
गन्ने की फसल में फूल का आना Publish Date : 24/08/2025
गन्ने की फसल में फूल का आना
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
गन्ने की खेती करने वाले किसानों में यह काफी समय से ही यह विश्वास रहा है कि गन्ने की फसल में फूल का आना अच्छा नहीं होता है, हालांकि गन्ने में फूल आने से होने वाली हानियों से वे अभी तक पूरी तरह से परिचित नही हैं। गन्ने की अधिक उपज देने वाली किस्में प्रायः फूल जाती हैं। भारत के दक्षिणी भागों (उष्णकटिबन्धीय) में उत्तरी भागों (उपोष्ण कटिबन्धीय) की अपेक्षा गन्ना बहुत अधिक फूलता है। यह उन किसानों के लिए एक समस्या है जो अपनी फसल को फूलने के 1-4 माह बाद काटना चाहते हैं। दक्षिण भारत में अक्तूबर-नवम्बर के महीन में ही पूरे गन्ने का खेत का खेत फूला दिखाई देता है। दिसम्बर और जनवरी में गन्ने के सिर पर केवल फूल का सूखा डण्डल लकड़ी जैसा दिखाई देता है।
उत्तरी भारत में विशेष रूप से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गन्ने की कुछ किस्मो में फूल दिसम्बर-जनवरी में दिखाई देते हैं और फूल का सूखना फरवरी से शुरू हो जाता है। फूल आाने के बाद गन्ने में नयी पत्तियों तथा तनों का बनना बिल्कुल बंद जाता है तथा गन्ने का पोर खोखला हो जाता है। यह गन्ने के कारी पोर से शुरू होकर नीचे की तरफ फैलता है। यह समस्या कुछ गन्ने की किस्मों में इसकी दूसरी किन्मों की अपेक्षा अधिक होती है। अन्त में गन्ने की ऊपर की आँखें जमने लगती है बीर काली बढ़ जाती है। इसलिए यदि गन्ने की इन किस्मों में फूल का आना रोक दिया जाय तो इसकी उपज वर्तमान खेती की अपेक्षा अधिक लाभप्रद होगा।

गन्ने में फूल क्यों, कैसे और कब आता है-
गन्ने को फूलने से रोकने के पहले यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि गन्ने में फूल क्यों, कैसे और कब आता है। जैसा कि किसान भाईयों को मालूम है कि गन्ने के बहुत से पौधें के फूलने का एक विशेष समय होता है और काल में ही वह अक्सर फूलते हैं। गन्ने में फूल का आना बहुत सी बातों पर निर्भर करता है, जिसमें रात और दिन को लम्बाई प्रधान होती है। इसके अलावा तापमान और भूमि की नमी आदि का भी इस पर विशेष प्रभाव पड़ता है। प्रायः देखा गया है कि साधारणतः लगभग साढ़े ग्यारह घन्टे की रात गन्ने में फूल आने के लिए जरूरी होती है।
क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह लम्बी रातें ही गन्ने में फूल आने के लिए अधिक अनुकूल होती हैं। पूरे वर्ष के अन्दर जब भी रातें लगभग इतने घन्टे की होती हैं तो फूल बनने के अन्य कारकों के अनुकूल होने पर फूल का आना शुरू हो जाता है।
लखनऊ में गन्ने में फूल बनने की शुरुआत के समय रातें लगभग 12 घन्टे तक की होती हैं जबकि कोयम्बटूर में यह लगभग 11.25 घन्टे तक की ही देखी गयी है। ऐसा केवल इन दोनों स्थानों के तापमान के अन्तर के कारण सम्भव हो सकता है।
गन्ने में फूल आने की शुरुआतः गन्ने में फूल आने की घटना किसी विशेष रात या दिन की लम्बाई पर निर्भर करती है, जब भूमि या वातावरण में नमी, वायु तथा तापमान फूल आने के लिए अनुकूल हो। ऐसे समय में गन्ने की विशेष कर ऊपर की पत्तियां सूर्य की रोशनी द्वारा एक हारमोन बनाती है। यह औसत तापमान और भूमि की नमी की उपस्थिति में पत्ती द्वारा गन्ने के तने के अन्तिम ऊपरी सिरे पर पहुंचता है। हारमोन बनने और फूल के आने की शुरुआत के बीच का समय कुछ ही दिनों का होता है, जिसमें गन्ने की किस्मों और जलवायु के अनुसार अन्तर होता है। इसको हारमोन उपस्थिति में फल का बनना शुरू हो जाता है तथा नई पत्ती और पोर का बनना बिल्कुल बंद हो जाता है।

