नील हरित शैवाल के उपयोग से धान की मिलती है बंपर पैदावार      Publish Date : 28/07/2025

नील हरित शैवाल के उपयोग से धान की मिलती है बंपर पैदावार

                                                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ. शालिनी गुप्ता

धान की नर्सरी 20 से 25 दिन की हो गई हो तो बुवाई के लिए तैयार किए गए खेतों में धान की रोपाई कर देनी चाहिए। इस क्रम में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें, जिससे पौधों का विकास अच्छा हो सके और ट्रिलर्स  भी अच्छे निकलें।

धान की खेती के लिए 100 किलोग्राम नाइट्रोजन 60 किलोग्राम फास्फोरस तथा 40 किलोग्राम पोटाश और 20 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। यदि आपके पास नील हरित शैवाल है तो उसका भी उपयोग करें। नील हरित शैवाल एक पैकेट प्रति एकड़ की दर से उन्हें खेतों में प्रयोग करें। जिन खेतों में पानी खड़ा रहता है, इन खेतों में यदि नील हरित शैवाल का प्रयोग किया जाएगा तो उसे नाइट्रोजन की पूर्ति भी होगी और पौधों की वृद्धि भी अच्छी हो सकेगी।

                                                  

धान के पौधों का रंग पीला पड़ रहा हो तथा पौधों की ऊपरी पत्तियां पीली और नीचे की हरी हो तो जिंक सल्फेट हेप्टएहाइड्रेट 21 प्रतिशत 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 300 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। इससे आपके खेत में जो पीलापन दिखाई दे रहा है वह खत्म हो जाएगा। फसल में यदि पीलापन है तो समझ लीजिए कि आपके खेत की मिट्टी में जिंक तत्व की कमी है, इसलिए समय पर इसकी पूर्ति कर देंगे तो आपको धान का उत्पादन भी अच्छा प्राप्त होगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।