गन्ने की फसल से रस चूसने वाले प्रमुख कीट एवं उनका प्रबन्धन      Publish Date : 11/12/2025

    गन्ने की फसल से रस चूसने वाले प्रमुख कीट एवं उनका प्रबन्धन

                                                                                                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

पायरिला (पायरिला परपुसिला):

लक्षण एवं पहचानः

पायरिला के शिशु (निम्फ) तथा व्यस्क दोनों ही गन्ने की पत्तियों की निचली सतह या पौधों के मुलायम भाग से रस चुसते हैं तथा हनी ड्यू के रूप में मीठे तरल पदार्थ का उत्सर्जन करते हैं जो निचली पत्तियों की ऊपरी सतह पर गिरता है और इससे पत्तियों की ऊपरी सतह चिपचिपी हो जाती है। यदि इन अवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाए तो ग्रस्त पत्तियों के ऊपर काले रंग की फफूंदी विकसित हो जाती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित हो जाती है और पत्तियाँ पीली पड़ने लगती है।

व्यस्क कीटः यह भूरे रंग के होते हैं, जिनके मुखाँग चोंच की तरह से आगे की ओर निकले रहते हैं। इसकी मादा कीट, आकार में नर कीट से बड़ी होती है और उसके उदारांत पर सफेद रंग के रोये होते हैं, इनके द्वारा ही वह अपने अंड़ों को ढकती है।

अंड़ाः इस कीट की मादा हल्के हरे रंग के अंडे पत्तियों की निचला सतह पर मध्य सिरा के समानान्तर देती है तथा उन्हें अपने उदरांत स्थित सफेद रोयों से ढक लेती है जिससे यह अंड समूह सफेद रूई के फाबे की तरह से दिखाई देते हैं।

शिशुः कीट के शिशु गुलाबी सफेद रंग के होते हैं और इनके शरीर पर सफेद चूर्णनुमा परत होती है। उदरांत से दो पूँछनुमा रचनाएं निकली रहती हैं। इनकी आँखें लाल रंग की होती हैं और यह भी सामान्यतः पत्ती की निचली सतह पर ही रहते हैं। इस कीट का आक्रमण फरवरी के माह से लेकर नवम्बर के माह तक होता है।

प्रबन्धनः

  • गर्मी के महीनों में अर्थात फरवरी से लेकर जून तक जिन पत्तियों पर अण्ड़ समूह लगे हों उन्हें एक निश्चित अन्तराल पर निकालकर नष्ट करते रहना चाहिए।
  • यदि कीट का आक्रमण जुलाई-अगस्त के महीने में अधिक हो तो कीटनाशी रसायना जैसे क्वीनॉलफॉस 25 ई.सी. का 1.0-1.2 लीटर को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए।
  • जुलाई-अगस्त माह के दौरान खेत की निगरानी करते हुए देखना चाहिए कि इस कीट के निम्फ एवं व्यस्क परजीवी कीट इपिरिकेनिया मेलानोल्यूका की उपस्थिति है अथवा नहीं। यदि नही तो 4000-5000 कोकून तथा 4-5 लाख अंडे बहुतायत वाले स्थानों से ला कर प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में छिड़काव करना चाहिए।
  • यदि परजीवी कीट खेतो में उपस्थित हो तो कीटनाशी रसायन प्रयोग न करें।

शल्क कीट (मिलानोएस्पिस ग्लोमेराटा):

लक्षण/पहचान

  • यह कीट गन्ने की पोरियों पर चेचक की तरह से दिखाई देता है। मादा कीट गन्ने पर स्थित होकर रस चूसती है तथा अपने ऊपर एक आवरण बना लेती है और इसी आवरण को शल्क कहते हैं।
  • इस कीट की कई प्रजातियाँ गन्ने को प्रभावित करती है, परन्तु इनमें से मिलानोएस्पिस ग्लोमेराटा बहुतायत में गन्ने पर पाया जाता है।

