
ड्रिप सिंचाई क्या है और क्या हैं इसके लाभ Publish Date : 30/04/2026
ड्रिप सिंचाई क्या है और क्या हैं इसके लाभ
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
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ड्रिप सिंचाई पद्वति मात्र पाइप और नलियाँ ही नहीं, बल्कि यह भरपूर उत्पादन का एक असली विज्ञान भी है।
वर्तमान समय में कृषि कार्य हेतु पानी की कमी और मजदूरों की बढ़ती समस्या के समय में ड्रिप इरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचन प्रणाली) ही किसान का सबसे बड़ा साथी और समय की मांग है। लेकिन कई किसान भाई ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगवा लेने के बाद भी सही जानकारी के अभाव में इसका पूरा लाभ नहीं ले पाते। बूंद-बूंद सिंचाई करने का मतलब सिर्फ पानी को बचाना ही नहीं, बल्कि फसल को सही समय पर और सही मात्रा में पानी व खाद उपलब्ध कराने से सम्बन्धित है।
1. स्मार्ट पानी और खाद प्रबंधन (Fertigation)
फसल को उसकी आवश्यकता से अधिक पानी देने के के स्थान पर पौधों की जड़ों के पास थोड़ा-थोड़ा पानी देना सबसे अधिक लाभ प्रदान करने वाला होता है। इस प्रक्रिया से मिट्टी में नमी का उचित स्तर बना रहता है और पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा भी मिलती रहती है। महंगी घुलनशील खाद हमेशा वेंचुरी या फर्टिलाइजर टैंक से ही देना उचित रहता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से पानी की प्रत्येक बूंद के साथ खाद भी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचती है और इससे खाद दुरूप्योग नहीं होता और खाद की बचत भी होती है तथा अंततः किसान की आय में वृद्वि होती है।
2. प्रेशर का सही गणित

अगर आखिरी ड्रिपर तक पानी नहीं पहुंच रहा, तो मुख्य कारण होता है कम प्रेशर का होना। फसल की मेन लाइन में हमेशा 2 किलो प्रेशर को बनाकर रखेंगे, तभी आखिरी ड्रिपर तक लगभग 1 किलो दबाव पहुंच पाता है। इसलिए सही प्रेशर होने पर सभी ड्रिपर से पानी समान मात्रा में निकलता है और पौधों को पर्याप्त रूप से प्राप्त होता है।
3. तकनीकी रखरखाव एवं देखभाल
- सबमेन पाइप को खेत के बीच में ही रखें।
- बोरवेल के पानी के लिए स्क्रीन फिल्टर का उपयोग करें।
- नहर/तालाब के पानी के लिए सदैव सैंड फिल्टर का प्रयोग करें।
- सप्ताह में 1 बार फ्लश वाल्व को खोलकर उसकी सफाई आवश्यक रूप से करें।
4. अनुकूल पाइप और ड्रिपर का चयन करना

- 200 फुट तक = 16 mm पाइप उचित रहता है।
- 200 फुट से अधिक = 20 mm पाइप उचित रहता है।
- ढलान वाली जमीन के लिए इनलाइन ड्रिपर का उपयोग करना चाहिए।
- बागवानी फसलों के लिए आउटलाइन ड्रिपर प्रयोग करना चाहिए।
सही तकनीक और नियमित देखभाल से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत और खाद का बेहतर उपयोग अर्थात अधिक उत्पादन की सम्भावना का बढ़ जाना।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
