
जनवरी में गेहूं की बुवाई करने लिए अपनाने योग्य कुछ अच्छी किस्में Publish Date : 21/12/2025
जनवरी में गेहूं की बुवाई करने लिए अपनाने योग्य कुछ अच्छी किस्में
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
क्या आप जनवरी माह में गेहूं की बुवाई करना चाहते है तो हम आपको जानकारी दे रहे है गेहूँ की ऐसी कुछ किस्मों है के बारे में जो आपके लिए लाभकारी सिद्व हो सकती है।
देश के विभिन्न हिस्सों में दिसंबर महीने के अंत तक गन्ने और धान की देर से कटाई या मौसम की मार के कारण गेहूं की समय पर बुवाई नहीं हो पाती है। ऐसे में गेहुँ की बुवाई करने के लिए जनवरी का महीना किसानों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस चुनौती का सामना किसान सही किस्मों का चुनाव कर गेहूँ अच्छी पैदवार प्राप्त कर सकते हैं।
किसान भाई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित गेहूं की इन किस्मों पीबीडब्ल्यू 550, डीबीडब्ल्यू 234, एचडी 3086, डीबीडब्ल्यू 316, एचआई 1634 की बुवाई कर गेहूँ की खेती करते हैं, तो वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
पीबीडब्ल्यू 550

गेहूं की यह किस्म गन्ने की कटाई के बाद बुवाई के लिए उपयुक्त मानी जाती है। साथ ही गेंहू की यह किस्म किसानों को अच्छी उपज देने वाली एक सक्षम किस्म है, जिससे किसान औसतन 22-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की पैदावार प्राप्त कर सकते हैं और इस किस्म की विशेष बात तो यह है कि यह कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम है।
DBW 234
DBW 234 देर से बुवाई करने के लिए यह एक भरोसेमंद किस्म मानी जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म कम सिंचाई में भी संतोषजनक परिणाम देती है। यही कारण है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में किसान इस किस्म को तेजी से इसलिए अपना रहे हैं, क्योंकि यह किस्म 126-134 दिनों में तैयार होकर किसानों को 35-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार देने में सक्षम है और अनुकूल परिस्थितियों में साथ ही इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी बताई जाती है, जिससे फसल का जोखिम भी काफी कम हो जाता है।
एचडी 3086
गेहूं की यह किस्म अपने उच्च उत्पादन के लिए जानी जाने वाली एक विशेष किस्म है। ऐसे में देश के पंजाब, हरियाणा, यूपी और एमपी आदि राज्यों के किसान इस किस्म की बुवाई करते हैं, तो वह इस फसल से 140-145 दिनों के भीतर 81 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही गेंहू की यह किस्म अपने दानों की गुणवत्ता के कारण किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है क्योंकि बाजारों में भी इसकी मांग लगातार बनी रहती है।
DBW 316
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे क्षेत्रों के लिए ICAR द्वारा अनुशंसित यह किस्म देर से बुवाई के लिए उपयुक्त है। इन राज्यों में अक्सर धान की कटाई देर से होती है, जिससे गेहूं की बुवाई जनवरी तक खिसक जाती है। क्ठॅ 316 ऐसी परिस्थितियों में यह किस्म 68 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन प्रदान करती है और इस किस्म में उच्च पोषण मूल्य (प्रोटीन और जिंक) के चलते इसे बाजार में अधिक मूल्य दिला सकता है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है।
एचआई 1634

मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के किसानों के लिए एचआई 1634 एक अच्छी किस्म मानी जाती है। इसे समय पर या थोड़ी देर से भी बोया जा सकता है। इस किस्म की विशेषता यह है कि यह गर्मी को अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से सहन कर लेती है और इस किस्म से किसान भाई औसत उपज लगभग 51.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