प्रबन्धनः

  • बीज के लिए ऐसे खेत एवं गन्ना टुकड़ों में चयन करना चाहिए, जिससे इस कीट का प्रकोप न होने पाए।
  • भाकृअनुप- भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के द्वारा विकसित शल्क कीट की प्रबन्धन प्रणाली को अपनाएं।
  • इस कीट के परजीवी कीटों का संरक्षण करना चाहिए। जब परजीवी कीटों की सक्रियता खेती में अधिक हो तो कीटनाशी रसायनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • प्रतिरोधी किस्मों को अपनाने में प्राथमिकता देनी चाहिए।

सफेद मक्खी (एल्यूरोलोबस बैरोडेन्सिस):

                                                                      

  • गन्ने में प्रमुख रूप से तीन मक्खियाँ (एल्यूरोलोबस बैरोडेन्सिस, निऊमोरिक्लया बरजई और निऊमोपिक्लया एंड्रोपगोनी) गन्ने की पत्तियों की निचली सतह से रस चूसती हैं। एल्यूरोलोबस बैरोडेन्सिस पत्तियों की निचली सतह पर काले धब्बे के रूप में दिखाई देती हैं।
  • प्रभावित पौधे की पत्तियाँ पीली पड़कर सूख जाती हैं। इस मक्खी के प्रकोप के लक्षण अगस्त-सितम्बर के माह में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
  • इस मक्खी से प्रभावित गन्ने की बढ़वार रूक जाती है और इसके साथ ही गुड़ एवं चीनी के परते में कमी दर्ज की गई है।

सफेद मक्खी का प्रबन्धन

  • गन्ने की बुवाई स्वस्थ बीज से ही करनी चाहिए।
  • खेतों से बरसात के पानी के निकास का उचित प्रबन्धन करना चाहिए।
  • इमडिाक्लोप्रिड (17.8 एस. एल.) 500-600 मिली./हे0 की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करना प्रभावी पाया गया है। परजीवी कीटों का संरक्षण करना भी अच्छा उपाय है।
  • खेती में प्रतिरोधी प्रजातियों को अपनाना चाहिए।

वूली एफिड (सिरेटोवेकुना लेनीजेरा):

लक्षण/पहचानः

  • गन्ने की इस कीट की दो अवस्थाएं होती है, कॉलर तथा सेटलर।
  • कॉलर अवस्थाः इस कीट का रंग हरा होता है एवं आकार में एफिडके जैसा होता है।
  • सेटलर अवस्थाः कीट पत्तियों की निचली सतह पर स्थिर होकर पत्तियों का रस चूसते हैं और अपने शरीर पर मोमी चूर्ण विकसित कर लेते हैं, जिसे वूली कहा जाता है।
  • कीट के शिशु एवं प्रोढ़ दोनों ही पत्तियों के रस को चूसते हैं। कीट के अत्याधिक प्रकोप के दौरान ऐसा प्रतीत होता है कि फसल के ऊपर धुंध सी छाई हो और पत्तियों की ऊपरी सतह पर मोमी चूर्ण जमा हुआ रहता है। कभी-कभी यह चूर्ण भूमि की सतह पर भी दिखाई देता है। इस कीट के प्रकोप से फसल पीली पड़ने लगती है और उसकी बढ़वार रूक जाती है। इस कीट के प्रकोप से गन्ने की पैदावार आर चीनी के परते में गिरावट आ जाती है।
  • इस कीट का प्रकोप समान्यतः नवम्बर-दिसम्बर के माह में होता है।

कीट का प्रबन्धनः

  • कीट के तीव्र प्रकोप की अवस्था में कीट से छुटकारा पाने के लिए अन्तः प्रवाही कीटनाशी रसायन जैसे इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस. एल. 500-600 मिली./हे0 का 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
  • डीफा एफिडिवोरा 1000 व्यस्क/हे0 की दर से 15 दिनों के अन्तराल पर फसल में छोड़ देने चाहिए अथवा अन्य परभक्षी कीट माइक्रोमस इगोरोटस के 2000 व्यस्क/हे0 की दर से छोड़ना चाहिए।
  • जिन स्थानों पर इस कीट का प्रकोप बहुत अधिक हो, वहाँ कटाई के बाद फसलों के अवशेषों को निकाल कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • इसके साथ ही कीट प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए।

