
गन्ने की पेड़ी फसल के बेहतर विकास के लिए आवश्यक Publish Date : 22/04/2026
गन्ने की पेड़ी फसल के बेहतर विकास के लिए आवश्यक
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
गन्ने की पेड़ी फसल (Ratoon) में पहली खादः IISR लखनऊ के वैज्ञानिकों के सुझाव के अनुसार-
किसान भाइयों, पेड़ी गन्ने की फसल से ‘पौधा गन्ना’ जैसी पैदावार प्राप्त करने का रहस्य उसकी पहली खाद देने के हिसाब में ही छिपा होता है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) के वैज्ञानिकों के अनुसार, पेड़ी को शुरुआती विकास के लिए अधिक मात्रा में पोषण चाहिए होता है। इसलिए फसल की उत्तम वृद्वि एवं पोषण के लिए उचित मात्रा में खाद का प्रयोग करना बहुत आवश्यक होता है।
पहली खाद देने का सही समयः

पेड़ी गन्ने में पहली खाद कटाई के तुरंत बाद यानी 15 से 30 दिनों के भीतर खाद दे देनी चाहिए। हालांकि यह भी याद रखना चाहिए, कि पेड़ी की जड़ें पहले से तैयार होती हैं, इसलिए फसल को तुरंत पोषण की जरूरत होती है।
पहली खाद का सही मिश्रण (प्रति एकड़):
बेहतर फुटाव और कल्लों की संख्या बढ़ाने के लिए नीचे दी गई मात्रा का प्रयोग किया जाना चाहिएः
यूरिया (Nitrogen): 60-65 किलोग्राम (सवा कट्टा) - फसल की तेजी से बढ़ोतरी करने के लिए।
DAP (Phosphorus): 50 किलोग्राम (1 कट्टा) - जड़ों की मजबूती के लिए।
पोटाश (MOP): 25-30 किलोग्राम - बीमारियों से लड़ने और तने की मजबूती के लिए।
कीट सुरक्षा (कंसुआ का नियंत्रण):
पेड़ी में शुरुआती काल के दौरान ‘कंसुआ’ को रोकने के लिए खाद के साथ 8-10 किलो फिप्रोनिल (0.3% GR) अवश्य ही मिलाना चाहिए।
खाद डालने की ‘वैज्ञानिक विधि’:-
1. ठूंठ प्रबंधनः कटाई के बाद जमीन के बराबर से ठूंठ की छंटाई आवश्यक रूप से करनी चाहिए।
2. जड़ों की कटाईः लाइनों के पास हल्की जुताई भी करना आवश्यक हैं ताकि पुरानी जड़ें कटें और नई जड़ों को पर्याप्त मात्रा में खाद प्राप्त हो सके।
3. मिट्टी में दबाएं: खाद को ऊपर छिड़कने के बजाय मिट्टी के नीचे 5-7 सेमी तक की गहराई में दबाएं और तुरंत बाद एक हल्की सिंचाई अवश्य करें।
पेड़ी गन्ने को पौधा गन्ना के मुकाबले 25 प्रतिशत तक अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, इसलिए यूरिया की मात्रा में कटौति भी नहीं करनी चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
