
गेहूं की बुवाई में खाद का सही चुनाव करें Publish Date : 17/11/2025
गेहूं की बुवाई में खाद का सही चुनाव करें
डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहलान
बेहतर पैदावार (उपज) पाने के लिए नीचे दिए गए विकल्पों में से किसी एक का चयन करें —
विकल्प 1:
सिंगल सुपर फास्फेट SSP– 3 बैग
यूरिया – 25 किग्रा
म्यूरेट आफ पोटाश MOP – 25 किग्रा
विकल्प 2:
ट्रिपल सुपर फास्फेट TSP – 50 किग्रा
यूरिया – 25 किग्रा
म्यूरेट आफ पोटाश MOP – 25 किग्रा
विकल्प 3:
एन.पी.के.12:32:16 – 1.5 बैग
म्यूरेट आफ पोटाश MOP – 7 किग्रा
विकल्प 4:
एन.पी.के. 20:20:0:13 – 100 किग्रा
म्यूरेट आफ पोटाश MOP – 25 किग्रा
विकल्प 5:
डाई अमोनियम फास्फेट DAP – 1 बैग
म्यूरेट आफ पोटाश MOP – 25 किग्रा
महत्वपूर्ण सलाह:

नोट- अगर गेहूं में केवल 1–2 सिंचाई की व्यवस्था है, तो ऊपर दी गई खाद की मात्रा आधी कर दें।
किसानों के लिए बहुत अच्छी खाद प्रबंधन मार्गदर्शिका (fertilizer guide) है।
पहले पानी पर डालने वाली मुख्य खादें:
1. यूरिया (नाइट्रोजन)
मात्रा:
सिंचित क्षेत्र में – 45 से 50 किलोग्राम प्रति एकड़
असिंचित क्षेत्र में – 25 से 30 किलोग्राम प्रति एकड़
क्यों है जरूरी:
यूरिया पौधों की बढ़वार, पत्तियों की हरियाली और तनों की मजबूती के लिए आवश्यक नाइट्रोजन देता है।
2. डीएपी (DAP - फॉस्फोरस)
मात्रा:
अगर बुवाई के समय पूरी DAP नहीं दी गई थी, तो पहले पानी पर 15 से 20 किलोग्राम प्रति एकड़ दी जा सकती है।
क्यों है जरूरी:
डीएपी पौधों की जड़ों को मजबूत बनाता है और पौधे की शुरुआती वृद्धि में मदद करता है।
3. पोटाश (MOP - म्यूरिएट ऑफ पोटाश)
मात्रा:
10 से 15 किलोग्राम प्रति एकड़
क्यों है जरूरी:
यह पौधों को रोगों से बचाता है, अनाज में दाना भरने की क्षमता बढ़ाता है, और ठंड या सूखे से बचाव करता है।
4. जिंक सल्फेट (Zinc Sulphate)
मात्रा:
10–12 किलोग्राम प्रति एकड़ (21% वाला)
क्यों है जरूरी:
जिंक की कमी से पौधे पीले पड़ जाते हैं और उत्पादन घटता है। इसे पहले या दूसरे पानी में डालना बेहतर रहता है।
सल्फर (Sulphur) – वैकल्पिक
मात्रा:
8–10 किलोग्राम प्रति एकड़
क्यों है जरूरी:
यह गेहूँ के दाने में प्रोटीन बढ़ाता है और फसल को मजबूती देता है।
खाद डालने का तरीका:
1. सिंचाई से पहले खेत में सभी खादें छिड़क कर दें।
2. उसके बाद पानी चलाएं, ताकि खाद नीचे मिट्टी में समा जाए।
3. इससे पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं।
गेहूं (Triticum Aestivum L.):

रवी सीजन की मुख्य फसल धान्य फसलों में महत्वपूर्ण स्थान तथा मुख्यतः शीतोष्ण जलवायु की फसल है।
तापक्रम– गेहूं ठंडे मौसम की फसल है इसके लिए विभिन्न अवस्थाओं पर अलग अलग तापमानों की आवश्यकता पड़ती है। बुवाई के समय न्यूनतम 5°C और अधिकतम 30°C तापमान आवश्यक है।
भूमि– गेहूं की खेती के लिए दोमट भूमि सर्वोत्तम मानी जाती है मटियार एवम रेतेली भूमियों में भी आसानी से खेती की जा सकती है।
प्रजाति– अपने क्षेत्र की लिए संस्तुत प्रजातियों को चुनें।
बीज चुनाव व उपचार– बीज सदैव प्रमाणित हो और आपके क्षेत्र के लिए अनुकूल हो जरूरी है एवम बीज को उपचारित अवश्य करे जिससे स्मट, कंडुआ कीट व्याधि आदि से छुटकारा मिलेगा निश्चित रूप से उत्पादन बढ़ोत्तरी होगी।
उपचार के लिए कारबिंडाजिम/मेंकोजेब 2 ग्राम प्रति किलो की दर से करें।
लेखक: डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहलान, सस्यविद, Ex. Chief Scientist, CSIR-IHBT, Palampur Himachal Pradesh.
