
संकर धान उत्पादन प्रमुख बाधाएं एवं रणनीतियां Publish Date : 05/05/2026
संकर धान उत्पादन प्रमुख बाधाएं एवं रणनीतियां
डॉ.शालिनी गुप्ता, डॉ. आर. एस. सेंगर
भारतवर्ष कृषि प्रधान देश है। हमारे देश, प्रदेश में आजीविका का प्रमुख साघन कृषि है। धान विश्व की तीन महत्वपूर्ण खाद्यान फसलों मे से एक है, जोकि 2.7 बिलियन लोगों का मुख्य भोजन है। इसकी खेती विश्व में लगभग 150 मिलियन हेक्टेयर एवं एशिया में 135 मिलियन हेक्टेयर में की जाती है। भारतवर्ष में लगभग 44 मिलियन हेक्टेयर में धान की खेती विभिन्न परिस्थितियों सिंचित, असिंचित, जल प्लावित, असिंचित, उसरीली एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में की जाती है। विभिन्न परिस्थितियों अर्थात् अनुकूल सिंचित एवं विषम परिस्थतियों हेतु धान की उच्च उत्पादकता वाली संकर प्रजातियों के विकास पर बल दिए जाने की आवश्यकता है। सर्वप्रथम संकर प्रजातियों के विकास का कार्यक्रम चीन में वर्ष 1964 में आरम्भ हुआ। पिछले 20 वर्षों से अथक प्रयासों के उपरान्त विकसित संकर प्रजातियों से सामान्य प्रजातियों के सापेक्ष 15.2 प्रतिशत अधिक उत्पादन प्राप्त हो रहा है। क्योंकि इनमें उपलब्ध संकर ओज एवं प्रभावी जड़तंत्र, सूखा एवं मृदा लवणता के प्रति मध्यम स्तर का अवरोधी होता है। संकर प्रजातियों से कृषक कम क्षेत्रफल में सीमित संसाधनों से सफल विविधीकरण द्वारा आच्छादित है।
संकर किस्में दो विभिन्न आनुवांशिक गुणों वाली प्रजातियों के नर एवं मादा के संयोग/संसर्ग/संकरण से विकसित की जाती है, इनमें पहली पीढ़ी का ही बीज नई किस्म के रूप में प्रयोग किया जाता है क्योंकि पहली पीढ़ी में एक विलक्षण ओज क्षमता पायी जाती है, जो सर्वोत्तम सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक उपज देने में सक्षम होती है, ध्यान रहे कि अगली पीढ़ी में उनके संकलित गुण विघटित हो जाने के कारण ओज क्षमता में बहुत ड्रास होता है, तथा पैदावार कम हो जाती है। परिणमतः संकर बीज किसानों को हर साल खरीदना पड़ता है।
संकर धान की प्रमुख प्रभेद

पी एच बी 71-: इसका दाना सीचिंत लम्बा, पकने की अवधि 135 से 140 दिन, मध्यम सीचिंत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त एवं औसत पैदावार 75 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
के आर एच 2:- इसका दाना लम्बा, पकने की अवधि 135 से 140 दिन, मध्यम सीचिंत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त एवं औसत पैदावार 70 से 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है।
एराईज 6444- इसका दाना लम्बा, पकने की अवधि 135 से 140 दिन, मध्यम सीचिंत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त एवं औसत पैदावार 80 से 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है।
पूसा आर एच 10 (सुगंधित):- इसका दाना लम्बा पतला, पकने की अवधी 115 से 120 दिन मध्यम सीचिंत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त एवं औसत पैदावार 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है।
एराईज 6201:- इसका दाना लम्बा पतला, पकने की अवधी 125 से 130 दिन, मध्यम सीचिंत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त एवं औसत पैदावार 60 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है।
ईण्डाम 100001:- इसका दाना लम्बा पतला, पकने की अवधि 115 से 120 दिन, मध्यम सीचिंत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त एवं औसत पैदावार 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है।
संकर धान की खेती में सावधानियां
संकर धान का बीज एक ही फसल उत्पादन के लिए प्रयोग में लाया जाता है। संकर धान की फसल से प्राप्त बीज को दूसरे वर्ष इसलिए नही प्रयोग में लाया जात है। क्योंकि दूसरे वर्ष इसकी पैदावार पहले की अपेक्षा कम हो जाती है। दूसरे साल प्रति बाली दानों की संख्या में कमी भी हो जाती हैं, परिणाम स्वरूप उपज मेंकमी आ जाती हैं। चूंकि संकर धान की उत्तम खेती हेतु मात्र 15 18 किग्रा. बीज/हेक्टेयर प्रयोग किया जाता है। अतः नर्सरी प्रबन्धन नितान्त आवश्यक है।
संकर धान के विकास में बाधाएं प्रौद्योगिकी बाधाएं
देश में संकर धान के प्रजनन में बहुत अच्छी प्रगति के बावजूद अभी भी कई मुद्दों का समाधान किया जाना है। जैसे की-
सीमांत विषमता:- उच्च उत्पादक धान उगाने वाले राज्यों में उच्च उपज वाली अंतरजातीय किस्मों पर संकर का उपज लाभ केवल 10-15 प्रतिशत तक होता है जो कि कृषक समुदाय के लिए आर्थिक रूप से आकर्षक नहीं है।
संकीर्ण आनुवंशिक आधार:- सभी जारी संकर एकल साइटोप्लाज्मिक स्त्रोत पर आधारित है जो किसी भी बड़े जैविक तनाव के प्रकोप के लिए प्रवण हो सकते हैं।
विविध उपभोक्ता वरीयताएं:: भारत में अनाज की गुणवत्ता की प्राथमिकताएं अत्यधिक क्षेत्र-विशिष्ट है, और विविध की गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संकर विकसित करना एक कठिन काम है।
