गवार की लाभकारी खेती एवं इसके उपयोग      Publish Date : 24/07/2025

              गवार की लाभकारी खेती एवं इसके उपयोग

                                                                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा

गवार की खेती किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। गवार की फसल, केवल 60 दिनों में तैयार हो जाने वाली इस फसल का उपयोग गोंद, चारा और दवा उद्योग में बहुतायत से किया जाता है।

यदि किसान भाई सीमित संसाधनों में अधिक लाभ देने वाली किसी फसल की तलाश कर रहे हैं, तो गवार की खेती उनके लिए इसका एक अच्छा विकल्प सिद्व हो सकती है। कृषि विभाग भी किसानों को गवार की उन्नत किस्में और तकनीकी जानकारी उपलब्ध करा रहा है जिससे कि अधिक से अधिक किसान इसकी खेती कर इसका लाभ उठा सकें। गवार की फसल कम पानी, कम लागत और 60-90 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके बीज, गोंद, चारे और दवा बनाने के रूप में उपयोग में लाए जा रहे है।

अब गवार (क्लस्टर बीन्स) की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प के रूप में उभरकर सामने आ रही है। कम लागत, कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल न केवल अच्छा मुनाफा देती है, बल्कि कृषि विविधीकरण में भी अहम भूमिका निभा रही है। देश के किसान अब परंपरागत फसलों के स्थान पर गवार की खेती को प्राथमिकता प्रदान कर रहे हैं।

गवार की फसल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल 60 से 90 दिनों के भीतर ही तैयार हो जाती है। ऐसे किसान, जिनके पास सीमित सिंचाई के साधन हैं, उनके लिए यह फसल आदर्श मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गवार की खेती के लिए बहुत अधिक खाद और कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे खेती की लागत भी अन्य फसलों की तुलना में काफी कम हो जाती है।

वैसे गवार की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है। इसका उपयोग सब्जी के रूप में तो होता ही है, इसके साथ ही इसके बीज और गोंद (गम) का उपयोग दवा उद्योग, बर्फ उद्योग, और पशु चारे के रूप में भी किया जाता है। यही कारण है कि इसकी कीमत स्थिर बनी रहती है, जिससे किसानों को निश्चित आमदनी की गारंटी भी मिलती है।

गांवों में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने वाला कृषि विभाग भी गवार की खेती को एक बेहतर विकल्प मानता हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाने में सहायक है और फसल चक्र में बदलाव लाने के लिए उपयोगी है।

देश में गवार की खेती करने वाले इन किसानों का कहना है कि इस फसल से उन्हें प्रति बीघा 6-8 क्विंटल उपज मिल रही है, जिससे उन्हें 15 से 20 हजार रुपये तक का सीधा मुनाफा हो रहा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।