
स्टीविया की खेतीः मधुमेह के रोगियों के लिए भी लाभकारी Publish Date : 09/06/2026
स्टीविया की खेतीः मधुमेह के रोगियों के लिए भी लाभकारी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
एक एकड़ में स्टीविया की खेती से एक साल में छह लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है। प्रदूषण और कई गंभीर बीमारियों से बचने के लिए भारत में नेचुरल प्रोडक्ट (Natural Products) और मेडिसिन का बाजार लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इस तरह की खेती (Farming of Medicinal Plants) में लागत तो कम आती ही है और साथी ही लंबे समय तक किसान की कमाई भी सुनिश्चित होती है। मेडिसिनल प्लांट (Medicinal Plant) की खेती के लिए न तो बड़े खेत की आवश्यकता होती है और न ही बहुत अधिक निवेश करने की। स्टीविया की खेती के लिए अपना खेत होना भी जरूरी नहीं है। इसकी खेती करने के लिए किसान भाई कॉन्ट्रैक्ट पर भी खेत ले सकते हैं, आजकल कई कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट पर Medicinal Plant की खेती करा रही है।
स्टीविया की खेती से कमाई

अगर आप भी इस प्रकार की खेती करना चाहते हैं तो आप भी मेडिसिनल प्लांट की खेती कर काफी कमाई कर सकते हैं। इसी प्रकार वर्तमान में चीनी का विकल्प बन चुके स्टीविया (Stevia) की मांग भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। देश-दुनिया में जिस तरह डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उस स्थिति में स्टीविया की मांग तेजी से बढ़ रही है। स्टीविया का पौधा 60 से 70 सेंटी मीटर बड़ा होता है। स्टीवियां कई साल तक पैदावार देने वाला पौधा है जिसमें बहुत सी शाखा होती है। स्टीविया की पत्तियां भले ही आम पौधों की तरह की दिखाई देती हों, लेकिन यह चीनी से 25-30 गुना अधिक मीठी होती हैं। भारत के बेंगलुरु, पुणे, इंदौर और रायपुर जैसे शहरों में स्टीविया की खेती की जा रही है। विश्व में स्टीविया की खेती पैराग्वे, जापान, कोरिया, ताईवान और अमेरिका जैसे देशों में भी बहुलता से की जाती है।
स्टीविया का लगातार बढ़ता महत्व
मेडिसिनल प्लांट स्टीविया की उपयोगिता इसमें पाए जाने वाले मिठास के कारण बढ़ती जा रही है। स्टीविया की विशेष बात यह है कि यह न केवल सामान्य चीनी से अधिक मीठी होती है साथ ही यह पूरी तरह कैलोरी रहित भी है। अधिक मीठा और कैलोरी रहित होने के कारण स्टीविया Diabetes के रोगियों के लिए भी सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इसके अलावा स्टीविया रक्तचाप, मसूड़ों में होने वाली बीमारियों और चर्म रोग के लिए भी एक प्रभावशाली औषधि है जो कि एंटी वैक्टिरियल गुणों से भी युक्त होती है।
स्टीविया की खेती के लाभ
ऐसे में यदि आप भी स्टीविया की खेती करना चाहते हैं तो इसके पौधों के साथ सबसे अच्छी बात है कि इसमें कोई रोग नहीं लगता और रसायनिक खाद का प्रयोग करने की आवश्यकता भी नहीं हो़ती है। आप स्टीविया की खेती के एक एकड़ क्षेत्र से सालाना 6 लाख रुपये की कमाई कर सकते हैं। जबकि एक एकड़ के क्षेत्र में स्टीविया की खेती में कुल खर्च मात्र एक लाख रुपये तक का ही आता है। स्टीविया की खेती से एक सीजन में मुनाफा 5 लाख रुपये तक हो सकता है। स्टीविया की खेती करने में प्रति वर्ष 20 से 25 टन गोबर की सड़ी खाद या 7-8 टन प्रति एकड़ केचुआ खाद का उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही स्टीविया की फसल की सबसे अच्छी बात है कि इसके पौधे में कोई रोग नहीं लगता है।
स्टीविया की खेती का तरीका
स्टीविया के पौधे आमतौर पर कलम की मदद से तैयार किये जाते हैं। इसके लिए 15 सेंटी मीटर लंबी कलम को काटकर पॉलीथिन की थैली में तैयार किया जाता है। स्टीविया के पौधे आलू की तरह खेत की मेड़ पर लगाये जाते हैं। 9 इंच ऊंचे मेड़ पर स्टीविया के पौधे एक-दूसरे से 15 CM पर लगाये जा सकते हैं, जबकि पंक्ति से पंक्ति की दूरी 40 सेंटी मीटर रखी जाती है। स्टीविया के पौधे को जून और दिसंबर के अलावा किसी भी महीने में लगाए जा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार स्टीविया के पौधे फरवरी- मार्च में लगाना सबसे अच्छा माना जाता है।
स्टीविया की खेती में व्यय और लाभ का गणित

एक एकड़ में स्टीविया के 40,000 पौधे लगते हैं, जिसमें करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है। जमीन के छोटे हिस्से में भी स्टीविया की खेती आसानी से की जा सकती है। स्टीविया की खेती करने से किसान को लागत से पांच गुना तक अधिक कमाई हो सकती हैं। गन्ना, गेहूं, या अन्य मोटा अनाज की तुलना में किसान स्टीविया की खेती से कई गुना अधिक रकम कमा सकते हैं। स्टीविया के एक पौधे से एक बार में 120 से 140 रुपये तक की कमाई आसानी से हो जाती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।