विलम्ब अवधि में बहुत कम संकर और प्रतिकूल पारिस्थितिकी के लिए संकरों का सीमित विकल्प:
तटीय क्षेत्रों के लिए लंबी अवधि के संकर क्षेत्र, बोरो पारिस्थिकी और लवणीय क्षारीय मिट्टी के लिए उपयुक्त संकर उपलब्ध नहीं है।
प्रमुख कीटों के लिए पैतृक वंशकी संवेदनशीलता: पैतृक वंश और संकर प्रमुख जैविक तनावों और फाल्स स्मट जैसी छोटी बीमारियों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं जो संकर धान की खेती के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
सामाजिक और आर्थिक बाधाएं
उच्च बीज लागत बड़े पैमाने परअपनाने के लिए एक प्रमुख बाधा है, और इसलिए बीज लागत को कम करने के लिए संकर धान बीज उत्पादन में बीज की उपज बढ़ानें की आवश्यकता है। कम बाजार मूल्य की पेशकश और मिल मालिकों/व्यापारियों द्वारा संकर धान की उपज के खिलाफ भेदभाव कई किसानों के लिए संकर धान की खेती करने के लिए एक निवारक के रूप में कार्य कर रहा है। संकरों के खिलाफ मूल्य भेदभाव का कारण धान की कम प्रतिशतता की आशंका है। सार्वजनिक नस्ल के संकरोंके गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन और आपूर्ति के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र का अभाव और बड़े संकर धान चावल बीज उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र के बीज निगमों की भागीदारी न्यूनतम रही है।
हाल के वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान के लिए अपर्याप्त धन सहायता भी हाइब्रिड धान अनुसंधान में धीमी प्रगति के कारणों में से एक है।
नीतिगत बाधाएं
संकर बीज लागत पर कोई एक समान सब्सिडी घटक नहीं है, जो अलग- अलग राज्यों में भिन्न होता है। असूचित संकर अकेले बीज लागत पर सब्सिडी के लिए पात्र है, निजी क्षेत्र से कई अच्छे, सत्य लेबल वाले संकरों को अपनाने को प्रतिबंधित है। नए संकरों को लोकप्रिय बनाने के लिए केंद्रित विस्तार रणनीति का अभाव है।
संकर धान के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रणनीतियां अनुसंधान रणनीतियां
संकर धान के विकास पर अनुसंधान प्रयासों को तेज करने के लिए पर एक विस्तारित नेटवर्क परियोजना लागू किया जाना चाहिए। मुख्यतः पैतृक वंश के विकास जो अत्यधिक विशम संकर धान पैदा कर सकता है। हेटेरोटीक जीन पूल का विकास संकर धान के विकास में तलाशने की जरूरत है।
सीएमएस स्त्रोतों का विविधीकरणः- संकर बीज उत्पादन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्त्रोतों की पहचान और एक्सपोजर दौरों और प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से मानव संसाधन विकसित करने के आवश्यकता पर ध्यान देना होगा।
बीज उत्पादन रणनीतियां
बीज की पैदावार बढ़ाने के लिए बीज उत्पादन तकनीक को परिष्कृत करने की आवश्यकता है, ताकि संकर धान के बीज की लागत को कम किया जा सके। सार्वजनिक क्षेत्र में बीज एजेंसियों गैर सरकारी संगठनों, और किसान सहकारी समितियों के साथ-साथ निजी बीज क्षेत्र की भागीदारी से आने वाले वर्षों में संकर बीज की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है, ब्रीडर, फाउंडेशन और प्रमाणित बीज के उत्पादन और आपूर्ति के लिए मौजूदा संस्थागत तंत्र को मजबूत करना होगा। राष्ट्रीय बीज निगम और राज्य बीज निगमों को आपूर्ति के लिए मौजूदा संस्थागत तंत्र को मजबूत करने की आवश्कता है।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण रणनीतियां
संकर धान प्रौद्योगिकी का अनुसंधान केन्द्रों से किसानों के खेत में स्थानांतरण उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि संकर विकसित करना। विस्तार एजेंसियों को विभिन्न नवीन रणनीतियों के माध्यम से संकर धान की खेती के लाभों के बारे में किसानों के बीच आवश्यक जागरूकता पैदा करने में अधिक भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
नीतिगत विकल्प
देश में संकर धान अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त विता पोषणसहायता और मानव संसाधन प्रदान करने पर अधिक बल दिए जाने की आवश्यकता है। देश के विभिन्न हिस्सों में संकर धान की खेती से जुड़े अनुबंध कृषि मॉडल को प्रोत्साहित करना होगा और प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के बीच एक मजबूत इंटरफेस प्रदान करना होगा।
अतः नई पीढ़ी के संकर धान पहले से उपलब्ध कई कमियों से रहित हैं और कई पाइपलाइन में हैं। नई पौधों की किस्मों की बनाने की आवश्यकता है। संकर धान के अनुसंधान और विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के पक्ष में सार्वजनिक नीति हाइब्रिड प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए तेजी से प्रगतिशील कृषक समुदाय गुणवत्ता वाले बीज का उत्पादन और आपूर्ति करने की सिद्ध क्षमता के साथ बड़े और जीवंत बीज उधोग को लगाने की आवश्यकता है, साथ-साथ अधिसूचित संकर धान के लिए बीज लागत पर सब्सिडी की व्यवस्था होनी चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
