जिससे इसे कम पानी वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उगाया जा सकता है।
  • मिलेट की खेती सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए एक वरदान है। यह किसानों की आय बढ़ाने और जल संरक्षण में मदद कर सकता है।

मिलेट्स की खेती कैसे करें?

मिलेट्स एक प्रकार के मोटे अनाज हैं जो भारत में लंबे समय से उगाए जाते हैं। ये अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और सूखा-सहिष्णु होते हैं, जिससे वे कई प्रकार की जलवायु में उगाए जा सकते हैं।

मिलेट्स की खेती के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

भूमि की तैयारीः मिलेट्स की खेती के लिए मिट्टी को अच्छी तरह से तैयार करना आवश्यक है। मिट्टी को समतल और भुरभुरी बनाना चाहिए। इसके लिए खेत की दो-तीन बार जुताई करें और फिर पाटा लगाएं।

बीज बुवाईः मिलेट्स के बीजों को 3-4 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं। बुवाई का समय फसल के प्रकार पर निर्भर करता है। आमतौर पर, मिलेट्स की बुवाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है।

सिंचाईः मिलेट्स की फसल को अच्छी सिंचाई की आवश्यकता होती है। बुवाई के बाद पहली सिंचाई तुरंत करें। इसके बाद, आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।

खरपतवार नियंत्रणः मिलेट्स की फसल में खरपतवार की समस्या हो सकती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवारनाशक का प्रयोग करें या हाथ से खरपतवार निकालें।

फसल सुरक्षाः मिलेट्स की फसल को कीटों और रोगों का भी खतरा होता है। कीटों और रोगों से बचाव के लिए उचित समय पर कीटनाशक और रोगनाशक का प्रयोग करें।

फसल कटाईः मिलेट्स की फसल 80-90 दिनों में पक जाती है। फसल पकने के बाद, इसे कटाई के लिए तैयार करें। कटाई के बाद, फसल को सुखाकर भंडारित करें।

मिलेट की खेती के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए यह सूखे क्षेत्रों के लिए एक उपयुक्त फसल है। मिलेट की फसल जल्दी पक जाती है, इसलिए यह किसानों के लिए एक लाभदायक फसल है।

मिलेट कितने प्रकार के होते हैं?

मिलेट को उनके आकार, रंग और स्वाद के आधार पर कई प्रकारों में बांटा जा सकता है। कुछ सामान्य प्रकारों में शामिल हैं:-

मोटे मिलेटः इनमें बाजरा, ज्वार, सांवा, कंगनी और चेना शामिल हैं। ये मिलेट्स आमतौर पर बड़े आकार के होते हैं और इनका रंग हल्का भूरा या पीला होता है।

सूक्ष्म मिलेटः इनमें रागी, कोदो और कुटकी शामिल हैं। ये मिलेट्स आमतौर पर छोटे आकार के होते हैं और इनका रंग गहरा भूरा या काला होता है।

मिलेट में क्या क्या आते हैं?

मिलेट एक प्रकार का अनाज है जो आमतौर पर सूखे क्षेत्रों में उगाया जाता है। मिलेट में कई प्रकार के अनाज आते हैं, जिनमें शामिल हैं:-

बाजराः- बाजरा एक ऐसी फसल है जो कम पानी और कम उर्वरक में भी अच्छी पैदावार देती है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बंजर जमीन में भी उग सकती है। ऐसे में, बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बाजरे की खेती को बढ़ावा देना एक बेहतरीन विकल्प है।

                                 

रागीः- रागी एक उच्च प्रोटीन वाला अनाज है जो कैल्शियम और फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और मधुमेह के नियंत्रण में मदद कर सकता है।

ज्वारः- ज्वार एक कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला अनाज है जो कॉबोहाइड्रेट का एक अच्छा स्रोत है। यह टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

कोदो:- कोदो एक अनाज है जो ग्लूटेन मुक्त है। यह आयरन, फाइबर और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है। यह कब्ज, एनीमिया और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

                                      

कुटकीः- कुटकी एक अनाज है जो प्रोटीन, फाइबर और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और मधुमेह के नियंत्रण में मदद कर सकता है।

सांवाः- सांवा एक प्रकार का छोटा अनाज है जो मुख्य रूप से भारत में उगाया जाता है। इसका उपयोग रोटी, खिचड़ी, बिरयानी और अन्य व्यंजनों में किया जाता है। सांवा में प्रोटीन, आयरन और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है।

कंगनीः- कंगनी एक प्रकार का छोटा अनाज है जो भारत के दक्षिणी भागों में विशेष रूप से लोकप्रिय है। कंगनी आयरन, कैल्शियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है।

चेनाः- चेना एक प्रकार का छोटा अनाज है जो भारत के पश्चिमी भागों में विशेष रूप से लोकप्रिय है। चेना आयरन, कैल्शियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है।

इन अनाजों में फाइबर, प्रोटीन, आयरन और अन्य पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है।

मिलेट के फायदे और स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?

फाइबर: मिलेट फाइबर का एक अच्छा स्रोत है। फाइबर पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रोटीनः मिलेट प्रोटीन का भी एक अच्छा स्रोत है। प्रोटीन शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है।

आयरनः मिलेट आयरन का भी एक अच्छा स्रोत है। आयरन रक्त में ऑक्सीजन के परिवहन के लिए आवश्यक है।

  • ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
  • कैंसर के जोखिम को कम करता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।