
राई की खेती की वैज्ञानिक विधि से करें किसान Publish Date : 09/01/2026
राई की खेती की वैज्ञानिक विधि से करें किसान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
भारत में राई की फसल का रबी तिलहनी फसलों में एक विशेष स्थान है और राई का रबी तिलहनी फसलों में प्रमुख स्थान है। जिन क्षेत्रों में कम वर्षा की स्थिति में धान की खेती सम्भव नहीं हो पाती है उन खाली खेतों में राई की अगेत खेती कर खरीफ फसलों की भरपाई की जा सकती है। राई का दाना छोटा व काला होता है, छोटी-छोटी गोल-गोल राई लाल और काले दानों में अक्सर मिल जाती है। हालांकि विदेशों में सफेद रंग की राई भी मिलती हैं। राई के दाने सरसों के दानों से काफी मिलते जुलते होते हैं। बस, राई सरसों की तुलना में थोड़ी छोटी होती है। राई के बीजों का तेल भी निकाला जाता है। राई की खेती सीमित सिंचाई की दशा में अधिक लाभदायक होती है।
बुवाई का समय
राई की बुवाई का उचित समय सितम्बर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह हैं।
बीज की दूरी
राई की बुवाई के लिए पंक्ति से पंक्ति के बीच की दूरी 30 से.मी. और पौधे से पौधे के बीच की दूरी 10 से 15 से.मी. तक रखनी चाहिए। राई की बुवाई के लिए पंक्तियों की दूरी 45 से.मी. और पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखनी चाहिए।
बीज की गहराई
राई के बीज की बुवाई 4-5 से.मी. की गहराई पर करनी चाहिए।
बुवाई का तरीका
बुवाई के लिए बुवाई वाली मशीन का ही प्रयोग करना उचित रहता है।
बीज की मात्रा
बीज की मात्रा 1.5 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। बुवाई के 3 सप्ताह बाद कमज़ोर पौधों को निकाल कर नष्ट कर देना चाहिए और स्वस्थ्य पौधों को खेत में बने रहने दें।
बीज का उपचार
बीज को मिट्टी के अंदरूनी कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए बीजों को 3 ग्राम थीरम से प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।
खाद एवं उर्वरक
राई की खेती के लिए खेत की तैयारी के समय अच्छे प्रकार से सड़ी हुई गोबर की खाद 7-12 टन/एकड़ की दर से मिट्टी में अच्छी तरह से मिला देना चाहिए। खादों के सही प्रयोग के लिए मिट्टी की जांच करवानी जरूरी है। राई की फसल में 40 किलो नाइट्रोजन (90 किलो यूरिया), 12 किलो फासफोरस (75 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और 6 किलो पोटाश्यिम (10 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) प्रति एकड़ की दर से डालें।
कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सारी खाद बुवाई से पहले डालें। राई की फसल के लिए खाद की आधी मात्रा बुवाई से पहले और आधी मात्रा पहला पानी लगाते समय डालें। ध्यान रहे रासायनिक उर्वरक मिट्टी परिक्षण के आधार पर ही प्रयोग करना उचित रहता है।
खरपतवार नियंत्रण
राई की खेती में खरपतवार की रोकथाम के लिए 15 दिनों के फ़ासलो में 2-3 निराई-गुड़ाई करें।
सिंचाई
फसल की बुवाई सिंचाई के बाद करें। अच्छी फसल लेने के लिए बुवाई के बाद तीन हफ्तों के फासले पर तीन सिंचाइयों की जरूरत होती है। ज़मीन में नमी को बचाने के लिए जैविक खादों का अधिक प्रयोग करें।
कटाई एवं गहाई

फसल अधिक पकने पर फलियों के चटकने की आशंका बढ़ जाती है। अतः पौधों के पीले पड़ने एवं फलियां भूरी होने पर फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। फसल को सूखाकर थ्रेसर या डंडों से पीटकर दाने को अलग कर लिया जाता है। बीजों को सुखाने के बाद बोरियों में या ढोल में डालें। और नमी रहित स्थान पर भण्डारित करें।
उत्पादन
राई की उपरोक्त उन्नत तकनीक द्वारा खेती करने पर असिंचित क्षेत्रो में 15 से 20 क्विंटल तथा सिंचित क्षेत्रो में 20 से 30 क्विंटल प्रति हैक्टेयर दाने की उपज प्राप्त हो जाती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
