
टर्की टेल मशरूम की खेती से किसान होंगे मालामाल Publish Date : 17/09/2025
टर्की टेल मशरूम की खेती से किसान होंगे मालामाल
डॉ0 गोपाल सिंह एवं प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, टर्की टेल मशरूम स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी सिद्व होती है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते है। यह विशेश रूप से स्तन, फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर की रोकथाम में सहायक होती है।
देशभर के किसानों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है। शिटाके मशरूम की सफलता के बाद, टर्की टेल मशरूम भी अब उन्हें मालामाल करने जा रही है। सोलन स्थित खुंब अनुसंधान निदेशालय ने पहली बार इस औषधीय मशरूम को उगाने की तकनीक तैयार की है और अब इसे किसानों तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। 30 सितंबर को होने वाले राष्ट्रीय मशरूम मेले में इसे प्रदर्शित भी किया जाना है।
खास बात यह है कि इस मशरूम की कीमत बाजार में 20,000 रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल जाती है और इसमें उपलब्ध औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग बहुत अधिक बनी हुई है।

कैंसर रोकथाम में है बेहद कारगर
अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, टर्की टेल मशरूम स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते है। विशेष रूप से मशरूम की यह प्रजाति स्तन, फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर आदि की रोकथाम करने में सहायक सिद्व होती है।
शोध में यह भी साबित हुआ है कि इसका सेवन कीमोथैरेपी के बाद होने वाली कमजोरी को भी दूर करने में सहायक होता है और यह मरीज की रिकवरी को भी तेज करता है। अभी तक यह मशरूम चीन और जापान में ही उगाई जाती थी, लेकिन अब भारतीय किसान भी इसे उगा सकते हैं।
शोध और उत्पादन में सफलता
शुरुआत में इस मशरूम को उगाने के लिए गेहूं के भूसे से बनी खाद का प्रयोग किया गया था और उसमें सफलता भी मिली है। पिछले दो वर्षों से वैज्ञानिक इसे लकड़ी के बुरादे पर उगाने का शोध कर रहे थे, जिसके दौरान पहले से अधिक उत्पादन मिला है। एक बैग से चार बार फसल (तुड़ाई) की जा सकती है। यह मशरूम सुखाकर बेची जाती है और बाजार मे इसकी भारी मांग है और इसके साथ ही किसानों को इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है।
किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
निदेशालय के निदेशक डॉ. वी. पी. शर्मा ने बताया कि शिटाके मशरूम के बाद किसानों का रुझान आषधीय मशरूम की ओर तेजी के साथ बढ़ा है। अब मशरूम की प्रजाति टर्की टेल को लेकर भी किसानों को उगाने की तकनीक और प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रीय मशरूम मेले में भी इस प्रजाति की गुणवत्ता और खेती के तरीके बताए जाएंगे। इससे देश के किसान न केवल अपनी आय बढ़ा पाएंगे बल्कि औषधीय मशरूम की वैश्विक मांग का भी पूरा लाभ उठा पाने में सक्षम होगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
