
गन्ने के बीज का फंगीसाइड्स से उपचार से लाभ Publish Date : 30/12/2025
गन्ने के बीज का फंगीसाइड्स से उपचार से लाभ
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
गन्ना बोने से पहले गन्ने के बीज का हेक्सास्टॉप/रोको Fungicide, ईमिडाक्लोर प्रीड और ईथाफोन द्वारा बीज उपचार करने से प्राप्त होने वाले लाभ-
1. गन्ने का जमाव अधिक और जल्दी होता हैं वहीं कल्ले भी अधिक और जल्दी निकलते हैं।
2. कम तापमान अथवा ठंड में भी गन्ने गन्ने का जमाव जल्दी और अधिक होता हैं।
3. गन्ने में लगने वाली बीमारियों जैसे रेड रॉट, विल्ट/सूखा रोग, टॉप रॉट, रूट रॉट, ग्राशीप्रारोह/जीएसडी एवं पोक्का बोइंग इत्यादि बीमारी नहीं लगती हैं।
4. बीज उपचार करने से गन्ने में लगने वाले चूषक कीट मिलीबग, स्केल इंसेक्ट, थ्रिप्स, और काटने चबाने वाले कीट जैसे बड़वा कीट, अर्ली शूट बोरर, तन छेदक इत्यादि की सुंडी, लार्वा अथवा पुएपा बीज उपचार करते समय मर जाते है।
5. गन्ने का बीज उपचार करने से गन्ने की फसल स्वास्थ्य और गन्ना मोटा होता हैं जिसमें कीट व बीमारियों का प्रकोप नहीं होता हैं और उपचारित खेत की सीड नर्सरी से अगले साल गन्ना बुवाई हेतु उत्तम गुणवत्ता का बीज प्राप्त होता हैं जिससे गन्ने की अगली फसल की भी पैदावार अच्छे जमाव के कारण अधिक होती हैं जिसमें कीट एवं बीमारियों का प्रकोप नहीं होता हैं।
गन्ने में जड़ बेधक रोग:-

गन्ने के जिन पौधों में जड़ बेधक लगा हुआ होता है। उनकी जड़ के ऊपरी पोरियाँ में छोटे-छोटे छिद्र दिखाई देते हैं, और पोरी के अंदर भाग पर बारूदे जैसा बीट भरा रहता है। रोग ग्रसित भाग लाल रंग का दिखाई पड़ता है। इस रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियां धीरे-धीरे पीली होकर सूखने लगती है। पौधे की ग्रोथ रुक जाती है। यह रोग आपकी गन्ने की फसल में किसी भी समय लग सकता है। इस रोग के नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफॉस 20% ई.सी 2 लीटर प्रति एकड़ और क्विनालफॉस 25 ई.सी 2 लीटर प्रति एकड़ को आपस में मिलाकर पानी के साथ जड़ों में डालें।
दूसरा आप बाइफेंथ्रिन 10% ईसी 2 लीटर प्रति एकड़ और साथ में क्लोरपाइरीफोस 50%+ साइपरमेथ्रिन 5% ईसी 2 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से भी पानी के साथ खेत में चला दे।
इसके बाद आप कार्बोफ्यूरान 3% सीजी 12 से 15 किलोग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग भी कर सकते हैं। इससे sugarcane rootboror, कीट और रोग आदि का प्रभावशाली नियंत्रण कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
