गन्ने के साथ सहफसली खेती कर दोहरा लाभ उठाएं      Publish Date : 29/12/2025

          गन्ने के साथ सहफसली खेती कर दोहरा लाभ उठाएं

                                                                                                                                                        प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

गन्ना देश की एक प्रमुख नकदी फसल है, जिससे बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका चलाते हैं। देश में कृषि योग्य भूमि के एक बड़े हिस्से पर गन्ने की खेती की जाती है और अच्छी आमदनी के कारण इसका रकबा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इसके साथ इंटरक्रॉपिंग सिस्टम अपनाएं, तो गन्ने से होने वाली आय को दोगुना या उससे भी अधिक भी किया जा सकता है।

विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के द्वारा की गई एक स्टडी में यह सामने आया कि क्षेत्र के अधिकांश किसान या तो इंटरक्रॉपिंग नहीं कर रहे हैं या फिर ऐसी फसलें उगा रहे हैं, जिनसे बहुत कम मुनाफा होता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने गन्ने के साथ उड़द की इंटरक्रॉपिंग का सुझाव दिया।

वैज्ञानिक परीक्षण से साबित हुआ लाभ

                                                               

गहन शोध के बाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने एक हेक्टेयर भूमि पर चार बार ट्रायल और परीक्षण किए। इन परीक्षणों के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे। इसके बाद इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए किसानों की भूमि को चुना गया। किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, बीज उपचार और फसल प्रबंधन की पूरी जानकारी दी गई।

इंटरक्रॉपिंग में अपनाई गई तकनीक

इंटरक्रॉपिंग सिस्टम के तहत कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी उपाय अपनाए गए, जैसे- बीजों का ट्राइकोडर्मा/5 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचार, उड़द की फसल में फली छेदक कीट नियंत्रण के लिए एंडोसल्फान 0.2 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव, मिट्टी में बायो-फर्टिलाइजर का संतुलित उपयोगए उड़द की बुवाई के 30 दिन बाद पहली सिंचाई की गई, जबकि दूसरी और तीसरी सिंचाई 10-10 दिन के अंतराल पर की गई।

किसानों की बढ़ी कमाई, सामने आए सकारात्मक परिणाम

इस इंटरक्रॉपिंग मॉडल से औसतन 4.70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उड़द का उत्पादन हुआ। सबसे बेहतर परिणाम प्रतीतपुरा गांव के किसान हरद्वारी लाल को मिले, जिन्होंने 5.70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया। इस प्रयोग से किसानों को 5,500 से 10,750 रुपए प्रति हेक्टेयर तक अतिरिक्त आय हुई। इस तरह उनका आय-खर्च अनुपात 1:4.07 दर्ज किया गया। इसके अलावा कई किसानों ने बताया कि इंटरक्रॉपिंग से न केवल उड़द की अतिरिक्त आमदनी हुई, बल्कि गन्ने की पैदावार में भी सुधार देखने को मिला।

इंटरक्रॉपिंग के लाभ

                                                                  

अतिरिक्त आयः उड़द जैसी दलहनी फसल कम समय में तैयार होकर जल्दी पैसा देती है।

मिट्टी की उर्वरताः उड़द नाइट्रोजन फिक्स करती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है

जमीन का बेहतर उपयोगः एक ही खेत से दो फसलों का लाभ मिलता है।

जोखिम कमः एक फसल खराब होने पर दूसरी से आय मिलती है।

कैसे करें इंटरक्रॉपिंग

बसंत में लगाए गए गन्ने के साथ उड़द की बुवाई करें। इसका अनुपात इस प्रकार रखें कि 1 पंक्ति गन्ना और 2 पंक्ति उड़द (2:1) या 3:2 अनुपात हो। गन्ना लंबा होने से पहले उड़द की कटाई कर लें। यही नहीं गन्ने के साथ अन्य फसलें भी उगाई जा सकती हैं जिसमें बसंत काल में मूंग, मक्का, ज्वार, प्याज, आलू, खीरा की खेती की जा सकती है। वहीं पतझड़ काल में लहसुन, मटर, राजमा की खेती कर सकते हैं।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी तरीका है इंटरक्रॉपिंग

गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बेहद प्रभावी तरीका साबित हो रहा है। इंटरक्रॉपिंग करने वाले किसानों का अनुभव बताता है कि सही तकनीक और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान न केवल अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं, बल्कि भोजन और पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं। यह मॉडल अन्य गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।