मिली बग (सेकरीकोकस सैकारी):

लक्षण एवं पहचान

  • मिली बग कीट का शरीर मुलायम तथा सफेद रंग की चूर्णी परत से ढका रहता है। इस परत को ही मिली कहते हैं इसलिए इस कीट को मिली बग कहते हैं। इस कीट की पाँच प्रजातियाँ गन्ने को नुकसान पहुँचाती हैं, लेकिन मुख्य रूप से गुलाबी मिली बग ही गन्ने में लीफ शीथ के नीचे पाया जाता है।
  • यह कीट अपने मुखाँग के द्वारा गन्ने की मुलायम पोरी का रस चूसते हैं।
  • गन्ने में नेक्रोसिस (गलन) जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं और साथ ही मिली बग के द्वारा ग्रसित गन्ने में कवकों का आक्रमण हो जाने से काले रंग के धब्बे बन जाते हैं।

कीट का प्रबन्धन

  • अगस्त-सितम्बर के माह तक गन्ने की सूखी पत्तियों को निकालते रहना चाहिए।
  • कीट प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए।
  • कीट से प्रभावित गन्ने के टुकड़ों की बुवाई नहीं करनी चाहिए, अथवा ऐसे टुकड़ों की बुवाई करने पूर्व इन टुकड़ों को 72 घंटे तक पानी में डुबाकर रखने बाद बुवाई करनी चाहिए।
  • मोनोक्रोटोफॉस 36 एस. एल. 1.5 मिली./है0 की दर से 800 से 100 लीटर पानी में घोल बनाकर इस घोल का छिड़काव करना चाहिए।

काला चिकटा (केवेलेरियस स्वीटी तथा डाइमॉफेप्टिेरस गिब्बस):

लक्षण एवं पहचान

  • यह कीट गर्मियों के महीनों में प्रभावी रहता है और इस कीट की दो प्रजातियाँ (केवेलेरियस स्वीटी एवं डाइमॉफेप्टिेरिस गिब्बस) गनने को नुकसान पहुँचाती हैं।
  • यह कीट गन्ने की लीफशीथ और गन्ने के गोफ से गन्ने का रस चूसते हैं।
  • कीट के अत्याधिक प्रकोप के दौरान गन्ने की पूरी फसल ही पीली पड़ जाती है और गन्ने की बढ़वार भी रूक जाती है।

कीट का प्रबन्धन

  • कीटनाशी रसायन जैसे इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस. एल. 125 मिली./है0 की दर से 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से लाभ प्राप्त होता है।
  • अंड परजीवी यूमायक्रोसोमा को खेतों में छोडत्रकर कीट पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

थ्रिप्स (फलमेकिओला सेराटा):

लक्षण एवं पहचान

  • गर्मियों के महीनों में यह कीट गन्ना गोफ में पाया जाता है।
  • गन्ने के पौधे को यदि हथेली पर हिलाया जाता है तो नौकदार छोटे-छोटे कीट हथेली पर दिखाई देते हैं।
  • गन्ने की पत्तियों में एक विशेष प्रकार की लहर दिखाई देती है, जिसके आधार पर ग्रसित पौधा आसानी से पहचाना जा सकता है।

कीट का प्रबन्धन

  • इस कीट के प्रबन्धन हेतु गर्मियों के महीनों में विशेष रूप से सिंचाई का उचियत प्रबन्धन करना चाहिए।
  • कीटनाशी रसायन जैसे इतिडाक्लोप्रिड 17.8 एस. एल. 125 मिलर./है0 की दर से 600 लीटर पानी में घोलकर इसका छिड़काव करने से कीट का प्रभावी प्रबन्धन होता है।
  • कीट प्रतिरोधी प्रजातियों की बुवाई करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।