गन्ने में फल बनने की शुरुआत पूरे भारत में एक समय पर नहीं होती है क्योंकि साढ़े ग्यारह घन्टे की रात या किसी विशेष दिन या रात की लम्बाई को फल आने के अनुकूल होती है और यह स्थिति सभी स्थानों में एक समय पर नहीं होती है। 21 जून से 21 दिसम्बर तक दिन छोटा और रात बड़ी होती जाती है तो 21 दिसम्बर से 21 जून का समय इसके ठीक विपरीत होता है। 21 जून को उत्तरी ध्रुव पर 24 घन्टे का रेखा पर 12 घन्टे का और दक्षिणी ध्रुव पर 0 घन्टे का दिन होता है। इन दिनों के बीच के समय में दिन को लम्बाई उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव को ओर कम होती जाती है जबकि दिसम्बर 21 को इसके ठीक विपरीत होता है। जबकि रात उत्तरी ध्रुव पर 24 घन्टे की और दक्षिणी ध्रुव पर होते हुए 0 घन्टे की हो जाती है। पृथ्वी पर सभी जगह केवल सितम्बर 21 और मार्च 21 को दिन व रात बराबर होते है।
इसके अलावा किसी भी समय दिन और रात की लम्बाई भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होती है। यही कारण है कि लखनऊ (अक्षांश 26°) में फूल आने की शुरुआत अधिकांश गन्ने की किस्मों में सितम्बर के तीसरे और चौथे हफ्ते में होती है जबकि जिला बीजापुर (बक्षांश 16°), मैसूर राज्य में यह अगस्त के लगभग अन्तिम और सितम्बर के पहले हफ्ते में तथा कोयम्बटूर अक्षांश 110, में जुलाई के अन्तिम हफ्ते से अगस्त के दूसरे हफ्ते तक होता हैं। फूल बनने के दिन से इसके ऊपर निकल कर दिखाई देने के समय तक साधारणतया लगभग 60-100 दिन तक लग जाते हैं। यह समय गन्ने की किस्म तथा जलवायु पर निर्भर करता है। अगर गन्ने में फूल आने की शुरुआत का दिन एक स्थान पर मालूम हो जाये तो भारत के किसी भी भाग में फूल के आने का दिन मालूम किया जा सकता है।
ऐसा है कि विषुवत रेखा से दूर जाने पर प्रति एक अंश अक्षांश के अन्तर पर लगभग 2-4 दिन की फूल लगने में देरी हो जाती है। यद्यपि गन्ने की किस्म, स्थान और जलवायु के कारण इसमें थोड़ा अन्तर भी हो़ सकता है। विषुवत रेखा से नजदीक के स्थानों में गन्ने के फूलने का समय काफी लम्बा होता हैं और ज्यो-ज्यों दूर होते जाते हैं, यह समय भी कम होता जाता है। क्योंकि विषुवत रेखा के पास रात और दिन का समय, जो फूलने के अनुकूल होता है, कांफी दिनों तक एक सा रहता है, जबकि दूर होने पर घटता बढ़ता है। दक्षिण भारत में पहले तथा अधिक फूल आने का कारण विषवत रेखा के पास तथा जलवायु का अनुकूल होना है।
गन्ने के पौधों को फूलने के लिए एक औसत वानस्पतिक वृद्धि की आवश्यकता होती है जिसकी प्राप्ति निश्चित अवस्था में होती है। गन्ने की किस्मों के अनुसार इसमें थोड़ा बहुत अन्तर हो सकता है। यही कारण है कि जनवरी से मई के शुरू तक बोया गया गन्ना अक्तूबर व नवम्बर में फूल जाता है यद्यपि बाद में बोये हुये गन्ने की फसल में फूल निकलने का प्रतिशत पहले बोये हुये गन्ने की अपेक्षा कम होता है जो गन्ने के ब्यांत की मात्रा और उसकी उम्र पर निर्भर करता है। जबकि जून और उसके बाद के माह में बोये गन्ने, आने वाले अक्तूबर-नवम्बर में न फूलकर दूसरे वर्ष के अक्तूबर-नवम्बर में फूलते हैं। क्योंकि उम्र कम होने के कारण फूल बनने के शुरू के दिनों का पौधा सूर्य की रोशनी द्वारा फूल बनाने वाला हारमोन नहीं बना पाता, जिससे गन्ना नहीं फूलता है और फिर दूसरे वर्ष का फूल बनने वाले समय में ही फूलता है।
उपरोक्त तथ्यों का ज्ञान होने पर गन्ने की फसल को फूलने से रोका जा सकता है। उन दिनों जब फूल बनने के लिये पत्तियाँ सूर्य की रोशनी द्वारा हारमोन बनाती है, निम्नलिखित विधियों में से किसी भी एक विधि के द्वारा गन्ने में फूल का आना रोका जा सकता है।
1- ऐसे दिनों ऊपरी पत्तियों को जो फूल बनने के लिये जरूरी हारमोन को बनाती हैं, उन्हें काट दिया जाए।
2- ऐसे दिनों में ऊपरी पत्तियों पर ऐसा रासायनिक पदार्थ छिड़का जाय कि वे सूख जायें और फूल बनाने वाला हारमोन न बनने पाए।
3- ऐसे दिनों में गन्ने के खेत की सिचाई नहीं करना चाहिए।
4- ऐसे दिनों में रात को कुछ समय के लिए खेत में पौधों को रोशनी दी जानी चाहिए।
5- गन्ने की अवसाली (जुलाई, अगस्त और सितम्बर) देश के ऊष्ण कटिबन्धीय भागों में गन्ने की बुवाई करना उचित रहता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
